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हैदराबाद के ये पांच संस्थान हैं शैक्षणिक धरोहर, जिन्होंने बदल दिया शिक्षा का स्वरूप, आज भी है शहर की पहचान

Last Updated:November 27, 2025, 06:59 IST

हैदराबाद के 5 सबसे पुराने स्कूल: हैदराबाद अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और शिक्षा के लिए मशहूर रहा है. यहां के कई ऐतिहासिक स्कूल और कॉलेज न केवल छात्रों को शिक्षित करते आए हैं बल्कि शहर की पहचान भी बने हैं. सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल (1834), ऑल सेंट्स हाई स्कूल (1855), निजाम कॉलेज (1887), सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन (1959) और मदरसा-ए-आलिया (1872) शिक्षा, इतिहास और संस्कृति के अनोखे संगम का प्रतीक है. ये संस्थान आज भी हैदराबाद की शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.हैदराबाद अपनी समृद्ध विरासत और संस्कृति के लिए जाना जाने वाला शहर शिक्षा के क्षेत्र में भी हमेशा अग्रणी रहा है। ये पांच स्कूल हैदराबाद के इतिहास के साक्षी हैं। इन्होंने न केवल शहर के लाखों छात्र-छात्राओं को शिक्षित किया है बल्कि हैदराबाद को एक शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित होते देखा है। ये स्कूल और कॉलेज केवल शिक्षा के केंद्र ही नहीं बल्कि शहर की जीवंत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं जो आज भी भविष्य की पीढ़ियों को प्रकाशित कर रहे हैं।

हैदराबाद अपनी समृद्ध विरासत और संस्कृति के लिए जाना जाने वाला शहर शिक्षा के क्षेत्र में भी हमेशा अग्रणी रहा है. ये पांच स्कूल हैदराबाद के इतिहास के साक्षी हैं. इन्होंने न केवल शहर के लाखों छात्र-छात्राओं को शिक्षित किया है बल्कि हैदराबाद को एक शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित होते देखा है. ये स्कूल और कॉलेज केवल शिक्षा के केंद्र ही नहीं बल्कि शहर की जीवंत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है, जो आज भी भविष्य की पीढ़ियों को प्रकाशित कर रहे हैं.

सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल 1834 सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल हैदराबाद में अंग्रेजी शिक्षा की नींव रखने वाले सबसे पुराने स्कूलों में से एक है। इसकी स्थापना हैदराबाद के तत्कालीन ब्रिटिश रेजिडेंट सर जॉर्ज यूल और चर्च ऑफ इंग्लैंड के सहयोग से की गई थी। आज भी सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल अबीड्स रोड पर स्थित है और शहर के सबसे प्रतिष्ठित दिन-बोर्डिंग स्कूलों में से एक बना हुआ है। यह ICSE (आईसीएसई) सिलेबस पढ़ाता है और शैक्षणिक अनुशासन के विकास पर जोर देता है।

सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल हैदराबाद में अंग्रेजी शिक्षा की नींव रखने वाले सबसे पुराने स्कूलों में से एक है. इसकी स्थापना हैदराबाद के तत्कालीन ब्रिटिश रेजिडेंट सर जॉर्ज यूल और चर्च ऑफ इंग्लैंड के सहयोग से 1834 में की गई थी. आज भी सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल अबीड्स रोड पर स्थित है और शहर के सबसे प्रतिष्ठित दिन-बोर्डिंग स्कूलों में से एक बना हुआ है. यह ICSE (आईसीएसई) सिलेबस पढ़ाता है और शैक्षणिक अनुशासन के विकास पर जोर देता है.

ऑल सेंट्स हाई स्कूल 1855 ऑल सेंट्स हाई स्कूल की स्थापना का श्रेय हैदराबाद के आर्कडायोसीज़ को जाता है। यह स्कूल शहर के सबसे पुराने कैथोलिक शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और इसने हैदराबाद के शैक्षिक और सामाजिक ताने-बाने को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस स्कूल ने हैदराबाद रियासत के दौर में ही सभी वर्गों और धर्मों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना शुरू कर दिया था जो उस समय एक प्रगतिशील कदम था।

ऑल सेंट्स हाई स्कूल की स्थापना का श्रेय हैदराबाद के आर्कडायोसीज़ को जाता है. यह स्कूल शहर के सबसे पुराने कैथोलिक शैक्षणिक संस्थानों में से एक है और 1855 से संचालित हो रहा है. इसने हैदराबाद के शैक्षिक और सामाजिक ताने-बाने को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस स्कूल ने हैदराबाद रियासत के दौर में ही सभी वर्गों और धर्मों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना शुरू कर दिया था जो उस समय एक प्रगतिशील कदम था.

