धौलपुर के तसीमों में तिरंगे की रक्षा में शहीद हुए थे छत्तर और पंचम, अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर!

Last Updated:December 09, 2025, 15:57 IST
धौलपुर के तसीमों गांव ने स्वतंत्रता संग्राम में वीरता और बलिदान की एक अमर गाथा लिखी. 11 अप्रैल 1947 को तिरंगे की रक्षा के लिए छत्तर सिंह और पंचम सिंह ने अपने प्राणों की आहुति दी. इस घटना ने पूरे देश में आज़ादी की गूंज पैदा की और तसीमों गांव को आज़ादी का तीर्थ बना दिया. आज भी शहीद स्थल और विद्यालय उनकी वीरता की याद दिलाते हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके साहस और देशभक्ति से प्रेरित हों.
धौलपुर. भारत के संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपने स्वतंत्रता आंदोलनों को याद करता रहे. इसी भावना से आज हम राजस्थान के धौलपुर जिले में स्वतंत्रता आंदोलन के उन वीर शहीदों को याद कर रहे हैं जिन्होंने 11 अप्रैल 1947 को तिरंगे के सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. यह कहानी है 1947 की, जब धौलपुर रियासत का गांव तसिमो स्वाधीनता आंदोलन की क्रांति का एक तीर्थ बना हुआ था और इस तीर्थ का नेतृत्व कर रहे थे क्रांतिकारी कृष्ण दत्त पालीवाल, कृष्ण दत्त पालीवाल के नेतृत्व में धौलपुर प्रजामंडल आंदोलन प्रारंभ हुआ. इस आंदोलन के अंतर्गत स्वतंत्रता सेनानियों ने तसीमों गांव में घर-घर तिरंगा झंडा लगाया और अपनी देशभक्ति का परिचय दिया.
ऐसा ही एक वाक्य धौलपुर रियासत के तसीमों गांव का है, जब तसीमों में हर घर पर और नीम के पेड़ पर तिरंगा लगा हुआ था और इस तिरंगे को आजादी से पहले ब्रिटिश हुकूमत और रियासतें अपने खिलाफ बगावत का प्रतीक मानती थी. इसी भावना से धौलपुर रियासत के स्थानीय थानेदार अली आजम, DSP गुरुदत्त सिंह, और डिप्टी मजिस्ट्रेट शमशेर सिंह तसीमों गांव के उस स्थान पर पहुंचे, जहां झंडा लगा हुआ था. उन्होंने झंडे का अपमान करते हुए ललकारा, “हम इस झंडे को यहां से उखाड़ कर फेंक देंगे और हमें कोई रोकने की कोशिश न करे.”
जब ऐसी स्थिति आई, तो स्वतंत्रता सेनानी छत्तर सिंह ने इसका विरोध किया और थानेदार अली आजम ने छत्तर सिंह को गोली मार दी. छत्तर सिंह ने तिरंगे को बचाने के खातिर अपना बलिदान दे दिया. इसके बाद रियासत की पुलिस ने स्वतंत्रता सेनानियों पर ताबड़तोड़ गोली चलाना शुरू कर दिया. तब पंचम सिंह ने भी अपनी वीरता का परिचय देकर तिरंगा झंडा बचाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी. इस बर्बर गोलीकांड की गूंज भारत के हर एक कोने में पहुंची और इस घटना से धौलपुर रियासत का तसीमों गांव आजादी का तीर्थ बन गया. रियासत और अंग्रेजों के खिलाफ देशभर में स्वतंत्रता आंदोलनों ने जोर पकड़ लिया.
महाराज उदयभानु सिंह ने इस घटना पर जांच का आदेश दिया
ठाकुर सूबेदार सिंह और तसीमों के स्थानीय नेता पातीराम ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पंडित नेहरू जी से मुलाकात की और तसीमों कांड की घटना बताई. सरदार पटेल के प्रभाव के कारण धौलपुर रियासत के महाराज उदयभानु सिंह ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए जांच का आदेश दिया. आज भी तसीमों गांव आजादी के तीर्थ के रूप में हमें प्रेरित करता है. स्वतंत्रता सेनानी छत्तर सिंह और पंचम सिंह की स्मृति में तसीमों गांव में शहीद स्थल बनाया गया है और इस गांव के विद्यालय का नाम भी इन शहीदों के नाम पर रखा गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले छत्तर सिंह और पंचम सिंह को याद रखें.
आजादी का तीर्थ तसीमों, और शहीदों का यह धामकैसे पाई थी आजादी देखा, इसने वह संग्रामशहीद हो गए छत्तर पंचम, हुआ जगत में उनका नामआजादी के इन वीर शहीदों को मेरा बारंबार प्रणाममेरा शत-शत बार प्रणाम.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
December 09, 2025, 15:57 IST
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जानिए धौलपुर तसीमों गांव के स्वतंत्रता सेनानी छत्तर-पंचम के बलिदान की कहानी



