जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज में देहदानः महिला ने किया नेत्रदान भी, परिवार बोला- दान से मिलता है दोहरा मोक्ष

Last Updated:January 11, 2026, 13:39 IST
पाली निवासी 40 वर्षीय नीता कोका के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान और देहदान कर मानवता की मिसाल पेश की. जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष के पहले देहदान के रूप में दर्ज यह निर्णय न केवल जरूरतमंदों को रोशनी देगा, बल्कि आने वाले वर्षों तक हजारों मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए ज्ञान का स्रोत बनेगा.
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जोधपुर. शहर के एसएन मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष का पहला देहदान मानवता, सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल बनकर सामने आया है. पाली निवासी 40 वर्षीय नीता कोका के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने नेत्रदान के साथ-साथ देहदान कर समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दिया है. जानकारी के अनुसार, नीता कोका पिछले करीब 40 दिनों से जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती थी. 8 जनवरी को उनका निधन हो गया, इसके बाद परिजनों ने पहले नेत्रदान कराया, जिससे दृष्टिहीन लोगों को नई रोशनी मिलने की संभावना बनी.
इसके पश्चात 9 जनवरी को पिता सज्जनराज कोका, माता निर्मला कोका, बहनों जयश्री, अनीता, सुनीता तथा भाई संदीप की सहमति से देहदान की प्रक्रिया पूरी की गई. इस अवसर पर समाजसेवी महेंद्र भंडारी एवं रमेश कुमार भंसाली ने परिजनों को नेत्रदान एवं देहदान के महत्व की जानकारी दी. परिजनों ने कहा कि हिंदू धर्म में दाह-संस्कार को मोक्ष का मार्ग माना गया है, वहीं देहदान से ‘दोहरा मोक्ष’ प्राप्त होता है. इस पुनीत कार्य से भविष्य में हजारों मेडिकल छात्र एवं शोधार्थी डॉक्टर लाभान्वित होंगे.
यह इस वर्ष का पहला देहदान
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस जोधा ने बताया कि यह इस वर्ष का पहला देहदान है, जो चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि देहदान के माध्यम से मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की वास्तविक संरचना को नजदीक से समझने का अवसर मिलता है, जिससे बेहतर और संवेदनशील चिकित्सक तैयार होते हैं.
उन्होंने नीता कोका के परिजनों के निर्णय की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया, गौरतलब है कि जोधपुर में पूर्व वर्षों में भी कई परिवारों ने अंगदान एवं देहदान कर मानवता की मिसाल पेश की है. ऐसे कार्यों से न केवल जरूरतमंद मरीजों को जीवनदान मिलता है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और शोध को भी मजबूती मिलती है. नीता कोका का यह देहदान आने वाले वर्षों तक चिकित्सा जगत में ज्ञानवर्धन का माध्यम बनेगा और समाज में सेवा, त्याग एवं संवेदनशीलता की भावना को और अधिक सशक्त करेगा.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
January 11, 2026, 13:39 IST
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जोधपुर में नीता कोका का देहदान बना मानवता की मिसाल



