Rajasthan
फोड़ा-फुंसी गायब, सूजन छूमंतर! इस पेड़ की छाल से हो जाता है इलाज

राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग आधुनिक दवाइयों और अस्पतालों की पहुँच बढ़ने के बावजूद, अपने पूर्वजों से चली आ रही पारंपरिक देसी चिकित्सा पद्धति पर भरोसा बनाए हुए हैं. ये नुस्खे न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि इनके साइड इफेक्ट्स भी न के बराबर होते हैं. भरतपुर जिले के गांवों में विशेष रूप से फोड़ा-फुंसी, घाव या सामान्य त्वचा संक्रमण जैसी आम तकलीफों के लिए सदियों से नीम के पेड़ की छाल का प्रयोग किया जाता रहा है. यह प्राकृतिक उपचार ग्रामीणों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है.



