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काकजंघा जड़ी-बूटी के फायदे | Health Benefits of Kakjangha Herb in Ayurveda

Last Updated:December 30, 2025, 10:34 IST

दीपेंद्र कुमावत/ नागौर. पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में अनेक ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं, जो सदियों से घरेलू उपचार और औषधीय प्रयोग में लाई जाती रही हैं. काकजंघा उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से जाना जाता है. यह जड़ी-बूटी अपने औषधीय गुणों के कारण बुखार, त्वचा रोग, पेट की समस्याएँ और सूजन जैसी कई बीमकाकजंघा

पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में ऐसी अनेक जड़ी-बूटियाँ समाहित हैं, जिनका उपयोग सदियों से घरेलू उपचार और औषधियों के रूप में किया जा रहा है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा ‘काकजंघा’ है, जो विशेषकर ग्रामीण अंचलों में अपनी उपयोगिता के लिए सुविख्यात है. अपने विशिष्ट औषधीय गुणों के कारण यह जड़ी-बूटी बुखार, त्वचा संबंधी विकारों, उदर रोगों और शरीर की सूजन जैसी विभिन्न समस्याओं के निवारण में अत्यंत लाभकारी मानी जाती है. आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार, काकजंघा शरीर में कफ और पित्त दोष को संतुलित करने की क्षमता रखती है, जो न केवल बीमारियों से लड़ने में मदद करती है बल्कि शरीर के आंतरिक शुद्धिकरण (डिटॉक्सिफिकेशन) में भी सहायक सिद्ध होती है.

काकजंघा

काकजंघा न केवल शारीरिक व्याधियों को दूर करती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करने में भी सहायक मानी जाती है. आधुनिक जीवनशैली के दुष्प्रभावों से बचने के लिए इस तरह की प्राचीन जड़ी-बूटियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है. प्राकृतिक होने के कारण इसके दुष्प्रभाव नगण्य हैं, बशर्ते इसका सेवन विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार किया जाए.

काकजंघा

हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर अंजु चौधरी के अनुसार, काकजंघा बुखार और संक्रमण के उपचार में विशेष रूप से लाभकारी होती है. आयुर्वेद में इसे ‘ज्वरनाशक’ माना गया है, जो सामान्य बुखार के साथ-साथ संक्रमण के कारण होने वाले बुखार को कम करने में भी सहायक है. इसके काढ़े का नियमित सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अतिरिक्त, काकजंघा त्वचा रोगों के लिए भी एक उत्तम औषधि है. खुजली, फोड़े-फुंसी, दाद-खाज और विभिन्न प्रकार के चर्म रोगों में इसका लेप लगाना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण न केवल संक्रमण को रोकते हैं, बल्कि त्वचा को भीतर से साफ रखने में भी मदद करते हैं.

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काकजंघा

आयुर्वेद के अनुसार, काकजंघा पेट और पाचन तंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद मानी जाती है. यह पेट के कीड़े, बदहजमी और दस्त जैसी समस्याओं के उपचार में प्रभावी रूप से उपयोगी है. इसके सेवन से पाचन क्रिया में सुधार होता है और आंतें स्वस्थ रहती हैं. इसके अलावा, यह दर्द और सूजन से राहत दिलाने में भी सक्षम है. शरीर के किसी भी हिस्से में चोट, दर्द या सूजन होने पर काकजंघा का लेप लगाने से प्राकृतिक रूप से आराम मिलता है. श्वसन संबंधी विकारों में भी यह जड़ी-बूटी काफी कारगर है; यह फेफड़ों से कफ को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे सर्दी-खांसी, हिचकी और सांस लेने में होने वाली तकलीफों में महत्वपूर्ण राहत मिलती है.

काकजंघा

अधिकतर लोगों को काकजंघा के सटीक उपयोग की जानकारी नहीं होती है. ग्रामीण सीता देवी के अनुसार, काकजंघा को बेहद आसान तरीकों से दैनिक जीवन में उपयोग में लाया जा सकता है. मुख्य रूप से इसका उपयोग काढ़े, लेप और चूर्ण के रूप में किया जाता है. काढ़ा तैयार करने के लिए काकजंघा की सूखी या ताजी जड़ों और पत्तियों को पानी में अच्छी तरह उबाल लिया जाता है. जब पानी आधा रह जाए, तब इसे छानकर गुनगुना पीना अत्यंत लाभकारी होता है. विशेष रूप से बुखार और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में यह काढ़ा शरीर को तुरंत राहत पहुँचाने में मदद करता है.

काकजंघा

इसका लेप तैयार करने के लिए काकजंघा को अच्छी तरह पीसकर पेस्ट बना लें और इसे प्रभावित त्वचा या दर्द वाले स्थान पर लगाएं. यह विधि खुजली, सूजन और विभिन्न त्वचा रोगों में प्रभावी राहत प्रदान करती है. इसके अतिरिक्त, सूखी काकजंघा को बारीक पीसकर इसका चूर्ण भी बनाया जा सकता है, जिसे शहद या गुनगुने पानी के साथ सेवन करना स्वास्थ्यप्रद होता है. काकजंघा एक बहुउपयोगी देसी जड़ी-बूटी है, जो यदि सही तरीके और सही मात्रा में उपयोग की जाए, तो शरीर को अनेक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती है. प्राकृतिक चिकित्सा में इसका विशेष महत्व है और यह संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती है.

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December 30, 2025, 10:34 IST

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