मिर्च में लग गया लीफ कर्ल और मोजेक रोग, पानी में 0.3 एमएल मिलाकर यह दवा छिड़कें, उपज भी होगी बंपर

Last Updated:November 26, 2025, 08:01 IST
नागौर में मिर्च की खेती के दौरान लीफ कर्ल और मोज़ेक रोग का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिससे उत्पादन 40-60% तक घट सकता है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के अनुसार ये रोग व्हाइट फ्लाई और एफिड के कारण फैलते हैं. शुरुआती लक्षणों में पत्तियों का मुड़ना, रंग बदलना और पौधे का छोटा रह जाना शामिल है. रोकथाम के लिए संक्रमित पौधों को तुरंत नष्ट करना, इमिडाक्लोप्रिड़ का छिड़काव, पीले स्टिकी ट्रैप और संतुलित खाद प्रबंधन बेहद जरूरी है. क्रॉप रोटेशन अपनाने से भी रोग चक्र टूटता है और फसल सुरक्षित रहती है.
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नागौर. अभी किसानों के लिए मिर्ची के उत्पादन का समय है. ऐसे में मिर्ची के पौधों को रोगों से बचाव की बहुत अधिक जरूरत है, बदलते मौसम में मिर्ची के पौधों में लीफ कर्ल एवं मोज़ेक रोग का प्रकोप सबसे ज्यादा रहता है. ये रोग उत्पादन को भी प्रभावित करते हैं. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह के अनुसार, ये रोग न सिर्फ पौधों की बढ़वार रोकते हैं, बल्कि उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट ला सकते हैं. इन रोगों का मुख्य कारण व्हाइट फ्लाई एवं एफिड जैसे कीट होते हैं, जो पौधों की पत्तियों का रस चूसकर वायरस को एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंचा देते हैं. यदि समय रहते इन रोगों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है.
मोज़ेक रोग से ग्रस्त पौधों की पत्तियां पीली व हरी लहरदार आकृति में दिखने लगती हैं. वहीं लीफ कर्ल रोग में पत्तियां मुड़कर ऊपर की ओर सिमट जाती हैं, जिससे पौधे की सामान्य प्रकाश संश्लेषण क्रिया प्रभावित होती है. इससे पौधे छोटे रह जाते हैं, फूल झड़ने लगते हैं और फलियों का आकार भी काफी छोटा हो जाता है. किसान यदि शुरुआती लक्षण पहचान लें तो हल्के नुकसान को बड़े नुकसान में बदलने से रोका जा सकता है.
रोग नियंत्रण के लिए सबसे पहला कदम
पीला स्टिकी ट्रैप का भी उपयोग करें
इसके अलावा फसल सुरक्षा के लिए पीला स्टिकी ट्रैप भी बहुत प्रभावी माना गया है. खेत में 8 से 10 ट्रैप प्रति बीघा लगाने से उड़ने वाले कीट इन पर चिपक जाते हैं और उनकी आबादी नियंत्रित रहती है. साथ ही, खेत में संतुलित खाद एवं सिंचाई प्रबंधन रखना भी आवश्यक है. कमजोर पौधे रोगों का अधिक शिकार बनते हैं, इसलिए जैविक खाद, सड़ी गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग कर मिट्टी को उर्वर बनाए रखना चाहिए.
क्रॉप रोटेशन भी जरूरी
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग सिंह ने बताया कि फसल बदलने की पद्धति (क्रॉप रोटेशन) को अपनाने से भी रोगों की संभावना कम होती है. लगातार एक ही खेत में मिर्च या अन्य सोलानेसी परिवार की फसलों को उगाने से कीट एवं वायरस की संख्या बढ़ जाती है. इसलिए एक सीज़न के बाद खेत को बदलकर दलहनी या तिलहनी फसलें उगाने से रोग चक्र टूटता है. ऐसे में अगर किसान अगर इन सभी उपायों को अपनाते हैं तो मिर्च की फसल को लीफ कर्ल और मोज़ेक जैसे घातक रोगों से काफी हद तक बचाया जा सकता है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें
Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
November 26, 2025, 08:01 IST
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मिर्च में लग गया लीफ कर्ल और मोज़ेक रोग, छिड़क दीजिए ये दवा, उपज भी होगी बंपर



