Rajasthan

At the 1500-year-old Neelkanth Mahadev Temple, 125,000 Mahamrityunjaya chants, Mahamrityunjaya Rudrabhishek, and Namak-Chamaka recitations are performed.

Last Updated:January 05, 2026, 08:11 IST

Kota News: कोटा के रेतवाली में स्थित 1500 साल पुराने नीलकंठ महादेव मंदिर में सवा लाख महामृत्युंजय जाप और विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है. यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू है और मान्यता है कि इसका आकार लगातार घट रहा है.

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कोटा: आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने के लिए कोटा के रेतवाली क्षेत्र में स्थित लगभग 1500 वर्ष प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इस प्राचीन शिवालय की ऐसी मान्यता है कि यहाँ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और विशेष अभिषेक के लिए पहुँचते हैं. कोटा संभाग में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर और शिवालय स्थित हैं जहाँ शिव परिवार के दर्शन होते हैं, लेकिन नीलकंठ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्भुत मान्यताओं के कारण विशेष स्थान रखता है.

स्वयंभू शिवलिंग और घटता आकारमंदिर के पुजारी पंडित हिमांशु शर्मा के अनुसार नीलकंठ महादेव स्वयंभू हैं, जिसका अर्थ है कि यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है. यह मंदिर लगभग पंद्रह सौ वर्ष पुराना है और पिछले 100 वर्षों से यहाँ अखंड ज्योति निरंतर प्रज्वलित है. इस शिवलिंग की सबसे चौंकाने वाली विशेषता यह है कि समय के साथ इसका आकार छोटा होता जा रहा है और वर्तमान में यह मात्र एक इंच के आसपास दिखाई देता है. मान्यता है कि शिवलिंग की जड़ें पाताल लोक तक जाती हैं, इसी कारण इसे हार्डकेश्वर लिंगम के नाम से भी जाना जाता है.

रहस्यमयी शिलालेख और प्राचीन इतिहासमंदिर परिसर में कई प्राचीन धार्मिक प्रतीक मौजूद हैं जो इसके गौरवशाली इतिहास की गवाही देते हैं. शिवलिंग के सामने दक्षिणमुखी हनुमानजी की प्रतिमा और उनके ठीक सामने काल भैरव विराजमान हैं. इन दोनों के मध्य एक प्राचीन साधु की समाधि स्थित है जिसका निर्माण कोटा दरबार द्वारा कराया गया था. परिसर में एक शिलालेख भी लगा हुआ है जो लगभग 1500 वर्ष पुराना बताया जाता है, लेकिन इसकी प्राचीन भाषा को आज तक कोई समझ नहीं सका है. पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ वन में तपस्या कर रहे एक साधु के मोक्ष प्राप्त करने के समय ही महादेव का प्राकट्य हुआ था.

विशेष अनुष्ठान और धार्मिक मान्यताएंविशेषकर सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर में सवा लाख महामृत्युंजय जाप, महामृत्युंजय रुद्राभिषेक, नमक-चमक पाठ, 11 नमस्ते पाठ और विशेष रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं. भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इन विशेष पूजाओं से असाध्य रोग दूर होते हैं, दुखों का नाश होता है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. वर्तमान में यह ऐतिहासिक स्थल पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और कोटा की धार्मिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Kota,Kota,Rajasthan

First Published :

January 05, 2026, 08:11 IST

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क्या आपने कभी घटता हुआ शिवलिंग देखा है? यहां छुपा है 1500 साल पुराना रहस्य

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