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Last Updated:December 29, 2025, 11:34 IST
Charkha Cloth Making: “चप्पा-चप्पा चरखा चले” अब सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि जयपुर के ग्रामीण इलाकों की जीवित परंपरा है. यहां आज भी महिलाएं चरखे की मदद से सूत कातकर बेहतरीन कपड़े तैयार करती हैं. यह हस्तशिल्प न केवल स्वदेशी और पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर भी बनाता है. आधुनिक दौर में भी यह पारंपरिक कला राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को सहेजकर आगे बढ़ा रही है.
जयपुर: जयपुर में आज भी हुनरमंद लोगों ने वर्षों पुरानी कलाओं के हुनर को बरकरार रखा हैं, चाहें शिल्पकला हो या हस्तकला इसलिए आज भी दुनियाभर में जयपुर के हैंडमेड प्रोडक्ट्स की खूब डिमांड रहती हैं. भारत का एक ऐसा दौर भी था तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने चरखे से स्वदेशी रूप में कपड़े तैयार करने की अलख जगाई थी. इसलिए आजादी के पहले पूरे भारत में लोग घर-घर में चरखा चलाकर कपड़ों की बुनाई करते और बेहतरीन कपड़े तैयार करते थे. लेकिन बदलते समय और आधुनिकीकरण के साथ मशीनों ने हाथों के हुनर की जगह ले ली, लेकिन आज भी जयपुर के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं चरखा चलाकर ही बेहतरीन खादी के कपड़े तैयार करती हैं.
विभिन्न प्रदर्शनियों में लेकर उन्हें पहुंचती हैं ऐसे ही जवाहर कला केंद्र में जयपुर के चौमू इलाके से चरखा और उनसे तैयार कपड़े लेकर आई सुनीता देवी से बात की तो वस बताती हैं कि आज की युवा पीढ़ी फेसन की दीवानी हैं लेकिन उन्होंने कभी चरखा देखा भी नहीं होगा. पुराने समय में चरखा चलाकर लोग कपड़े तैयार किया करते थे, सुनीता बतातीं हैं की वह वर्षों से इस चरखे से कपड़े तैयार करने का काम करती आ रही हैं और उनके कपड़ों की लोगों में खूब डिमांड रहती हैं. सुनीता का कहना हैं कि चरखे से कपड़े की बुनाई करने में काफी मेहनत लगती हैं और लगातार पूरे दिन चरखा चलता हैं. तब जाकर कोई कपड़ा तैयार होता हैं लेकिन चरखे से तैयार कपड़ों की क्वालिटी मशीनों से भी बेहतरीन होती हैं.
चरखे से कैसे तैयार होते हैं बेहतरीन कपड़े पुराने समय का चरखा एक लकड़ी या लोहे से बनी ऐसी अनोखी मशीन हैं. जो बिना बिजली के चलती हैं. जिसे सिर्फ हाथों से चलाना जाता हैं, कपास से प्राप्त रूई को चरखे बारिक तरिके से बुना जाता है और फिर उससे बेहतरीन कपड़े तैयार होते हैं, सुनीता देवी बताती हैं कि चरखे से कपड़े तैयार करने के लिए चरखे को दोनों हाथ से चलाना जाता हैं. जिसमें एक हाथ से चरखे को घुमाया जाता हैं, तो वहीं दूसरे हाथ से रूई से धागा तैयार होता हैं और इस प्रकार लगातार घंटों तक चलते-चलते रूई से तैयार धागे के गट्टा तैयार हो जाता हैं और फिर उस ही धागे से कपड़ों की हाथों से बारिक बुनाई के साथ कपड़े तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती हैं.
कपड़े बनाने के चरखे में खास बात यह होती हैं कि इसे कोई भी बड़ी आसानी से चला सकता हैं और कपड़े तैयार कर सकता हैं. सुनीता बतातीं हैं आज के समय लोगों ने सिर्फ फिल्मों में, किताबों में चरखे को देखा हैं पढ़ा हैं लेकिन चरखा चलते हुए और उससे कपड़े तैयार होते बहुत कम लोगों ने देखा हैं. इसलिए आज भी खादी संस्थाओं से जुड़े लोगों खादी के बेहतरीन कपड़े चरखे से भी तैयार करते हैं.
साधारण कपड़े तैयार करने के लिए बेस्ट हैं चरखालोकल-18 से बात करते हुए सुनिता बताती हैं कि चरखे द्वारा सिर्फ कपड़ों को तैयार धागे से धागा जोड़कर साधारण रूप में तैयार किया जा सकता हैं. इसके अलावा डिजाइन और फिनिशिंग का वर्क चरखे से नहीं होता, इसलिए वह सर्दियों के लिए शॉल, दरिया जैसे कपड़े चरखे से तैयार करती हैं. जिन्हें खादी की प्रदर्शनियों में लेकर पहुंचती और वहां इनकी खूब डिमांड रहती हैं. सुनीता बतातीं है. उनके पास जो चरखा हैं वह उन्हें खादी ग्रामोद्योग द्वारा दिया गया था जो वर्षों पुराना हैं, लेकिन आज भी वह बेहतरीन कपड़े तैयार करता हैं. इसलिए वह अपने परिवार के आगामी लोगों को भी चरखे से कपड़े तैयार करना सिखाती हैं. ताकि हाथों की यह कला वर्षों तक ऐसे ही चलती रहें.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Location :
Jaipur,Rajasthan
First Published :
December 29, 2025, 11:34 IST
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चरखे की गूंज: जयपुर की ग्रामीण महिलाएं कैसे रच रही हैं खादी की विरासत



