भाई ने बहन के भात में बैलगाड़ी से पहुंचकर रचा मिसाल

Last Updated:December 04, 2025, 20:49 IST
भीलवाड़ा में शादी के सीजन के बीच एक अद्भुत और पारंपरिक दृश्य देखने को मिला, जब आरजिया गांव से भगवान सिंह अपनी बहन का भात भरने के लिए एक दर्जन से अधिक सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ माधव नगर पहुंचे. आधुनिक दौर में बैलगाड़ियों का ऐसा पारंपरिक काफिला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया. बैलों का विशेष श्रृंगार और ढाई किलोमीटर लंबी यह यात्रा भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत मिसाल बनी.
भीलवाड़ा. आधुनिक दौर की तेज रफ्तार जिंदगी और नई परंपराओं के बीच भी आज भीलवाड़ा में शादियों के सीजन में पौराणिक परंपराओं की सुंदर मिसाल देखने को मिली. भीलवाड़ा शहर के निकटवर्ती आरजिया गांव से एक भाई अपनी बहन का भात भरने के लिए एक-दो नहीं बल्कि एक दर्जन से अधिक सजी-धजी बैलगाड़ियों में सवार होकर अजमेर रोड स्थित माधव नगर पहुंचा. यह नजारा देखते ही देखते लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया और रास्ते भर इसे देखने वालों की भीड़ लगती रही. यह नजारा न केवल एक पारिवारिक परंपरा का प्रतीक बना, बल्कि भीलवाड़ा में आज भी जीवित भारतीय संस्कृति और विरासत की एक सुंदर झलक भी लोगों को दिखा गया.
माधव नगर निवासी और भीलवाड़ा पुलिस में कार्यरत दिलजीत सिंह एवं यशोदा कंवर की पुत्री का विवाह समारोह होने जा रहा है. इसी विवाह आयोजन के तहत आज भाई भगवान सिंह अपनी बहन के भात भरने की रस्म निभाने परिवार और रिश्तेदारों के साथ पहुंचे. आरजिया गांव से चली इस अनोखी यात्रा में लगभग एक दर्जन से अधिक बैलगाड़ियां थी, जिनमें बैलों का विशेष पारंपरिक श्रृंगार किया गया था. बैलों के गले में सुंदर मालाएं, टोकरियां और रंग-बिरंगे साज-सामान सजाए गए थे, जिससे पूरा काफिला किसी त्योहार जैसा नजर आ रहा था.
भारतीय संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचानयह पारंपरिक यात्रा लगभग ढाई किलोमीटर का सफर तय कर माधव नगर स्थित बहन के ससुराल तक पहुंची. रास्ते भर लोग इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए रुकते रहे, मोबाइल से वीडियो बनाते रहे और इस दृश्य की खूब चर्चा होती रही. आधुनिक वाहनों के जमाने में जब बैलगाड़ियां सड़कों पर कम ही दिखाई देती हैं, ऐसे में यह दृश्य लोगों के लिए खास बन गया. भात भरने पहुंचे भगवान सिंह ने बताया कि पौराणिक काल में नानी बाई का मायरा भरने भगवान कृष्ण और नरसी मेहता भी बैलगाड़ी में सवार होकर गए थे.
उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं, जिन्हें हमें भूलना नहीं चाहिए. इसी उद्देश्य से उन्होंने आज आधुनिक साधनों को छोड़कर पारंपरिक तरीके से बैलगाड़ियों में सवार होकर बहन के घर पहुंचने का निर्णय लिया. उन्होंने यह भी कहा कि आज की नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन परंपराओं का महत्व समझ सकें. भांजी दीक्षा कंवर के विवाह से एक दिन पहले मामा भगवान सिंह का इस तरह पारंपरिक अंदाज में पहुंचना पूरे समारोह को और भी खास और यादगार बना गया.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 20:49 IST
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भीलवाड़ा में भाई ने बहन के भात में बैलगाड़ी से पहुंचकर पेश की अनोखी मिसाल



