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मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना: 10 लाख बीमा कवर | Mangla Pashu Bima Yojana Registration 2025

Last Updated:November 30, 2025, 08:50 IST

Mangla Pashu Bima Yojana Registration 2025: मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत दुधारू पशुओं पर 10 लाख रुपये तक बीमा कवर का पंजीकरण शुरू हो गया है. पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए गांव-गांव पंजीकरण शिविर लगाए जाएंगे और वे अपने एंड्रॉयड मोबाइल से भी आसानी से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे. यह योजना पशुधन की आकस्मिक मृत्यु से होने वाले नुकसान से बचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व देगी.
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राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस योजना का उद्देश्य राज्य के पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है. इस योजना में दुधारू गाय-भैंस, भेड़-बकरी और ऊंटों की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा. विभाग द्वारा “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर बीमा किया जाएगा. पशुपालक अपने एंड्रॉइड मोबाइल फ़ोन से भी ख़ुद पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन गई है.

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योजना के दायरे को इस बार दोगुना करते हुए सरकार ने दुधारू गाय और भैंस का ₹10-10 लाख तक का बीमा कवर निर्धारित किया है. इसके साथ ही भेड़-बकरी के लिए भी ₹10-10 लाख और ऊंटों के लिए ₹2 लाख तक का बीमा प्रावधान किया गया है. प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी होने के बाद विभाग ने बीमा पंजीकरण को गति दी है. इस बीमा प्रक्रिया के लिए पशु के कान में टैग लगाना अनिवार्य रखा गया है, ताकि उसकी पहचान में कोई परेशानी न आए और योजना का लाभ आसानी से मिल सके.

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बीमा पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों में जनाधार कार्ड, पशु और पशुपालक की फोटो, पशु के ईयर टैग के 12 अंकों का नंबर, और जनाधार से जुड़े मोबाइल नंबर शामिल हैं. मोबाइल नंबर पर ओटीपी आने की व्यवस्था से पंजीकरण प्रक्रिया सुरक्षित और तेज़ी से पूरी होती है. इसके अलावा, एक जनाधार कार्ड से कई पशुओं का पंजीकरण आसान होगा, जिससे ग्रामीण पशुपालकों को काफ़ी सुविधा मिलेगी.

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इस योजना के तहत 1 दिसंबर से फ़रवरी तक गाँव-गाँव में विशेष शिविर लगाए जाएँगे. इन शिविरों में पशुपालन विभाग के चिकित्सक और बीमा सर्वे एजेंट पंजीकृत पशुओं का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करेंगे. उसके बाद एसआईपीएफ (SIPF) विभाग बीमा पॉलिसी जारी करेगा. पॉलिसी जारी होने के बाद 21 दिन का ग्रेस पीरियड लागू होगा. शिविरों के माध्यम से बीमा कार्य तेज़ी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों को जल्द लाभ मिल सके.

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इस योजना की ख़ास बात यह है कि क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाया गया है. अब बीमित पशु की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम करवाने की आवश्यकता नहीं होगी. पशु चिकित्सक द्वारा जारी डेथ सर्टिफ़िकेट ही बीमा दावा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त होगा. इससे पशुपालकों का समय और धन दोनों की बचत होगी और वे बिना किसी परेशानी के बीमा राशि प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें आकस्मिक हानि के समय तुरंत आर्थिक सहायता मिल सके.

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सरकार ने पशुपालकों के लिए बीमा की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की है. एक पशुपालक अधिकतम 2 गाय, 2 भैंस, 10 बकरियाँ, 10 भेड़ें और 10 ऊँटों का बीमा करा सकता है. इस सीमा का उद्देश्य अधिक से अधिक पशुपालकों को योजना का लाभ दिलाना है, ताकि सहायता समान रूप से वितरित हो सके. विभाग ने ईयर टैगिंग को अनिवार्य बनाकर बीमा प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मज़बूत किया है, जिससे योजना का कार्यान्वयन सुचारू रूप से हो सके.

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अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर जल्दी से जल्दी पंजीकरण करवा लें. उन्होंने यह भी सलाह दी है कि अपने जनाधार से जुड़े बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर अपडेट रखें. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंक विलय के बाद कई खातों में बदलाव हुआ है, और खाते अपडेट नहीं होने पर बीमा राशि अटक सकती है. इसके अलावा, वर्तमान में चल रहे मुँह पका-खुरपका टीकाकरण अभियान के दौरान विभागीय कार्मिक घर-घर पहुँच रहे हैं, इसलिए इसी समय ईयर टैगिंग भी करवा लेना पशुपालकों के लिए लाभदायक रहेगा.

First Published :

November 30, 2025, 08:50 IST

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दुधारू पशुओं के लिए 10 लाख तक का बीमा कवर, मोबाइल से आसान रजिस्ट्रेशन, जानें..

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