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बीकानेर ऊंट अनुसंधान केंद्र संग्रहालय

Last Updated:January 03, 2026, 12:33 IST

Bikaner News: बीकानेर के एनआरसीसी संग्रहालय में ऊंट की हड्डियों से बनी कंघियां, बटन और सजावटी सामान सुरक्षित रखे गए हैं. यह संग्रह रेगिस्तानी लोगों की आत्मनिर्भर जीवनशैली और संसाधनों के पारंपरिक उपयोग की अद्भुत कला को प्रदर्शित करता है.

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बीकानेर: राजस्थान के मरुस्थल में ऊंट को केवल ‘रेगिस्तान का जहाज’ ही नहीं माना जाता, बल्कि इसे जीवन का आधार स्तंभ कहा जाता है. ऊंट का महत्व केवल सवारी, परिवहन या दूध तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके शरीर का हर अंग किसी न किसी रूप में मानव सभ्यता के काम आता रहा है. इसका सबसे जीवंत और अनोखा उदाहरण बीकानेर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र (NRCC) के संग्रहालय में देखने को मिलता है. यहाँ ऊंट की हड्डियों से निर्मित कई दुर्लभ, उपयोगी और सजावटी सामान सुरक्षित रखे गए हैं, जो राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक शिल्पकला की एक अनूठी कहानी बयां करते हैं.

संग्रहालय के गलियारों में सजी ये वस्तुएं प्राचीन समय के विवेकपूर्ण प्रबंधन को दर्शाती हैं. यहाँ ऊंट की हड्डियों से बनी बारीक कंघियां, बटन, चाकू के हैंडल, सुंदर सजावटी वस्तुएं और पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली विशेष सामग्री प्रदर्शित की गई है. इनके अलावा घरेलू इस्तेमाल के कई उपकरण भी यहाँ मौजूद हैं. इन वस्तुओं को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुराने समय में लोग प्राकृतिक संसाधनों का कितनी समझदारी से उपयोग करते थे. विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंट की हड्डियां असाधारण रूप से मजबूत और टिकाऊ होती हैं, यही कारण है कि इनसे बने सामान दशकों तक खराब नहीं होते थे और इनका उपयोग लंबे समय तक किया जाता था.

आत्मनिर्भर जीवनशैली का प्रतीकबीते दौर में मरुस्थलीय क्षेत्रों में संसाधन अत्यंत सीमित होते थे, ऐसे में यहाँ के निवासियों ने ऊंट के हर हिस्से को उपयोगी बनाने का कौशल विकसित कर लिया था. ऊंट का दूध पोषण के लिए, ऊन वस्त्रों के लिए, चमड़ा जूतों और कुप्पियों के लिए और मृत्यु के उपरांत उसकी हड्डियां औजारों व कलाकृतियों के लिए उपयोग की जाती थीं. ऊंट की हड्डियों से बने ये सामान उस आत्मनिर्भर जीवनशैली का प्रतीक हैं, जिसमें जरूरत की अधिकांश वस्तुएं स्थानीय स्तर पर ही तैयार कर ली जाती थीं. यह शिल्पकला न केवल जरूरत को पूरा करती थी, बल्कि सौंदर्यबोध का भी परिचय देती थी.

पर्यटन और शोध का केंद्र बना संग्रहालय
राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र का यह संग्रहालय आज विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए ज्ञान का भंडार बन गया है. यहाँ ऊंट की विभिन्न नस्लों, उनके व्यवहार, खान-पान और उपयोगिता की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है. ऊंट की हड्डियों से बने सामान इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण हैं, जो विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देते हैं. वे इसे राजस्थान की पारंपरिक जीवनशैली और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का बेहतरीन उदाहरण मानते हैं. संग्रहालय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन वस्तुओं के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देना है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान के सहारे जीवन को सरल और टिकाऊ बनाया जा सकता है.About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Bikaner,Bikaner,Rajasthan

First Published :

January 03, 2026, 12:33 IST

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ऊंट की हड्डियां फेंकी नहीं जाती थीं, उनसे बनता था ये खास सामान! अनुसंधान…

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