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भरतपुर के ‘अपना घर’ आश्रम ने दी सड़क पर असहाय पड़ी युवती को नई ज़िंदगी! पढ़िए रानू-हिना की पूरी कहानी

Last Updated:December 13, 2025, 08:31 IST

Bharatpur News: कोटा की सड़क पर असहाय, गर्भवती मिली रानू को भरतपुर के ‘अपना घर’ आश्रम ने न केवल नया जीवन दिया, बल्कि उसकी बेटी हिना की परवरिश भी की. 8 साल बाद, इलाज के बाद रानू को अपना घर (महाराजगंज, MP) याद आया. आश्रम की मदद से रानू और हिना का उनके भाई से भावुक मिलन हुआ, और माँ-बेटी परिवार के साथ घर लौट गईं.

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Bharatpur News: कोटा शहर के बीचों-बीच 31 अगस्त 2017 का वह दिन किसी के लिए सामान्य रहा होगा, लेकिन भरतपुर के अपना घर आश्रम की टीम के लिए इंसानियत की सबसे बड़ी पुकार रहा. सड़क किनारे पड़ी एक युवती दर्द से तड़प रही थी. फटे कपड़े, बदबू, सात माह का गर्भ और बेहोशी सी हालत. लोग उसके पास से ऐसे गुज़र रहे थे मानो कोई परेशानी हो, जिससे बचकर निकलना ही आसान हो. यहाँ तक कि एक ठेले वाले ने भी उसे हटाने को कहा. लेकिन स्थिति तब बदली, जब उसकी तस्वीर ‘अपना घर’ टीम तक पहुँची.

इंसानियत की पहल

टीम मौके पर पहुँची तो युवती की हालत देखकर पल भर को सबके दिल बैठ गए. वह सँभल भी नहीं पा रही थी और गंदगी में लथपथ थी. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने पहले साफ करने की बात कही. टीम ने वहीं अस्पताल में सम्मानपूर्वक उसका शरीर साफ कराया, कपड़े बदले और इलाज शुरू हुआ. कुछ दिनों में दर्द कम हुआ और उसकी साँसें स्थिर होने लगीं. इसके बाद उसे भरतपुर के अपना घर आश्रम लाया गया. अगले कुछ महीनों तक टीम ने उसकी एंटीनेटल केयर, जाँचें, सोनोग्राफी और पोषण का पूरा ध्यान रखा. मानसिक रूप से वह पूरी तरह टूटी हुई थी.

एक नया जीवन: हिना

लेकिन लगातार काउंसलिंग से वह धीरे-धीरे सँभलने लगी. 3 नवंबर 2017 को उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. बच्ची का नाम रखा गया हिना रानू, जिसका घर का नाम बिजली था. मानसिक स्थिति के कारण माँ रानू बेटी को संभाल नहीं पा रही थी. ऐसे में सेवा-साथी बहनों ने हिना की परवरिश की पूरी ज़िम्मेदारी उठाई. आश्रम में पली-बढ़ी हिना सभी की प्यारी बन गई.

यादों के दरवाज़े खुले, परिवार मिला

इलाज के लंबे दौर के बाद 28 अक्टूबर 2025 को रानू की यादों के दरवाज़े फिर खुलने लगे. उसे अपना घर महाराजगंज, मध्यप्रदेश याद आया. आश्रम की टीम ने तुरंत वहाँ के थाने और परिवार से संपर्क किया. पहले किसी को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन वीडियो कॉल पर रानू को देखकर उसका भाई बृजेश फूट-फूटकर रो पड़ा. परिवार को लगा था कि रानू अब इस दुनिया में नहीं रही.

जब भाई भरतपुर पहुँचा तो मिलन का वह पल सभी की आँखें नम कर गया. हिना ने पहली बार अपने मामा को देखा और माँ की खुशी देख खुद भी खिल उठी. आश्रम ने हिना की शिक्षा, संस्कार और नामकरण की भी जिम्मेदारी निभाई. आखिरकार माँ-बेटी अपने परिवार के साथ घर लौट गईं. पर सच्चाई यह भी है कि आज भी 800 से अधिक आश्रित ‘अपना घर’ आश्रम में हैं, जिन्हें उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

December 13, 2025, 08:31 IST

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