राजस्थान में ‘ब्लूटंग’ का कहर! भेड़ों में वायरल संक्रमण से हाहाकार, मच्छरों ने मचाई तबाही

Last Updated:November 13, 2025, 12:51 IST
Nagaur News Hindi : नागौर और आसपास के जिलों में भेड़ों पर कहर बनकर टूटा ब्लूटंग वायरस. पिछले दो महीनों में सैकड़ों भेड़ों की मौत से पशुपालक बेहाल हैं. मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी न केवल भेड़ों की जान ले रही है बल्कि दूध उत्पादन और आमदनी पर भी करारा प्रहार कर रही है.
नागौर और आसपास के जिलों में पिछले दो महीनों से भेड़ों में ब्लूटंग नामक वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इस बीमारी से अब तक कई भेड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे भेड़पालकों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि ब्लूटंग का असर केवल पशुओं की सेहत पर नहीं, बल्कि उनके दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर भी गहरा पड़ता है. संक्रमित भेड़ों में दूध कम हो जाता है और मेमनों की वृद्धि रुक जाती है, जिससे पशुपालकों की आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है.

उन्होंने बताया कि ब्लूटंग रोग का संक्रमण मुख्य रूप से क्यूलिकोइड्स प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है. जब यह मच्छर संक्रमित पशु का रक्त चूसते हैं और फिर स्वस्थ पशु को काटते हैं, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है. इसके अलावा बाहरी परजीवी जैसे शीप केड और मेलोफैगस ओविनस भी इस वायरस को फैलाने में भूमिका निभाते हैं. इस बीमारी का खतरा उन इलाकों में अधिक होता है जहां नमी और गंदगी ज्यादा रहती है, क्योंकि वहां मच्छरों का प्रजनन तेज़ी से होता है.

यह बीमारी केवल मच्छरों के जरिए ही नहीं, बल्कि संक्रमित पशुओं के सीमन और प्लेसेंटा के माध्यम से भी फैल सकती है. जब संक्रमित पशु का संपर्क किसी स्वस्थ पशु से होता है, तो संक्रमण तेजी से फैलता है. इसलिए संक्रमित भेड़ों को स्वस्थ झुंड से तुरंत अलग करना आवश्यक है. यदि समय पर इसका ध्यान नहीं दिया गया, तो एक पूरा झुंड इस वायरस की चपेट में आ सकता है, जिससे भारी नुकसान की संभावना रहती है.

पशु चिकित्सक रामनिवास चौधरी ने बताया कि इस ब्लूटंग से प्रभावित पशुओं में कई गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं. मुंह से लगातार लार बहना, होठों, मसूड़ों और जीभ पर सूजन आना, नाक से स्राव होना, आंखों से पानी गिरना और शरीर का धनुषाकार बन जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं. इसके अलावा पशुओं की उत्पादन क्षमता घट जाती है और वे अत्यधिक थकान महसूस करते हैं. कई बार उन्हें चक्कर, अपच, उलझन, लकवा और पैरों में घाव की समस्याएं भी हो जाती हैं, जिससे उनकी मौत तक हो सकती है.

ब्लूटंग से बचाव के लिए पशुपालकों को साफ-सफाई और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए. बीमार भेड़ों को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और चराने के लिए बाहर न ले जाएं. पशु आवास में मच्छरों से बचाव के लिए जालीदार खिड़कियां लगाएं और नमी न बनने दें. बीमार पशु को धूप से बचाएं, उन्हें आराम दें और पोषक आहार खिलाएं. चावल या रागी से बना दलिया ऐसे समय में काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह पचने में हल्का और ऊर्जा देने वाला होता है.

पशु चिकित्सकों के अनुसार ब्लूटंग वायरस का सबसे प्रभावी इलाज टीकाकरण है. यह वायरस क्यूलिकोइड्स मच्छरों से फैलता है और इसका टीका लगवाना ही सबसे बेहतर सुरक्षा उपाय है. इसके अलावा यह वायरस 35 से 60 दिनों तक संक्रमित पशु के खून में सक्रिय रहता है, इसलिए समय पर सतर्कता और सावधानी बरतना बहुत जरूरी है.
First Published :
November 13, 2025, 12:51 IST
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राजस्थान में भेड़ों में वायरल संक्रमण, मच्छरों ने मचाई तबाही



