पश्चिम बंगाल चुनाव: वंदेभारत स्लीपर ट्रेन से भाजपा की रणनीति

Last Updated:January 01, 2026, 14:53 IST
West Bengal Election: रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुवाहाटी-कोलकाता वंदेभारत स्लीपर ट्रेन का ऐलान किया है. इस साल मार्च-अप्रैल में असम और बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इसे एक अहम घोषणा मानी जा रही है. सवाल यह है कि क्या भाजपा इस वंदेभारत स्लीपर का चुनावी फायदा उठा पाएगी. अगर ऐसा होता है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए चुनावी फतह हासिल करना आसान हो जाएगा.
मोदी सरकार ने कोलकाता-गुवाहाटी के बीच वंदेभारत स्लीपर ट्रेन चलाने की घोषणा की है.
West Bengal Election: नए साल के पहले दिन मोदी सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया है. रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि जल्द ही गुवाहाटी से कोलकाता के बीच देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन चलाई जाएगी. यह ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाएगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों राज्यों में इसी साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसे मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. यह भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि राजनीतिक रूप से दोनों राज्य पार्टी के लिए बेहद अहम हैं. असम में लगातार 10 सालों से भाजपा की सरकार है. वहीं, पश्चिम बंगाल में वह बीते 10 सालों में शून्य से सत्ता के दावेदार तक पहुंच चुकी है. वंदे भारत स्पीलर की टॉप स्पीड 180 किमी है.
वंदेभारत स्लीपर ट्रेन का ऐलान पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी का वादा है. यह दोनों क्षेत्रों को आर्थिक और सामाजिक रूप से एकीकरण को बढ़ावा देगा. गुवाहाटी और कोलकाता पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के दो सबसे अहम शहर हैं. दोनों शहरों के बीच एक बड़ी आबादी नियमित रूप से ट्रेवल करती है. यह ट्रेन न केवल यात्रा समय को कम करेगी, बल्कि कंफर्ट और सेफ्टी के मामले में भी एक नया मानक स्थापित करेगी. हालांकि, इसको एक राजनीतिक कदम भी कहा जा रहा है. भाजपा इस कदम से दोनों राज्यों के अपने वोटरों को यह संदेश देना चाहती है कि उसके लिए पूर्वी भारत खासकर बंगाल और पूर्वोत्तर का विकास काफी मायने रखता है. मोदी सरकार इस ट्रेन को विकास के प्रतीक के रूप में पेश कर रही है. अगर पार्टी इस वंदेभारत स्पीलर का सियासी फायदा उठाने में कामयाब होती है तो उसे पश्चिम बंगाल में 180 तक सीटें मिल सकती है. राज्य में विधानसभा की 294 सीटें है. बीते 2021 के विधानसभा में उसके गठबंधन के 77 सीटें और 38 फीसदी वोट मिले थे. दूसरी ओर टीएमसी गठबंधन ने 48 फीसदी वोट शेयर के साथ 216 सीटों पर कब्जा जमाया था.
असम के लिए क्या है रणनीति?
असम में भाजपा 2021 में दोबारा सत्ता में लौटी थी. वहां भाजपा का मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से है. वहां लड़ाई कड़ी है. ऐसे में भाजपा को इस चुनाव में वोटरों के सामने कुछ नए पैकेज के साथ जाना होगा. क्योंकि बीते 10 साल से जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं वो अब उतने प्रभावी नहीं रहे. राज्य में एनआरसी, बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों को भाजपा लगातार उठाती रही है. ऐसे में तीसरी बार इन्हीं मुद्दों पर जनता के बीच जाना एक चुनौती है. ऐसे में नई ट्रेन के चलने से वोटरों के बीच विकास की भी चर्चा तेज होगी. इससे भाजपा को फायदा मिलेगा. वह यह संदेश देने में कामयाब हो सकती है कि केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर एक ही पार्टी की सरकार होने से विकास की रफ्तार बढ़ जाती है. वैसे भी केंद्र सरकार और पीएम मोदी ने पिछले दिनों कई परियोजनाओं को उद्घाटन या फिर शिलान्यास किया है. इस नई ट्रेन को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है.
बंगाल की चुनौती
दूसरी पश्चिम बंगाल में भाजपा का मुख्य मुकाबला टीएमसी है. बीते चार लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखें तो ऐसा लगता है कि भाजपा एक ऊंचाई को हासिल करने के बाद ठहरती दिख रही है. वह करीब 40 फीसदी वोट बैंक के साथ राज्य में दमदार तरीके से मौजूद है. लेकिन, आमने-सामने की लड़ाई के कारण ममता दीदी की पार्टी थोड़ी बीस पड़ती रही है. उसके पास करीब 45 फीसदी वोट बैंक हैं. ऐसे में पार्टी को नए वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए कुछ नया पैकेज देना होगा. इसी कड़ी में इस नई ट्रेन से भाजपा राज्य में विकास की चर्चा छेड़ सकती है. अगर राज्य में चुनावी चर्चा के केंद्र में विकास के मुद्दे आ जाएं तो इससे सीधे तौर पर भाजपा को फायदा होगा, क्योंकि बीते 15 सालों से ममता दीदी की सरकार है.
लोगों में एक तरह की एंटी इनकंबेसी पनप चुकी है. लेकिन, भाजपा का डर दिखाकर वह अपनी राजनीति करती हैं. वह अल्पसंख्यक समाज को भाजपा का डर दिखाती हैं. राज्य में करीब 30 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी है. ऐसे में वंदेभारत स्लीपर ट्रेन दोनों राज्यों में चुनावी नैरेटिव पर बड़ा असर डाल सकती है.
About the Authorसंतोष कुमार
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें
First Published :
January 01, 2026, 14:46 IST
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वंदेभारत स्लीपर का मिला सियासी फायदा तो बंगाल में BJP का 180 सीट पर बजेगा डंका


