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CBI ने आपत्ति जताई, पीड़िता ने बताया जान को खतरा, फिर भी कुलदीप सेंगर को 4 बार मिली अंतरिम जमानत

Unnav Rape Case Victim: साल 2017 का उन्नाव (उत्तर प्रदेश) रेप कांड फिर से चर्चा में. क्योंकि रेप आरोपी कुलदीप सेंगर की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने सस्पेंड कर दिया है. कुलदीप को 2019 में तीस हजारी कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाया था. हालांकि, उनकी बीते तीन साल की सजा की बात करें तो सेंगर 4 बार जेल से बाहर आए हैं. वे अपनी बेटी की शादी, अपने मोतियाबिंद के ऑपरेशन और चिंता एवं मधुमेह के इलाज के लिए जमानत पर बाहर आए. सेंगर ने इसी आधार पर दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह पीड़ित परिवार के लिए कोई खतरा नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने जमानत पर रहते हुए कभी भी अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया था.

सीएनएन-न्यूज़18 ने उन चारों मामलों के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया और पाया कि बलात्कार पीड़िता के साथ-साथ सीबीआई की कड़ी आपत्तियों के बावजूद सेंगर को अंतरिम जमानत मिल गई थी. सेंगर को इससे पहले चार मौकों पर कुल 23 दिनों के लिए सजा के निलंबन का लाभ मिला था. इससे पहले 27 जनवरी 2023 से 1 फरवरी 2023 तक; 6 फरवरी 2023 से 10 फरवरी 2023 तक; 11 दिसंबर 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक; और 23 दिसंबर 2024 से 24 दिसंबर 2024 तक जेल से बाहर रहे.

सजा हुई निलंबित

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की सजा को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया. कोर्ट ने यह कहते हुए कि पुलिस या अर्धसैनिक बलों द्वारा बलात्कार पीड़िता की उचित सुरक्षा न करने की आशंकाओं के आधार पर उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता को खतरे की आशंका के आधार पर सेंगर को हिरासत में रखना एक मान्य तर्क नहीं है. खतरे की आशंका से संबंधित तर्क के जवाब में सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अपनी दलीलों के दौरान इस तथ्य पर जोर दिया कि उन्हें पहले चार मौकों पर सजा निलंबित करने की अनुमति दी गई थी.

पहले क्या हुआ था

सेंगर को पहली बार हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत 27 जनवरी 2023 को उनकी बेटी की शादी के लिए मिली थी. उन्हें 15 दिनों के लिए यानी 10 फरवरी 2023 तक अंतरिम जमानत दी गई थी. सेंगर ने अदालत को बताया कि शादी की रस्में गोरखपुर और लखनऊ में होंगी और परिवार में एकमात्र पुरुष सदस्य होने के नाते उन्हें कई व्यवस्थाएं करनी होंगी.

CBI ने भी किया कड़ा विरोध

पीड़िता और सीबीआई ने कड़ा विरोध जताया था. पीड़िता ने कहा कि सेंगर के बाहर रहने के दौरान उसकी हत्या हो सकती है. इसके चलते हाईकोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन किया और सेंगर को 1 फरवरी को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, क्योंकि तिलक समारोह 30 जनवरी को था. सेंगर को 6 फरवरी को फिर से जेल से रिहा कर दिया गया और उन्होंने 10 फरवरी को आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद शादी 8 फरवरी को हुई.

दोबारा भी मांग ली जमानत

पहली बार जमानत मिलने के बाद सेंगर की उम्मीदें बढ़ गईं. एक साल बाद, उन्होंने कई स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए पांच महीने की लंबी अवधि के लिए सजा के अंतरिम निलंबन की मांग करते हुए फिर से हाईकोर्ट का रुख किया. सेंगर ने एक मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ब्रोंकियल अस्थमा, उम्र से संबंधित रीढ़ की हड्डी का अपक्षयी रोग, मोतियाबिंद से संबंधित आंखों की समस्याएं, आंतरिक बवासीर, द्विपक्षीय हाइड्रोसील और चिंता सहित आठ बीमारियों का उल्लेख था.

5 महीने की जमानत नहीं मिली

अदालत ने सेंगर की पांच महीने की जमानत की मांग को ज्यादा पाया. उन्हें 11 दिसंबर 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक अंतरिम जमानत मिल गई. उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया, जहां विभिन्न विभागों के ग्यारह डॉक्टरों के एक चिकित्सा बोर्ड ने उनकी जांच और उपचार किया. बोर्ड ने पाया कि उनकी मधुमेह और उच्च रक्तचाप मौखिक दवा से नियंत्रित थे, अस्थमा इनहेलर से नियंत्रित था, और रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं के लिए केवल व्यायाम, फिजियोथेरेपी और दवा की आवश्यकता थी. हाईकोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, 13 दिसंबर 2024 को उनकी आंखों से संबंधित समस्याओं के लिए लेजर उपचार और 16 दिसंबर 2024 को बवासीर के लिए बैंडिंग प्रक्रिया की गई.

एम्स ने सेंगर पर क्या कहा?

उनकी स्थिति की समीक्षा करने के बाद, चिकित्सा बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि सेंगर की हालत स्थिर है. उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एम्स में सभी आवश्यक उपचार किए जा चुके हैं. अब उनकी स्थिति का प्रबंधन स्थानीय चिकित्सा केंद्र में बाह्य रोगी के आधार पर किया जा सकता है. एम्स ने कहा कि सेंगर के मामले में लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है.

सेंगर के विजिटर्स से परेशान एम्स

हालांकि, एम्स में उनके रहने के दौरान अस्पताल ने गंभीर चिंताएं जताईं. 13 दिसंबर 2024 को एक लिखित पत्र में, चिकित्सा बोर्ड के सदस्य सचिव ने सेंगर के भर्ती होने के दौरान उनसे मिलने आने वाले लोगों की असामान्य रूप से अधिक संख्या पर चिंता व्यक्त की. एम्स ने कहा कि इतनी अधिक संख्या में आने वाले लोगों के कारण चिकित्सा देखभाल प्रभावित हो रही थी. अस्पताल के नियमित कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था. यह पत्र सीबीआई निदेशक को भेजा गया था, जिसमें उचित सुरक्षा व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया था. सेंगर को दिल्ली के एम्स में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने के लिए 23-24 दिसंबर 2024 को दो दिनों के लिए एक और अंतरिम जमानत मिली.

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