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Last Updated:December 27, 2025, 16:36 IST
Balwada Modern Hospital: बालवाड़ा की यह कहानी संघर्ष और सेवा की मिसाल है. जहां एक बेटे ने अपने पिता को इलाज के अभाव में खोया, उसी जगह उसने करोड़ों रुपये की लागत से एक आधुनिक अस्पताल खड़ा कर दिया. इस अस्पताल से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी. निजी दर्द को समाजसेवा में बदलकर इस बेटे ने बालवाड़ा को स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है.
जालौर: जालोर जिले के बालवाड़ा गांव, जहां एक बेटे ने पिता की याद को हकीकत में बदल दिया. करीब 43 साल पहले, इलाज के अभाव में नथमल मोतीलाल जैन के पिता का निधन हो गया था. उस समय गांव में केवल एक छोटा-सा आयुर्वेदिक अस्पताल था, जहां समय पर और उचित इलाज नहीं मिल सका. यह घटना नथमल जैन के लिए सदैव दर्द और अधूरी इच्छा के रूप में रही.
नथमल जैन, जो वर्तमान में मुंबई में व्यवसाय करते हैं, ने अपने पिता की याद में और गांव के लोगों के भले के लिए इस अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने का संकल्प लिया. उन्होंने बालवाड़ा ग्राम पंचायत की 5 बीघा सरकारी भूमि पर तीन करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया. इस हॉस्पिटल में ओपीडी, प्रसव कक्ष, जांच कक्ष, दवा वितरण कक्ष और स्टाफ के लिए आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं.
दूर-दराज की यात्रा न करेंहॉस्पिटल का नाम रखा गया है– ‘सुरजबेन नथमल मोतीलालजी जैन राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बालवाड़ा’. नथमल जैन ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल अपने पिता की याद को संजोना नहीं था, बल्कि गांव के लोग अब इलाज के लिए दूर-दराज की यात्रा न करें और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें.
हॉस्पिटल बनाने के लिए प्रेरित करती रहीसमय के साथ बालवाड़ा में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास तो हुआ, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं पिछड़ी रह गई थीं. इलाज के लिए लोग मांडवला, सायला और जालोर तक जाते थे. कई बार समय पर उचित इलाज न मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती थी. यही सोच नथमल जैन को अपने पिता की याद में हॉस्पिटल बनाने के लिए प्रेरित करती रही.
इस हॉस्पिटल के निर्माण में सरकार का भी पूरा सहयोग मिला। भवन निर्माण कार्य साल 2023 में शुरू हुआ और नवंबर 2025 तक पूरा हो गया। अब यह स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए एक सुरक्षित जगह के रूप में कार्य करेगा।
हमारे गांव की सेवा का प्रतीकनतमल जैन ने लोकल 18 को जानकारी दी कि मुझे हमेशा यह खेद रहा कि मेरे पिता का समय पर इलाज नहीं हो सका. उनकी अधूरी इच्छा को पूरा करना मेरा सपना था. इस हॉस्पिटल के माध्यम से मैं चाहता हूं कि गांव के लोग कभी भी इलाज के अभाव में भटकने न पड़े. यह मेरे पिता की याद और हमारे गांव की सेवा का प्रतीक है.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Location :
Jalor,Rajasthan
First Published :
December 27, 2025, 16:36 IST
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बालवाड़ा को मिला मॉडर्न हॉस्पिटल, बेटे ने बदला पिता की मौत का दर्द सेवा में



