सावधान! पाली में भेड़ों को निगल रहा ‘ब्लू टंग’ वायरस, बरतें यह सावधानी नहीं तो हो जाएगा गजब

पाली. आहोर और पाली में इन दिनों एक ऐसा वायरस फैला हुआ है जिसने पशुपालकों की नींद उड़ा दी है. पशुपालकों की भेड़ों की अचानक और रहस्यमयी तरीके से हो रही मौतों ने उन्हें बेहद परेशान कर दिया है. ब्लूटंग रोग नामक एक वायरस ने पाली जिले में अब तक 57 भेड़ों को अपना शिकार बना लिया है, जिसके चलते ये सभी भेड़ें मौत के मुंह में चली गई है. इस वायरस की गंभीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा भी पाली पहुंचे.
उन्होंने जिले भर का दौरा करने के साथ ही पशुपालकों से मुलाकात की और उन्हें हिदायत दी कि बीमार पशु को अन्य पशुओं से दूर रखें ताकि यह वायरस दूसरे पशुओं तक न फैले, क्योंकि यह एक वायरल रोग है जो अन्य पशुओं को भी संक्रमित कर सकता है.
पाली में 57 भेड़ों को निगल चुका यह वायरस
पाली और आहोर में इन दिनों भेड़ों में ब्लूटंग रोग फैल रहा है, जिससे कई पशुपालकों की भेड़ों की मौत हो रही है. पाली जिले में अब तक 57 भेड़ों की मौत इस रोग से हो चुकी है. पशुपालन विभाग के जर्जर भवन को लेकर डॉ. सेजरा ने कहा कि इसके लिए बजट जारी कर दिया गया है और जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा. इस दौरान पशुपालन विभाग पाली के संयुक्त निदेशक डॉ. मनोज पंवार सहित कई पशुपालकों ने उनका माला और साफा पहनाकर स्वागत व सम्मान किया.
जोधपुर, बीकानेर और जयपुर से आई टीम
इस बीमारी को लेकर पाली में जोधपुर, बीकानेर और जयपुर से विशेषज्ञ टीमें जांच के लिए पहुंच चुकी हैं. पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. आनंद सेजरा ने जिले भर का दौरा किया, पशुपालकों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की, उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि वे बीमार पशु को अन्य पशुओं से दूर रखें, क्योंकि यह एक वायरल रोग है जो एक पशु से दूसरे पशु में फैल सकता है. ब्लूटंग रोग एक वायरल बीमारी है जो जुगाली करने वाले पशुओं, खासकर भेड़ों को प्रभावित करती है.
यह रोग ब्लूटंग वायरस के कारण होता है और काटने वाले मच्छरों — क्यूलिकोइड्स प्रजाति द्वारा फैलता है. इस बीमारी में जानवर की जीभ सूज जाती है और उसका रंग नीला हो सकता है, यह रोग मनुष्यों को प्रभावित नहीं करता. यह एक वायरल रोग है जो ब्लूटंग वायरस के कारण होता है. यह रोग काटने वाले मच्छरों, विशेषकर क्यूलिकोइड्स प्रजाति के माध्यम से फैलता है, जो इसे एक जानवर से दूसरे जानवर में पहुंचाते हैं. यह मुख्य रूप से भेड़ों, मवेशियों और अन्य जुगाली करने वाले पशुओं, जैसे हिरण और बकरियों को प्रभावित करता है.
इसके लक्षण और उपाय जीभ में सूजन और नीलापन,मुंह और जीभ में घाव,लार बहना और निगलने में कठिनाई,पैरों में घाव जिससे लंगड़ापन होता है,गर्भावस्था में गर्भपात या विकृत भ्रूण,गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है. इससे बचाव के लिए टीकाकरण और मच्छरों के नियंत्रण जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं, कुछ देशों में इसके टीके उपलब्ध हैं.



