बाईपास प्रोटीन के फायदे: दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता में वृद्धि

Last Updated:November 28, 2025, 11:44 IST
Benefits of Bypass Protein In Cattle: बाईपास प्रोटीन जुगाली करने वाले पशुओं में रूमन से बचकर सीधे आंतों में अवशोषित होता है, जिससे पशु को संपूर्ण पोषण मिलता है. इससे दूध उत्पादन में 10-20% तक और प्रजनन क्षमता दोनों में वृद्धि होती है, जो पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ देता है. इसकी मात्रा विशेषज्ञ की सलाह पर ही तय करनी चाहिए.
पशुओं में दूध उत्पादन बढ़ाने और उनकी सेहत को मज़बूत बनाए रखने के लिए बाईपास प्रोटीन का उपयोग पशुपालकों के लिए फ़ायदे का सौदा है. जुगाली करने वाले पशुओं में रूमन (पेट के पहले हिस्से) के अंदर मौजूद सूक्ष्मजीव आहार के अधिकांश हिस्से का पाचन करते हैं, जिससे सामान्य प्रोटीन का एक बड़ा भाग टूट जाता है. ऐसे में बाईपास प्रोटीन वह प्रोटीन है जो रूमन में टूटता नहीं, बल्कि सीधे आंतों में अवशोषित होकर पशु के शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि प्राकृतिक रूप से भी कुछ चारे और दानों में बाईपास प्रोटीन के तत्व पाए जाते हैं. इनमें बिनौला की खल, अलसी की खल, सोयाबीन, सुबबूल, ज्वार, बाजरा, मक्का और सूरजमुखी के बीज प्रमुख हैं. इन फ़ीड सामग्रियों में मौजूद प्रोटीन का एक हिस्सा रूमन द्वारा नष्ट नहीं किया जाता, जिससे यह सीधे शरीर में उपयोग हो पाता है और पशु की पोषण क्षमता बेहतर होती है. यही कारण है कि इनका नियमित उपयोग पशुपालकों के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है.

पशु चिकित्सक ने बताया कि बाईपास प्रोटीन तैयार करने की प्रक्रिया तकनीकी होती है, इसलिए इसे शुरू करने से पहले प्रशिक्षण लेना ज़रूरी है. आमतौर पर सबसे पहले खल या खली की बारीक पिसाई की जाती है. इसके बाद इसे 3.5 से 4 प्रतिशत फ़ॉर्मेलिन से प्रोसेस किया जाता है. यह प्रक्रिया प्रोटीन के ऐसे अंशों को संरक्षित करती है जो रूमन में टूटने से बच जाते हैं और सीधे उच्च गुणवत्ता के पोषण के रूप में उपलब्ध रहते हैं.
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प्रोसेस की गई खली को प्लास्टिक बैग में 3 से 4 दिनों तक बंद करके रखा जाता है ताकि फ़ॉर्मेलिन की क्रिया पूरी तरह से हो सके. इसके बाद बैग को खुले वातावरण में रखकर इसकी गंध को दूर किया जाता है. जब यह पूरी तरह सुरक्षित और गंधरहित हो जाती है, तभी इसे पशुओं को खिलाया जाता है. इस पूरी विधि को सही तरीके से समझना आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पशुओं को दिया जाने वाला फ़ीड उच्च गुणवत्ता का और सुरक्षित हो.

बाईपास प्रोटीन कई स्तर पर पशुओं के लिए लाभदायक माना जाता है. यह अमीनो अम्लों की उपलब्धता बढ़ाकर शरीर की न्यूनतम पोषण आवश्यकताओं को पूरा करता है. इससे पशु की शारीरिक ताक़त बढ़ती है, स्वास्थ्य सुधरता है और शरीर का विकास बेहतर होता है. नियमित खुराक देने से पशुओं में हीट (Heat) का समय सुधरता है और प्रजनन क्षमता भी बढ़ती है, जो पशुपालकों के लिए सीधा फ़ायदा होता है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि बाईपास प्रोटीन के सेवन से दूध उत्पादन में भी वृद्धि देखी गई है. दूध में एस.एन.एफ. (SNF – सॉलिड नॉन फैट) की मात्रा बढ़ती है, जिससे दूध की गुणवत्ता बेहतर होती है. साथ ही, बछड़ों और बछड़ियों का विकास तेज़ होता है. यह प्रोटीन ऊर्जा के साथ-साथ शरीर की संरचनात्मक ज़रूरतों को पूरा करता है, जिससे पशु अधिक उत्पादक बनते हैं और बीमारियों का जोखिम भी कम होता है. उन्होंने यह भी बताया कि एक गाय को लगभग एक किलोग्राम बाईपास प्रोटीन सप्लीमेंट दिया जा सकता है. इसकी सटीक मात्रा ब्रांड और पशु की दूध उत्पादन क्षमता पर निर्भर करती है.
First Published :
November 28, 2025, 11:44 IST
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पशुपालकों के लिए फायदे का सौदा: इस प्रोटीन से बढ़ेगा उत्पादन, घटेगा खर्च



