Rajasthan

IAS संतोष वर्मा से कम चर्चित नहीं रहे हैं IPS पंकज चौधरी, जानें बर्खास्तगी से बहाली तक की कहानी

जयपुर. राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को सेवा में बहाल कर दिया गया है. लंबे समय से उनकी बर्खास्तगी चर्चा में रही थी और अब बहाली के आदेश सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में प्रमुख विषय बन गया है. आईपीएस चौधरी राजस्थान पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस में आए थे और उन्होंने कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. उनके सख्त रवैये और फील्ड में सक्रियता की वजह से वे हमेशा चर्चा में रहे. दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश के IAS संतोष वर्मा, जिन्होंने फर्जी प्रमोशन और ब्राह्मण बेटियों पर आपत्तिजनक बयान देकर हंगामा मचाया, अब डिसमिसल की कगार पर हैं. राज्य सरकार ने सेंटर को सिफारिश भेज दी है. दोनों मामलों में एक समानता यह है कि पर्सनल मिसकंडक्ट से शुरू हुई जंग, जो अब राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी कर रही है.

2009 बैच के राजस्थान कैडर के आईपीएस पंकज चौधरी का सफर किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले चौधरी ने सेवा के दौरान जैसलमेर में एसपी रहते हुए 2013 में प्रभावशाली मुस्लिम नेता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलकर और उनके बेटे, तत्कालीन कांग्रेस विधायक सालेह मोहम्मद पर केस दर्ज कराकर सुर्खियां बटोरीं. इसके बाद 2019 में ही चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा में रहे, लेकिन असली विवाद इसी साल सामने आया, जब उन पर “बिना तलाक दो शादियां” करने के आरोप लगाए गए. इस आधार पर अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ और मार्च 2019 में राजस्थान सरकार ने उन्हें सर्विस से बर्खास्त कर दिया.

डिमोशन तक का करना पड़ा सामना

आईपीएस पंकज चौधरी ने हार नहीं मानी और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की प्रधान पीठ ने दिसंबर 2020 में बर्खास्तगी रद्द कर बहाली का आदेश दिया. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में बहाली का आदेश जारी कर दिया. राज्य कार्मिक विभाग ने उन्हें ज्वाइनिंग भी दे दी. वर्तमान में वे जयपुर पुलिस मुख्यालय में कम्युनिटी पुलिसिंग एसपी के पद पर काम कर रहे हैं. लेकिन फरवरी 2025 में उन्हें फिर डिमोशन का सामना करना पड़ा. तीन साल के लिए उनका पे-स्केल घटा दिया गया, जिसे बाद में CAT ने रद्द कर दिया. चौधरी इसे “राजनीतिक साजिश” बताते हैं. उनका कहना है कि वसुंधरा राजे से लेकर अशोक गहलोत तक, वे हर सरकार से किसी न किसी मोर्चे पर टकराते रहे हैं.

बहाल हो जाने के बाद भी पोस्टिंग नहीं हो सकी है

चौधरी की बहाली ने न सिर्फ राजस्थान में बल्कि अन्य राज्यों के प्रशासनिक ढांचे में भी हलचल मचा दी है. कई अधिकारी इस मामले को ध्यान से देख रहे थे, क्योंकि यह उसी पैटर्न की तरफ इशारा करता है, जो वर्षों पहले मध्य प्रदेश के विवादास्पद आईएएस वर्मा केस में देखने को मिला था. वर्मा के खिलाफ भी लगातार कार्रवाई, निलंबन, तबादले और फिर बहाली का सिलसिला चलता रहा था. वह मामला भी राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का उदाहरण बन गया था. चौधरी का मामला भी उसी तरह चर्चा में रहा, क्योंकि बर्खास्तगी के समय यह माना गया कि कार्रवाई केवल विभागीय नहीं बल्कि कई स्तरों पर प्रभाव डालने वाली थी.

बहाली का आदेश जारी होते ही अगली चुनौती उनकी पोस्टिंग को लेकर सामने आएगी. यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें फील्ड में लाया जाएगा या किसी गैर-फील्ड पद पर नियुक्त किया जाएगा. कई जिलों में कानून व्यवस्था से जुड़े हालात और हाल ही में बढ़ी गैंगवार की घटनाएं ऐसे हैं कि अनुभवी अधिकारी की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि बर्खास्तगी और बहाली के घटनाक्रम को देखते हुए चौधरी को कोई भी संवेदनशील पद देने में विभाग सावधानी बरत सकता है.

आईपीएस चौधरी की बहाली ने अफसरशाही में हलचल पैदा कर दी है

पुलिस महकमे के भीतर भी इस फैसले को हलचल देखने को मिली है.  चौधरी की सर्विस में वापसी ऐसे समय हुई है जब राजस्थान की पुलिस को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. शेखावाटी-नागौर बेल्ट में गैंगवार की घटनाएं बढ़ी हैं, पुलिस-जनता के बीच विश्वास की खाई को लेकर चर्चाएं हो रही हैं और फील्ड स्तर पर कई जिलों में मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है. चौधरी की कार्यशैली को देखते हुए कई लोग मानते हैं कि वे फील्ड में अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते रहे हैं और अगर उन्हें किसी महत्त्वपूर्ण जिले में जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो प्रशासनिक ढांचे में कुछ नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस पद पर तैनाती मिलेगी, लेकिन इतना साफ है कि उनकी बहाली ने राज्य की अफसरशाही में फिर से हलचल पैदा कर दी है. बर्खास्तगी से बहाली तक की यह पूरी प्रक्रिया राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है. आदेश जारी होने के बाद अब विभाग द्वारा अगली नियुक्ति तय किए जाने का इंतजार है.

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