राजस्थान का ऐसा इलाका जहां तलवारों के नीचे दूल्हा-दुल्हन लेते हैं फेरे, धार्मिक, शौर्य और संस्कृति का है अद्भुत संगम

Last Updated:November 24, 2025, 16:13 IST
Bhilwara News Hindi : राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि वीरता और आस्था की अनोखी विरासत है. यहां आज भी दूल्हा-दुल्हन तलवारों की छांव में फेरे लेते हैं, ताकि नकारात्मक शक्तियां दूर रहें और वैवाहिक जीवन में साहस, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहे. सदियों पुरानी यह परंपरा आधुनिक पीढ़ी में भी गर्व और जोश के साथ निभाई जा रही है.
भीलवाड़ा : राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र की शादियां केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि शौर्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम मानी जाती हैं. यहां आज भी कई ग्रामीण और शहरी परिवार प्राचीन परंपराओं को उसी गर्व के साथ निभाते हैं, जैसा सदियों से पहले होता आया है. इनमें सबसे अनोखी परंपरा है तलवार की नोक के नीचे या दो तलवारों के बीच फेरे लेना, जिसे मेवाड़ की धार्मिक, वीरता, सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है.
माना जाता है कि यह रस्म परिवार और समाज की रक्षा परंपरा का प्रतीक है जिसके जरिए दूल्हा-दुल्हन अपने वैवाहिक जीवन में साहस, निष्ठा और संरक्षण की भावना को अपनाते हैं. मान्यताओं के अनुसार तलवार को शक्ति, पवित्रता और बुराई के विनाश का प्रतीक माना जाता है. विवाह के फेरे तलवारों के बीच से लेने का अर्थ है कि नवविवाहित दंपत्ति दैवीय शक्ति के साये में आगे बढ़ रहा है.
तलवारों तले फेरे, परंपरा का पहरेदारकरण सिंह राठौर ने लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए बताया कि शादियों का सीजन चल रहा है और मेवाड़ क्षेत्र में शादियों के दौरान कई रस्में निभाई जाती है इसमें से सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण रस्म एक होने की होती है जो फेरे के दौरान निभाई जाती है इस रस्म के तहत वर वधु को या फिर दूल्हा दुल्हन को तलवारों के बीच फेरे दिलवाए जाते हैं तलवार की मौजूदगी विवाह को दुष्ट शक्तियों, नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाती है. इसी कारण यह रस्म केवल पारंपरिक नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह परंपरा आज से नहीं बल्कि प्राचीन समय से ही चलते हुए आ रही है और आज भी यह परंपरा जिंदा है ग्रामीण क्षेत्र हो या फिर शहरी क्षेत्र आज आधुनिकता के दौर में भी युवाओं में इस रस्म को लेकर विशेष उत्साह देखा जाता है. तलवारों के नीचे लिए गए फेरे घर में सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में शांति लेकर आते हैं
बुरी शक्तियों का होता है नाशयह एक ऐसी रस्म है जिसमें अगर तलवारों के नीचे वर वधु या फिर दूल्हा दुल्हन को फेरे दिलवाई जाते हैं तो इस दौरान बुरी शक्तियों का एक साथ नाश हो जाता है और कोई बुरी शक्ति शादी के इस बंधन को कमजोर नहीं कर पाती और पति पत्नी के बीच अटूट रिश्ता हमेशा बना रहता है यही कारण है कि आज के आधुनिक दौर में भी यह परंपरा हर व्यक्ति निभा रहा है.
Rupesh Kumar Jaiswal
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन… और पढ़ें
Location :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
November 24, 2025, 16:12 IST
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राजस्थान में तलवारों तले फेरे, शादी में धर्म-शौर्य और संस्कृति का संगम



