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Chana Crop Tips | Chickpea Disease Control | Agriculture Tips for Farmers | Chana Production Increase | Gram Crop Care | Chana Ke Rog | Chana Me Deemak Ka Ilaj

Last Updated:December 07, 2025, 21:37 IST

Agriculture Tips: चने की फसल में लगने वाले रोग और दीमक उत्पादन को 40–50% तक प्रभावित कर देते हैं. समय पर पहचान और सही उपचार फसल को सुरक्षित रखता है. बीज उपचार, जैविक फफूंदनाशकों का उपयोग, खेत में उचित नमी, और दीमक नियंत्रण के लिए क्लोरोपाइरीफॉस या नीम आधारित उपाय बेहद कारगर माने जाते हैं.चने का पौधा

सीकर. चने की फसल में अधिक उत्पादन के लिए बुवाई के लगभग एक महीने बाद निराई-गुड़ाई करना बहुत जरूरी है. इस समय खेत में उग आए खरपतवार पौधों से पोषक तत्व, नमी और जगह छीन लेते हैं, जिससे फसल कमजोर हो जाती है. निराई-गुड़ाई करने से खेत साफ रहता है और चने के पौधों की जड़ें अच्छे से फैलती हैं.

चने का पौधा

यदि खेत में खरपतवार का प्रकोप अधिक हो या पहली निराई-गुड़ाई के बाद भी घास-फूस दोबारा उग आए, तो आवश्यकता अनुसार दूसरी निराई-गुड़ाई भी करनी चाहिए.इससे मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और पौधों को पर्याप्त वायु संचार मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि में तेजी आती है.

चने का पौधा

चने की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 40-45 दिन बाद करना उपयुक्त माना जाता है.इस समय पौधे फूल आने की अवस्था की ओर बढ़ते हैं, इसलिए नमी की आवश्यकता होती है.सही समय पर सिंचाई करने से फूल झड़ने की समस्या कम होती है और दाने भरने की प्रक्रिया मजबूत होती है.

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चने का पौधा

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि चने की फसल में दीमक का प्रकोप उपज को काफी नुकसान पहुंचा सकता है. दीमक की रोकथाम के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी की 3 लीटर मात्रा प्रति हैक्टेयर सिंचाई के पानी के साथ दें.इससे मिट्टी में मौजूद दीमक का प्रभाव कम होता है और फसल सुरक्षित रहती है.

चने का पौधा

इसके अलावा चने की बुवाई के 21-25 दिन बाद की अवस्था को क्राउन रूट स्टेज कहा जाता है, जो फसल के लिए अत्यंत जरूरी होती है. इस अवस्था में पहली सिंचाई समय पर करना जरूरी होता है, क्योंकि इसी समय पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं. जिन खेतों में दीमक की समस्या हो, वहां क्लोरपायरीफॉस 10 ईसी की 2 लीटर मात्रा को 20 किलो मिट्टी में मिलाकर खेत में डालें और तुरंत बाद सिंचाई करें.

चने का पौधा

इसके अलावा, चने की फसल में फफूंदजनित बीमारियों से बचाव भी बहुत आवश्यक है.यदि पौधों में फफूंद का प्रकोप दिखाई दे तो नियंत्रण के लिए कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी या थायोफिनेट मिथाइल 70% डब्ल्यूपी दवा 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.समय पर किया गया स्प्रे फसल को रोगों से बचाकर उपज बढ़ाने में मदद करता है.

First Published :

December 07, 2025, 21:37 IST

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चने के पौधों को लग रहा है खतरनाक रोग, एक उपाय बचा सकता है पूरा खेत

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