Animal Ear Tag: जानिए पशुओं के लिए कितना जरूरी है ईयर टैग, इससे पशुपालकों को मिलता है बीमा, सब्सिडी और उपचार का लाभ

Last Updated:October 15, 2025, 19:49 IST
Animal Ear Tag: मादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान और सरकारी योजनाओं के लाभों को पारदर्शी रूप से पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए ईयर टैग लगाया जाता है. इसमें दर्ज 12 अंकों का विशिष्ट कोड पशु की सटीक पहचान करता है और भारत पशुधन ऐप पर उसकी सभी जानकारी सुरक्षित रहती है. ईयर टैग से टीकाकरण प्रबंधन, बीमा प्रक्रिया और स्वास्थ्य रिकॉर्ड में भी आसानी होती है.
मादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ पशुपालकों तक पारदर्शिता से पहुंचाने के लिए ईयर टैग लगाया जाता है. पशु पालन विभाग को हर पशु की सटीक पहचान और जानकारी मिल जाती है. टैग में दर्ज 12 अंकों का विशिष्ट कोड पशु को अलग पहचान देता है, इस ईयर टैग से पशु पालकों को भी बहुत फायदा होता है.

ईयर टैग लगाने का मुख्य उद्देश्य पशु की सही पहचान करना है. टैग लगाने के बाद पशु और पशुपालक दोनों की जानकारी भारत पशुधन ऐप पर दर्ज की जाती है. इस ऐप में पशु की वंशावली, उम्र, नस्ल और संतति से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं. इससे सरकार को पशुधन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती है.

ईयर टैग से टीकाकरण प्रबंधन में भी काफी आसानी होती है. हर पशु के टीकाकरण का पूरा इतिहास टैग के कोड के साथ दर्ज किया जाता है. इससे भविष्य में टीकाकरण की सही योजना बन पाती है. पशु के स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी जानकारी डिजिटल रूप में आसानी से प्राप्त की जा सकती है, जिससे रोग नियंत्रण संभव होता है.

पशु बीमा और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के लिए भी ईयर टैग जरूरी है. जब किसी पशु का बीमा कराया जाता है या उसकी मृत्यु के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाई जाती है, तो उसमें टैग नंबर की जानकारी ही मांगी जाती है. इससे फर्जीवाड़े की संभावना समाप्त होती है और वास्तविक पशुपालक को ही बीमा राशि का लाभ मिलता है.

पशुपालकों में यह भ्रांति रहती है कि ईयर टैग केवल बैंक लोन के लिए जरूरी होता है, जबकि ऐसा नहीं है. सरकार भी सभी पशुओं को टैग लगाने को लेकर बढ़ावा दे रही है. यह टैग कान के बीच के हिस्से में लगाया जाता है, जहां कोई रक्त वाहिनी नहीं होती. इस प्रक्रिया से पशु को बहुत हल्का दर्द होता है और दूध उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता.

ईयर टैग लगाने के बाद संक्रमण से बचाव के लिए पशु के कान पर एंटीसेप्टिक विलयन लगाया जाता है, इससे किसी भी प्रकार के जीवाणु संक्रमण की संभावना नहीं रहती. टैग टिकाऊ और जलरोधी होता है, जो लंबे समय तक सही रहता है. यह पशु की पहचान का स्थायी प्रमाण बन जाता है, जिससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी नहीं होती.

पशुचिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. योगेश आर्य के अनुसार, ईयर टैग लगाने के बाद पशु की उम्र, लिंग, कृत्रिम गर्भाधान, ब्यात और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज रहती हैं. यह टैग पशु के स्वामित्व का सबूत होता है. सरकारी योजनाओं जैसे बीमा, सब्सिडी और उपचार लाभ लेने के लिए ईयर टैग का होना अनिवार्य है.
First Published :
October 15, 2025, 19:49 IST
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जानिए ईयर टैग से पशुपालकों को पशु पहचान और सरकारी योजनाओं का लाभ



