भरतपुर किसानों का देसी जुगाड़! आवारा पशुओं से ऐसे बचा रहे गेहूं की फसल, लागत भी है बेहद कम

Last Updated:December 12, 2025, 08:58 IST
Fasal Bachane Ke Upay: भरतपुर जिले में किसान बिना बिजली और मशीनों के अपनी गेहूं की फसल को बेसहारा पशुओं से बचाने के लिए देसी जुगाड़ अपना रहे हैं. किसान खेतों में मिट्टी के मटके गाड़कर उनमें छोटे छेद बनाते हैं और रातभर जलने वाला दीपक रखते हैं. दीपक की मंद रोशनी से नीलगाय जैसे पशु मानव गतिविधि का आभास पाकर खेतों में प्रवेश नहीं करते. कम लागत और पर्यावरण अनुकूल यह तरीका किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है.
भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों किसान अपनी गेहूं की फसल को बेसहारा पशुओं से बचाने के लिए एक अनोखे और बेहद कारगर देसी उपाय का इस्तेमाल कर रहे हैं. भरतपुर में पशुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने की बढ़ती घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी, लेकिन स्थानीय किसानों ने अपनी पारंपरिक समझ और अनुभव से एक खास तरीका अपनाया है.

इस खास तरीके ने किसानों की समस्या को काफी हद तक कम कर दिया है. किसान अपने खेत के किनारों और बीच-बीच में मिट्टी के मटके गाड़कर उनमें छोटे-छोटे छेद करते हैं. इन छेदों के अंदर रातभर जलने वाला दीपक रखा जाता है. दीपक की हल्की स्थिर और लगातार रहने वाली रोशनी से नीलगाय जैसे बेसहारा पशु खेत में प्रवेश करने से घबरा जाते हैं.

पशु इस रोशनी को इंसानी गतिविधि समझकर खेतों के पास भी नहीं फटकते. किसानों के अनुसार यह तरीका बिना किसी बिजली मशीन या महंगे इंतज़ाम के आसानी से लागू किया जा सकता है. इसकी लागत भी बेहद कम आती है. स्थानीय किसान बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ने से खेतों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई थी.
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खासतौर पर रात के समय ये पशु खेतों में घुसकर खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा देते थे कई किसानों ने तारबंदी, रोशनी और निगरानी जैसे उपाय भी किए , लेकिन उनमें खर्च अधिक था और सफलता सीमित ऐसे में मिट्टी के मटके व दीपक वाला यह देसी जुगाड़ सबसे आसान और प्रभावी विकल्प साबित हुआ है.

किसानों का कहना है कि इस उपाय से न केवल रातभर खेतों में हल्की रोशनी बनी रहती है बल्कि इससे मानव उपस्थिति का आभास भी होता है. परिणामस्वरूप, गेहूं की फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है और उन्हें नुकसान का डर कम हो गया है. लोग अब किसानों की इस देसी सोच की सराहना कर रहे हैं.

आसान व्यवस्था और पर्यावरण के अनुकूल इस तरीके को अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ावा दिया जा सकता है. यह उदाहरण बताता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक समस्याओं के बीच संतुलन बनाकर किसान अपनी फसलों की रक्षा के लिए स्वयं समाधान खोज सकते हैं. भरतपुर के किसानों के इस जुगाड़ ने एक बार फिर साबित किया है कि समझदारी और नवाचार से बड़े से बड़ा संकट भी आसानी से टाला जा सकता है.
First Published :
December 12, 2025, 08:58 IST
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भरतपुर किसानों का देसी जुगाड़! आवारा पशुओं से ऐसे बचा रहे गेहूं की फसल



