Rajasthan

ब्रज में अनकूट पर्व 2026: श्रीकृष्ण को अन्न भोग

Last Updated:January 02, 2026, 09:37 IST

Bharatpur: भरतपुर सहित ब्रज क्षेत्र में अनकूट पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया. कड़ी, बाजरा और खीर सहित विभिन्न अन्न भोग भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए गए. प्रसाद वितरण और सामूहिक भजनों से पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में डूबा नजर आया.

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भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर सहित संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में आस्था का प्रतीक ‘अनकूट पर्व’ बेहद श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया. यह पर्व न केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है, बल्कि ब्रज की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है. नए साल के आगमन के साथ ही मंदिरों और घरों में अनकूट के अवसर पर विशेष धार्मिक उत्सव का माहौल बना रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से ठाकुर जी की आराधना की.

धार्मिक और भाषाई दृष्टि से ‘अनकूट’ शब्द का अर्थ ‘अन्न का ढेर’ होता है. इस पावन दिन पर भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के अनाजों और पकवानों का विशाल भोग लगाया जाता है. ब्रज की परंपरा के अनुसार, इस भोग में विशेष रूप से कड़ी, बाजरा और खीर का समावेश होता है. इसके साथ ही मौसमी सब्जियों, दाल, चावल और कई स्थानीय व्यंजनों को मिलाकर एक विशाल भोग तैयार किया जाता है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन ठाकुर जी को विविध व्यंजनों का अर्पण करने से घर में सुख-समृद्धि और अन्न के भंडार भरे रहते हैं.

गोवर्धन पूजा से जुड़ा है पर्व का इतिहासअनकूट पर्व का सीधा संबंध द्वापर युग की गोवर्धन लीला से है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने के लिए अपनी कनिष्ठा उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था, तब ब्रजवासियों ने उनकी इस लीला और सुरक्षा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए 56 भोग अर्पित किए थे. उसी परंपरा का निर्वहन आज भी अन्नकूट के रूप में किया जाता है. यह पर्व मनुष्य के प्रकृति और ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करने का एक अनूठा माध्यम है.

प्रसाद वितरण और सामाजिक समरसतामंदिरों में पूजा-अर्चना और भव्य आरती के पश्चात तैयार किए गए अनकूट के भोग को महाप्रसाद के रूप में वितरित किया गया. भरतपुर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जो भगवान का आशीर्वाद और प्रसाद ग्रहण करने के लिए आतुर दिखे. भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोकर सामाजिक समरसता और सामूहिकता का संदेश भी दिया. पीढ़ियों से चली आ रही यह विरासत आज भी ब्रज की पहचान बनी हुई है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

January 02, 2026, 09:37 IST

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भरतपुर में अनकूट पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया, कड़ी-बाजरा-खीर के भोग से सजी..

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