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Carrot Farming Tips | Best Carrot Variety | Easy Carrot Growing Method | Home Garden Carrot Tips

Last Updated:November 29, 2025, 11:32 IST

Gajar Ki Kheti: गाजर की खेती घर के छोटे कोने, गमलों या खेत के बाड़े में भी आसानी से की जा सकती है. हल्की, भुरभुरी और जैविक खाद युक्त मिट्टी इसका सबसे अच्छा माध्यम है. कुछ विशेष किस्में कम मेहनत में अधिक उत्पादन देती हैं. सही सिंचाई, सूर्यप्रकाश और समय पर देखभाल से किसान और गृहस्थ दोनों को अच्छा लाभ मिल सकता है.bhilwara

भीलवाड़ा: सर्दी का मौसम शुरू हो गया है और सर्दी के मौसम में सबसे ज्यादा गाजर दिखाई देती है अगर आप भी अपने घर पर या फिर खेत के किसी कोने पर गाजर उगाने की सोच रहे हैं. तो यह कुछ किस्म है जो आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है. जो स्वाद के साथ व्यापार के लिए भी फायदेमंद है. गाजर के रंग और आकार पर तापक्रम का बड़ा असर पड़ता है. अच्छे रंग और आकार के लिए 18 से 24 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त माना जाता है. गाजर की अच्छी पैदावार के लिए गहरी, भुरभुरी, हल्की दोमट भूमि उपयुक्त रहती है. भूमि में पानी का निकास अच्छा होना आवश्यक है. इसकी पूसा केसर, नेन्टिस, पूसा मंदाकिनी, सलेक्शन-5, पूसा नयनज्योति उन्नत किस्में हैं.

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गाजर में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है. आंखों की रोशनी के लिए गाजर फायदेमंद है. इसमें शर्करा, खनिज लवण, थायमिन एवं राइबोफ्लेविन विटामिन भी होते हैं. गाजर का अधिकांश उपयोग कच्ची खाने व सलाद के रूप में होता है. इससे सब्जी, अचार, मुरब्बा, हलवा, मिठाइयां आदि व्यंजन भी बनाए जाते हैं.

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कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेमी रखें. गाजर का 5-6 किलो बीज प्रति हैक्टेयर पर्याप्त रहता है. बीज की बुवाई मेड़ों पर भूमि पर की जाती है. गोबर की खाद 250 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की दर से पहली जुताई के समय मिट्टी में मिला दें. इसके अलावा 60 किलो नत्रजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 120 किलो पोटाश प्रति हैक्टेयर दें. इनमें से नत्रजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत में अंतिम जुताई के समय डालें. शेष बची हुई नत्रजन की मात्रा बुवाई के 45 दिन बाद खड़ी फसल में दें. पहली सिंचाई बोने के तुरंत बाद करें, बीज उगने तक भूमि में नमी बराबर बनाए रखें. शुरू में निराई-गुड़ाई करें वरना पौधों को खरपतवार पनपने नहीं देगी.

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गाजर की फसल में कभी-कभी कट वर्म का प्रकोप होता है. पत्ती धब्बा- गाजर की पत्तियों पर गोलाकार धब्बे पड़ जाते हैं व बाद में इनका रंग भूरा पड़ जाता है. इसकी वजह से पत्तियां झुलस जाती हैं. नियंत्रण हेतु मेंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से आवश्यकता के अनुसार छिड़कें. छाछ्या रोग- सफेद चूर्ण जैसे छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देते हैं. नियंत्रण हेतु डाइनोकेप एल सी एक मिली. प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़कनी चाहिए.

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गाजर की खुदाई करने से पहले हल्की सिंचाई कर दें. जिससे खुदाई करने में आसानी रहती है. गाजर की जड़ें 60 से 85 दिन मे खुदाई योग्य हो जाती है. खुदाई में देरी करने से गाजर और खाने योग्य नहीं रहती है. गाजर की पैदावार 250 से 300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है.

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सर्दी का मौसम शुरू हो गया है और सर्दी के इस मौसम में गाजर सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यही वह समय है जो आगे की खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. सर्दी के इस मौसम में गाजर हर चीज में काम आती है. चाहे अचार बनाना हो या फिर सब्जी बनानी हो या फिर गाजर का मीठा हलवा बनाना हो गाजर एक अहम भूमिका सर्दी के मौसम में निभाता है.

First Published :

November 29, 2025, 11:32 IST

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जेबें रहेंगी भरी! छोटे स्पेस में करें गाजर की खेती, यह किस्म देगी अच्छा मुनाफा

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