वसुंधरा राजे के गले पड़ी अंता उपचुनाव की ‘हार’, जानें कैसे बच गए भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़? समझें पूरा गणित

Last Updated:November 19, 2025, 14:29 IST
Vasundhara Raje Latest News : अंता उपचुनाव की हार पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के गले पड़ती दिख रही है. पार्टी में उपचुनाव के प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों से राजे को घेरने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में इससे राजे की वापसी की कोशिशों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. अंता के उपचुनाव के बाद अब राजस्थान बीजेपी की राजनीति नई करवट ले रही है.
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अंता उपचुनाव की कमान पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के सांसद बेटे दुष्यंत के हाथ में थी.
जयपुर. राजस्थान में अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार की वजह क्या भजनलाल सरकार नहीं वसुंधराराजे थीं? क्या वसुंधराराजे और उनके समर्थकों ने पार्टी के प्रभावशाली नेताओं को अंता में प्रचार करने से रोका था? कुछ वक्त पहले तक राजे के सबसे करीबी माने माने वाले विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने आरोप लगाया कि अंता में उनको और प्रभाव रखने वाले कई अन्य नेताओं को प्रचार करने के लिए बुलाया ही नहीं गया. अगर सबको बुलाया गया होता तो रिजल्ट शायद कुछ और होता.
राजस्थान में अंता विधानसभा सीट पर बीजेपी की करारी हार के बाद अब इस पर तकरार हो रही है. अब नई रार बारां के छबड़ा से बीजेपी विधायक प्रताप सिंघवी के एक पत्र के वायरल होने के बाद शुरू हुई है. ये पत्र 7 नवंबर को सिंघवी ने उपचुनाव से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा था. पत्र में आरोप लगाया कि वो पार्टी के दूसरे सबसे सीनियर विधायक हैं. बारां जिले के सबसे सीनियर विधायक हैं. इसके बावजूद अंता सीट के लिए स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम नहीं रखा गया. चुनाव समिति में नाम रखने के अलावा उनसे किसी भी तरह की कोई सलाह भी नहीं ली गई.
सिंघवी राजे के सबसे करीबी माने जाते थेसिंघवी ने कहा कि अंता में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और उर्जा मंत्री नागर समेत कई विधायकों को चुनाव प्रचार में नहीं बुलाया गया. अगर मेरे समेत इन सभी नेताओं को बुलाया जाता तो कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाता. अंता सीट पर बीजेपी के चुनाव प्रचार की कमान पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बेटे और बारां- झालावाड़ सांसद दुष्यंत सिंह के पास थी. टिकट भी राजे और दुष्यंत सिंह के खेमे के मोरपाल सुमन को दिया था. सिंघवी के निशाने पर राजे और दुष्यंत सिंह ही हैं. खुद सिंघवी चुनाव से पहले तक राजे के सबसे करीबी माने जाते थे.
अंता राजे के प्रभाव वाला इलाका है.
विधायक प्रताप सिंह सिंघवी खासे आहत दिखाई दे रहे हैंपार्टी में हुई इस अनदेखी से वरिष्ठ विधायक प्रताप सिंह सिंघवी खासे आहत दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि मैंने चिट्ठी इसलिए लिखी कि स्टार प्रचारकों की सूची सामने थी. मैं बीजेपी का दूसरा सबसे सीनियर विधायक था. मेरे जिले में चुनाव थे उसके बावजूद मुझे सूची में नहीं रखा. जबकि उस सूची में जिले में मेरे से जूनियर विधायकों को रखा गया. मुझे रखते तो कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश जाता. सिंघवी छबड़ा से सातवीं बार विधायक हैं.
राजे ने अंता को अपने शक्ति प्रदर्शन के रूप में लियाबारां-झालावाड़ वसंधरा राजे का मजबूत सियासी गढ़ रहा है. राजस्थान में बीजेपी चुनाव हारे या जीते लेकिन राजे की बारां-झालावाड़ में पकड़ हमेशा मजबूत रही है. राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी के प्रदेशअध्यक्ष मदन राठौड़ ने राजे को नाराज करने के बजाय अंता सीट पर राजे के पसंद के मोरपाल सुमन को टिकट देना उचित समझा. यही नहीं उन्होंने उपचुनाव की पूरी जिम्मेदारी ही दुष्यंत सिंह को वहां का प्रभारी बनाकर राजे को सौंप दी थी. राजे ने अंता को अपने शक्ति प्रदर्शन के रूप में लिया.
अंता उपचुनाव की कमान पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह के हाथ में थी.
कई मंत्री अंता के चुनाव से दूर रहे या फिर राजे कैंप ने उनको दूर रखाकोटा डिविजन के ही भजनलाल सरकार के कई मंत्री अंता के चुनाव से दूर रहे या फिर राजे कैंप ने उनको दूर रखा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हालांकि प्रचार के आखिरी दिनों अंता में राजे के साथ ही रोड शो किए थे. अंता में हार के बाद गुटबाजी के सवाल को बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहनदास ने यह कहकर टालने की कोशिश की कि अशोक गहलोत अंता की जीत पर खुश न हो बल्कि बिहार की हार पर सोचें.
राजे को किनारे कर उनके किले में फतह नामुमकिन थाअंता उपचुनाव राजे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों के सामने लिटमस टेस्ट था. एक तरफ राजे राजस्थान में सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने या वापसी की कोशिश में जुटी थी. राजे को अपने ही गढ़ में चुनाव से खुद को साबित करने का मौका था. वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चिंता थी कि राजे को किनारे कर उनके किले में फतह नामुमकिन सी है. वो भी कांग्रेस के हैविवेट प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया के सामने.
वसुंधरा राजे ने कुछ समय पहले ही कहा था कि आजकल मौसम और इंसान कब बदल जाते हैं भरोसा नहीं? लोग अब राजनीति में नई दुनिया बसा लेते हैं.
अपने गुट की ताकत को बचाने की चुनौती भी खड़ी हो गई हैअगर बीजेपी राजे के बिना मैदान में उतरती और पार्टी प्रत्याशी हार जाता तो हार की माला मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गले में पड़ती. यानी सरकार की हार. ऐसे में भजनलाल शर्मा और राज्य ईकाई ने ऐसी रिस्क ली ही नहीं. अंता सीट पर राजे की पसंद का टिकट देकर राजे को ही साबित करने की चुनौती दे दी. राजे को शायद यकीन था कि वो अपने गढ़ में खुद के दम पर बीजेपी प्रत्याशी को जिता देगी. लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. अब हार के बाद राजे के ही करीबी रहे विधायक सिंघवी जिस तरह उन पर हमलावर हैं उससे लग रहा है कि उनके सामने अब अपने गुट की ताकत को बचाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है.
संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें
संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर… और पढ़ें
Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
November 19, 2025, 14:27 IST
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वसुंधरा राजे के गले पड़ी अंता उपचुनाव की ‘हार’, जानें कैसे बच गए राठौड़-शर्मा



