करियर डूबा, 55 मुकदमे, कर्ज का पहाड़- बिग बी को पिता की दो सीख ने कैसे फिर से खड़ा किया, पढ़िए प्रेरक कहानी

Last Updated:November 23, 2025, 20:54 IST
अमिताभ बच्चन आज बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार हैं, लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब सब कुछ बिखर गया. उनके पास न फिल्में थीं, न काम, उल्टा 90 करोड़ का कर्ज और 55 कानूनी केस सिर पर थे. लेकिन इसी मुश्किल में पिता हरिवंश राय बच्चन की दो सीख ने उन्हें टूटने नहीं दिया और उनकी दूसरी पारी की नींव रखी.
90 करोड़ का कर्ज, 55 केस, करियर खत्म- अमिताभ बच्चन को अंधेरे दौर से निकालने वाली पिता की दो सीख जानिए.(Image:Reuters)
नई दिल्ली. बॉलीवुड के चमकते सितारे बिग बी यानी अमिताभ बच्चन की जिंदगी में एक सबसे अंधेरा दौर भी आया था. जब उनके पास कोई काम नहीं था और बड़ा कर्जा उन पर चढ़ गया था और कई केस उनके खिलाफ चल रहे थे. 90 के दशक के अंत में अमिताभ बच्चन का जीवन पूरी तरह बदल गया था. उनकी कंपनी बुरी तरह डूब गई थी और लगभग 90 करोड़ रुपये का कर्ज उन पर आ गया था. हालात इतने खराब थे कि घर और निजी संपत्तियों पर भी जोखिम मंडरा रहा था. बच्चन बताते हैं कि रोजाना लेनदार उनके दरवाजे पर पैसे मांगने आते थे. यह उनके अनुसार सबसे अपमानजनक और दर्दनाक दौर था. इन सबके बीच उन्होंने यह भी महसूस किया कि कैसे वही लोग, जो पहले उनके साथ जुड़ने के लिए लाइन में खड़े रहते थे, मुसीबत के समय दूर हट गए और कुछ तो उनके खिलाफ ही हो गए.
55 कानूनी केस और गलत सलाह का बोझस्थिति तब और मुश्किल हुई जब करीब 55 मुकदमे उनके खिलाफ दायर किए गए. बाद में उन्होंने माना कि वे कई दस्तावेजों पर बिना समझे हस्ताक्षर कर लेते थे और गलत सलाह पर भरोसा करते हुए मान लेते थे कि सब ठीक रहेगा. लेकिन जब चीजें बिगड़ीं तो उन्हें अकेले ही उसका सामना करना पड़ा. हालांकि मोहब्बतें ने उनके करियर को नई दिशा दी और इसी फिल्म से उनकी दूसरी पारी की शुरुआत हुई. लेकिन मानसिक और भावनात्मक रूप से उन्हें संभालने का काम किसी फिल्म ने नहीं, बल्कि पिता की सीख ने किया.
पिता हरिवंश राय बच्चन की दो सीख बनीं संबलअमिताभ बच्चन अक्सर कहते हैं कि पिता की सीख ने उन्हें मुश्किलों में संभाला. पहली सीख थी कि अगर जिंदगी आपकी इच्छा के मुताबिक चलती है, तो अच्छा है; लेकिन अगर नहीं चलती, तो उससे भी बेहतर है, क्योंकि कोई बड़ी शक्ति आपके लिए कुछ और सोच रही है. यह बात उन्होंने शुरुआत में समझी नहीं, लेकिन संकट के समय यही सीख उनका संबल बनी. दूसरी सीख संघर्ष पर आधारित थी. एक बार जब उन्होंने पिता से कहा कि जिंदगी लड़ाई जैसी लगती है, तो हरिवंश राय बच्चन ने शांति से कहा कि ‘जब तक जीवन है, संघर्ष रहेगा.’ इस सोच ने उन्हें निराश होने से बचाया और हर दिन नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की ताकत दी.
आज भी सक्रिय, मजबूत और प्रेरणा का स्रोतआज 82 साल की उम्र में भी अमिताभ बच्चन लगातार काम कर रहे हैं. उनकी व्यस्तता साबित करती है कि कोई भी असफलता अंतिम नहीं होती. बिग बी की कहानी बताती है कि चाहे कर्ज हो, केस हों या करियर का संकट- सही सोच और परिवार की सीख इंसान को हर मुश्किल से निकाल सकती है. उनकी जीवन यात्रा आज युवाओं के लिए प्रेरणा है कि गिरावट अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत हो सकती है.
Rakesh Singh
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
November 23, 2025, 20:54 IST
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करियर डूबा, 55 मुकदमे, कर्ज का पहाड़- बिग बी को पिता की सीख ने कैसे खड़ा किया



