बीएसएनएल ऑफिस में बार्न आउल रेस्क्यू

Last Updated:November 29, 2025, 08:41 IST
Barn Owl Rescue in Bhilwara BSNL Office: बीएसएनएल ऑफिस, भीलवाड़ा में दो बार्न आउल (टाइना अल्बा प्रजाति) अचानक उड़ते दिखाई देने से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया. वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुँचकर दोनों पक्षियों को सुरक्षित पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ा. बार्न आउल दिल के आकार वाले चेहरे और तेज दृष्टि के लिए जाने जाते हैं तथा पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
भीलवाड़ा. भीलवाड़ा स्थित बीएसएनएल ऑफिस में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक ऑफिस के अंदर दो बार्न आउल (टाइना अल्बा प्रजाति) उड़ते हुए दिखाई दिए। कर्मचारियों ने जैसे ही इन उल्लुओं को अंदर इधर-उधर उड़ते देखा, घबराहट फैल गई और कामकाज कुछ देर के लिए पूरी तरह रुक गया। तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ़ रेस्क्यूर नारायण लाल बैरवा, वनरक्षक रूपेंद्र सिंह पुरावत और उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुँची. टीम ने बिना किसी नुकसान के दोनों बार्न आउल को सुरक्षित पकड़ लिया. रेस्क्यूर बैरवा और वनरक्षक पुरावत ने बताया कि दोनों पक्षी दफ्तर की ऊँचाई पर जाकर फंस गए थे. टीम ने प्लास्टिक बकेट और सुरक्षा किट की मदद से कुछ ही मिनटों में उन्हें कैप्चर कर लिया. इसके बाद वन विभाग अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों को सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया. रिहाई के दौरान वनरक्षक दिनेश रैगर भी मौजूद रहे.
लोगों से अपील
वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने नागरिकों से अपील की कि यदि किसी आबादी वाले इलाके में बार्न आउल, उल्लू या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उन्हें नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग या रेस्क्यू टीम को सूचना दें. इन पक्षियों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजना आवश्यक होता है क्योंकि वे पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
बार्न आउल की खासियत: दिल के आकार का चेहरा और तेज दृष्टि
बार्न आउल दुनिया की सबसे व्यापक प्रजातियों में से एक है. दुनियाभर में उल्लुओं की 223 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं, लेकिन बार्न आउल की पहचान विशेष होती है.
इसके चेहरे पर दिल के आकार की संरचना, काली आंखें और हल्के रंग के मुलायम पंख इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं.
यह हूटऊ जैसी आवाज नहीं करते, बल्कि एक तेज खुरदुरी “स्क्रीच” ध्वनि निकालते हैं.
इनकी दृष्टि क्षमता बेहद तेज होती है और यह पूर्णत: रात्रिचर प्रजाति हैं.
मादा आमतौर पर नर से थोड़ी भारी होती है—मादा का वजन लगभग 360 ग्राम जबकि नर का औसत 330 ग्राम होता है.
इनका मुख्य भोजन छोटे चूहे, कीड़े और कृषि क्षेत्रों में पाए जाने वाले छोटे जीव होते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में इनकी भूमिका अहम होती है.
Location :
Bhilwara,Bhilwara,Rajasthan
First Published :
November 29, 2025, 08:41 IST
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बीएसएनएल ऑफिस में अचानक हुआ कुछ ऐसा भागने लगे सब, देख लोगों के उड़ गए होश!



