Rajasthan
सिर्फ गीत नहीं, ज़िंदा परंपरा है चरखा! जयपुर के गांवों में महिलाएं आज भी चरखे से बनाती हैं बेहतरीन कपड़े

जयपुर ग्रामीण इलाकों में कैसे चरखा रच रहा है स्वदेशी कपड़ों की कहानी
Jaipur News: “चप्पा-चप्पा चरखा चले” अक्सर एक गीत के रूप में सुना जाता है, लेकिन जयपुर के ग्रामीण इलाकों में यह आज भी जीवन का हिस्सा है. यहां महिलाएं पारंपरिक चरखे से सूत कातकर बेहतरीन कपड़े तैयार करती हैं. यह न सिर्फ स्वदेशी और खादी परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका का मजबूत साधन भी है. हाथ से बने ये कपड़े प्राकृतिक, टिकाऊ और त्वचा के अनुकूल होते हैं. आधुनिक मशीनों के बीच चरखा आत्मनिर्भरता, मेहनत और भारतीय संस्कृति की जीवंत मिसाल बना हुआ है.
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जयपुर ग्रामीण इलाकों में कैसे चरखा रच रहा है स्वदेशी कपड़ों की कहानी




