चुनाव से पहले बड़ा फैसला, राजस्थान में सरपंच से पार्षद तक खर्च सीमा दोगुनी, जानिए नई लिमिट

जयपुर. राजस्थान में आगामी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है, जिसका सीधा असर चुनावी राजनीति और उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ने वाला है. राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों की चुनावी खर्च सीमा को लगभग दोगुना करते हुए संशोधित सीमा को लेकर औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. आयोग का कहना है कि मौजूदा चुनावी परिस्थितियों, बढ़ती महंगाई और चुनाव प्रचार में लगातार बढ़ रहे खर्च को देखते हुए यह संशोधन जरूरी हो गया था. इस फैसले के बाद अब ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम तक चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी पहले की तुलना में ज्यादा खर्च कर सकेंगे.
यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब राज्य में शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं. राजनीतिक दल और संभावित उम्मीदवार पहले से ही जमीनी तैयारियों में जुटे हुए हैं. खर्च सीमा बढ़ने से जहां उम्मीदवारों को प्रचार में राहत मिलेगी, वहीं निर्वाचन आयोग के सामने खर्च की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौती भी बढ़ेगी. आयोग ने स्पष्ट किया है कि बढ़ी हुई सीमा आगामी सभी शहरी निकाय और पंचायत चुनावों में प्रभावी रहेगी.
सरपंच से जिला परिषद तक खर्च सीमा में बड़ा बदलावसंशोधित अधिसूचना के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की खर्च सीमा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है. सरपंच पद के लिए चुनाव खर्च की सीमा को पहले 50 हजार रुपये से बढ़ाकर अब 1 लाख रुपये कर दिया गया है. इसी तरह पंचायत समिति सदस्य के लिए खर्च सीमा 75 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये तय की गई है. जिला परिषद सदस्य, जो पहले अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक चुनाव खर्च कर सकते थे, अब वे 3 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे.
निर्वाचन आयोग का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी चुनाव प्रचार के साधन, यात्रा, सभाएं और डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ा है. ऐसे में पुरानी खर्च सीमा वास्तविक खर्च से मेल नहीं खा रही थी. संशोधित सीमा से उम्मीदवारों को वैध दायरे में रहते हुए प्रचार करने की सुविधा मिलेगी.
शहरी निकाय चुनावों में भी बढ़ी खर्च की सीमाशहरी निकाय चुनावों में भी उम्मीदवारों की खर्च सीमा को बढ़ाया गया है. नगर निगम पार्षद के लिए चुनाव खर्च की सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.50 लाख रुपये कर दिया गया है. नगर परिषद पार्षद अब पहले की 1.50 लाख रुपये की सीमा के बजाय 2 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. वहीं नगर पालिका पार्षदों के लिए खर्च सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये तय की गई है.
आयोग का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में प्रचार के तरीके तेजी से बदले हैं. सोशल मीडिया, डिजिटल प्रचार, बड़े स्तर पर जनसंपर्क और कार्यक्रमों की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में खर्च सीमा में वृद्धि समय की जरूरत बन चुकी थी.
आगामी चुनावों में लागू होगी नई व्यवस्थाराज्य निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि बढ़ी हुई खर्च सीमा आगामी शहरी निकाय और पंचायती राज चुनावों में ही लागू होगी. आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि खर्च की निगरानी के लिए पहले से तय सभी नियम और प्रक्रियाएं यथावत रहेंगी. उम्मीदवारों को अपने खर्च का पूरा ब्यौरा निर्धारित समय सीमा में देना होगा.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से चुनावी मुकाबले और अधिक सक्रिय और प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं. हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि खर्च सीमा बढ़ने के साथ-साथ पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना निर्वाचन आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. फिलहाल यह फैसला राज्य की चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.



