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भरतपुर: 35 साल बाद घना में लौटी हरियाली, केवलादेव पार्क में मिलीं कई दुर्लभ वनस्पतियाँ

Last Updated:December 14, 2025, 09:26 IST

Keoladeo National Park: भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) में 35 साल बाद बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) ने व्यापक पारिस्थितिकी सर्वेक्षण किया है. सर्वे में 400 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं, जिनमें कई दुर्लभ वनस्पतियाँ भी शामिल हैं जिनकी वापसी संरक्षण प्रयासों के कारण हुई है. यह अध्ययन भविष्य में घना की संरक्षण रणनीतियों, पुनर्वनीकरण और जल प्रबंधन को दिशा देगा, जिसका सकारात्मक असर पर्यटन पर भी दिख रहा है.

भरतपुर. विश्वप्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जिसे आमतौर पर घना के नाम से जाना जाता है, इस पार्क में लगभग तीन दशक बाद वनस्पतियों का एक ऐतिहासिक और व्यापक सर्वेक्षण किया गया है. बॉटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) की विशेषज्ञ वैज्ञानिक टीम ने इस दौरान पार्क की हरियाली, जैव विविधता और पारिस्थितिक बदलावों का बारीकी से अध्ययन किया है. यह सर्वे घना की बदलती पारिस्थितिकी को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में अब तक 400 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं. इनमें कई ऐसी दुर्लभ वनस्पतियाँ भी शामिल हैं, जो बीते कई वर्षों से यहाँ दिखाई नहीं दे रही थीं. वैज्ञानिकों का मानना है कि जल प्रबंधन, मिट्टी की गुणवत्ता और संरक्षण प्रयासों के कारण कुछ प्रजातियों की दोबारा उपस्थिति संभव हो पाई है. यह सर्वे केवल पौधों की गिनती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र पारिस्थितिकी अध्ययन के रूप में अंजाम दिया गया है.

पक्षियों के जीवन चक्र पर प्रभाव का विश्लेषण

BSI की टीम ने वनस्पतियों के साथ-साथ मिट्टी की संरचना, जलस्तर में आए बदलाव और इन सबका पक्षियों के जीवन चक्र पर पड़ने वाले प्रभावों का भी गहन विश्लेषण किया है. घना पार्क पक्षियों के लिए विश्वस्तरीय पहचान रखता है और यहाँ की वनस्पतियाँ उनके भोजन, घोंसले और प्रजनन में अहम भूमिका निभाती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 30-35 वर्षों में घना की पारिस्थितिकी में कई प्राकृतिक और मानवीय बदलाव आए हैं. ऐसे में यह सर्वे भविष्य की संरक्षण रणनीतियों को तय करने में बेहद उपयोगी साबित होगा.

इसके आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि किन वनस्पतियों को संरक्षित करना है, किन क्षेत्रों में पुनर्वनीकरण की आवश्यकता है और जल प्रबंधन को किस तरह बेहतर बनाया जा सकेगा. सर्वे के सकारात्मक परिणामों का असर पर्यटन पर भी देखने को मिल रहा है. सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों की बढ़ती संख्या और हरियाली के चलते पार्क में पर्यटकों की आवाजाही में इज़ाफा हुआ है. प्रकृति प्रेमी और शोधकर्ता बड़ी संख्या में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की ओर आकर्षित हो रहे हैं. यह सर्वे घना की जैव विविधता को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित बनाए रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

December 14, 2025, 09:26 IST

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35 साल बाद घना में लौटी हरियाली, केवलादेव पार्क में मिलीं कई दुर्लभ वनस्पतियाँ

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