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बिहार चुनाव 2025 : क्या अशोक गहलोत दिखा पाएंगे राजनीति की ‘जादूगरी’, जानें आलाकमान क्यों करता है इतना भरोसा?

Last Updated:October 10, 2025, 23:27 IST

Bihar Chunav 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव में अब राजस्थान के पूर्व सीएम और ‘राजनीति के जादूगर’ अशोक गहलोत की एंट्री हो चुकी है. जबर्दस्त रणनीतिकार माने जाने वाले गहलोत क्या बिहार में अपनी राजनीतिक जादूगरी दिखा पाएंगे? जानें कांग्रेस आलाकमान उन पर इतना भरोसा क्यों करता है.

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बिहार चुनाव 2025 : क्या अशोक गहलोत दिखा पाएंगे अपनी राजनीति का 'जादू'पटना एयरपोर्ट पर अशोक गहलोत के स्वागत में उमड़ी महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़.

जयपुर. बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है. एनडीए को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने अपने ‘तुरुप के पत्ते’ और ‘राजनीति के जादूगर’ राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत को वहां उतार दिया है. कांग्रेस ने अपने सबसे सीनियर नेता और पार्टी के संकट मोचक गहलोत को बिहार विधानसभा चुनाव का सीनियर ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. उनके अलावा छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल और अधीर रंजन चौधरी को भी चुनाव पर्यवेक्षक बनाया गया है. अब देखना यह है कि देश में सियासत के सबसे बड़े मैदान बिहार में क्या गहलोत अपनी राजनीतिक जादूगरी दिखा पाएंगे या नहीं.

तीन बार राजस्थान की कमान संभाल चुके अशोक गहलोत को लंबा राजनीतिक अनुभव है. गहलोत सत्ता और संगठन दोनों के मंजे हुए खिलाड़ी हैं. उन्हें चुनावी रणनीति बनाने में माहिर माना जाता है. वे पार्टी में अपने विरोधियों और विपक्ष को उलझाकर रखने के माहिर खिलाड़ी हैं. अशोक गहलोत की इस टीम में कांग्रेस ने 41 जिला पर्यवेक्षकों को भी शामिल किया गया है. इसमें राजस्थान के भी कई बड़े नेतानों के नाम शुमार हैं. इस सूची में हरीश चौधरी, अशोक चांदना, रामलाल जाट, रफीक खान, अभिमन्यु पूनिया, करण सिंह उचियारड़ा और अनिल चौपड़ा को अहम जिम्मेदारी दी गई है.

गहलोत पूरी रणनीति बनाकर बिहार पहुंचे हैंइनमें से अधिकतर नेता गहलोत खेमे के ही हैं. इससे साफ है कि गहलोत पूरी रणनीति बनाकर बिहार पहुंचे हैं. अगले कुछ दिनों में इन पर्यवेक्षकों को बिहार में अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. यह पहली बार नहीं है जब गहलोत को किसी प्रदेश की चुनाव कमान सौंपी गई है. गहलोत राजस्थान के तीन बार सीएम रहने के अलावा राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) और केन्द्र में मंत्री रह चुके हैं. देशभर में कांग्रेस आलाकमान के सबसे भरोसेमंद और नजदीकी माने जाने वाले गहलोत को समय-समय पर बड़ी जिम्मेदारी मिलती रही है.

गुजरात में गहलोत की मौजूदगी के कारण बीजेपी को ज्यादा पसीना बहाना पड़ागहलोत सटीक रणनीति पर काम करते हैं. फिर चाहे चुनाव राजस्थान में हो या दूसरे राज्यों में. गहलोत को जहां कभी जिम्मेदारी दी जाती है वे वहां अपनी छाप छोड़कर आते हैं. गुजरात विधानसभा का पिछला चुनाव इसका बड़ा उदाहरण है. भले ही कांग्रेस वहां हार गई हो लेकिन गहलोत ने वहां बीजेपी की घेराबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. गुजरात में गहलोत की मौजूदगी को देखते हुए बीजेपी को वहां पहले के मुकाबले ज्यादा पसीना बहाना पड़ा.

पार्टी के संकटमोचक के रूप में उनका नाम सबसे पहले आता हैराजस्थान समेत अन्य राज्यों में होने वाली राजनीतिक उठपटक में पार्टी के संकटमोचक के रूप में उनका नाम सबसे पहले आता है. इससे पहले अशोक गहलोत को तीन राज्यों में ऑब्जर्वर का जिम्मा मिल चुका है. यह बात दीगर है कि इनमें तीन राज्यों के नतीजे कांग्रेस के खिलाफ रहे लेकिन उनकी रणनीति की चर्चा हमेशा होती रही है. गहलोत को बीते तीन वर्षों में पार्टी हाईकमान ने लगातार चार विधानसभा चुनावों में वरिष्ठ ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी है. इनमें गुजरात (2022), हरियाणा (2024), महाराष्ट्र (2024) और अब बिहार (2025) जैसा प्रमुख राज्य शामिल हैं.

Sandeep Rathore

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर…और पढ़ें

संदीप राठौड़ ने वर्ष 2000 में भास्कर सुमूह से पत्रकारिता की जयपुर से शुरुआत की. बाद में कोटा और भीलवाड़ा में राजस्थान पत्रिका के रेजीडेंट एडिटर की जिम्मेदारी निभाई. 2017 से के साथ नए सफर की शुरुआत की. वर… और पढ़ें

Location :

Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

October 10, 2025, 23:23 IST

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बिहार चुनाव 2025 : क्या अशोक गहलोत दिखा पाएंगे अपनी राजनीति का ‘जादू’

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