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निजाम कॉलेज 1887 निजाम कॉलेज की स्थापना हैदराबाद के छठे निजाम मीर महबूब अली खान के शासनकाल में हुई थी। दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआत एक स्कूल के रूप में हुई थी और बाद में 1889 में इसे कॉलेज में अपग्रेड कर दिया गया। यह ओस्मानिया विश्वविद्यालय से संबद्ध है। इस कॉलेज ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय शंकर दयाल शर्मा और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों को शिक्षित किया है। निजाम कॉलेज ने रियासत काल में उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में कार्य किया और पूरे दक्षिण भारत के छात्रों को आकर्षित किया।

निजाम कॉलेज की स्थापना हैदराबाद के छठे निजाम मीर महबूब अली खान के शासनकाल में 1887 में हुई थी. दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआत एक स्कूल के रूप में हुई थी और बाद में 1889 में इसे कॉलेज में अपग्रेड कर दिया गया. यह ओस्मानिया विश्वविद्यालय से संबद्ध है. इस कॉलेज ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्व. शंकर दयाल शर्मा और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों को शिक्षित किया है. निजाम कॉलेज ने रियासत काल में उच्च शिक्षा के केंद्र के रूप में कार्य किया और पूरे दक्षिण भारत के छात्रों को आकर्षित किया.

सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन 1959 इसकी जड़ें सेंट फ्रांसिस एकेडमी नामक एक स्कूल से जुड़ी हैं जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी। बाद में 1959 में सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की गई जो हैदराबाद का पहला महिला कॉलेज बना।यह संस्थान हैदराबाद में लड़कियों और महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसने एक ऐसे समय में महिला सशक्तिकरण की नींव रखी जब यह आम बात नहीं थी। यह अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन की जड़ें सेंट फ्रांसिस एकेडमी नामक एक स्कूल से जुड़ी है, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी. बाद में 1959 में सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना की गई जो हैदराबाद का पहला महिला कॉलेज बना. यह संस्थान हैदराबाद में लड़कियों और महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ. इसने एक ऐसे समय में महिला सशक्तिकरण की नींव रखी जब यह आम बात नहीं थी. यह अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है.

मदरसा-ए-आलिया 1872 मदरसा-ए-आलिया हैदराबाद की शिक्षा परंपरा का एक अद्वितीय और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी स्थापना हैदराबाद रियासत के प्रशासन द्वारा उर्दू, फारसी, अरबी और इस्लामिक अध्ययनों के साथ-साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए की गई थी। यह उस समय की एक प्रगतिशील संस्था थी, जिसने पारंपरिक धार्मिक शिक्षा और आधुनिक ज्ञान के बीच एक सेतु का काम किया। यह निजाम के दरबार के अधिकारियों और विद्वानों की शिक्षा का केंद्र था। आज यह संस्थान अभी भी चारमीनार के पास स्थित है और शिक्षा प्रदान करना जारी रखे हुए है

मदरसा-ए-आलिया हैदराबाद की शिक्षा परंपरा का एक अद्वितीय और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी स्थापना  1872 में हैदराबाद रियासत के प्रशासन द्वारा उर्दू, फारसी, अरबी और इस्लामिक अध्ययनों के साथ-साथ आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए की गई थी. यह उस समय की एक प्रगतिशील संस्था थी, जिसने पारंपरिक धार्मिक शिक्षा और आधुनिक ज्ञान के बीच एक सेतु का काम किया. यह निजाम के दरबार के अधिकारियों और विद्वानों की शिक्षा का केंद्र था. आज यह संस्थान अभी भी चारमीनार के पास स्थित है और शिक्षा प्रदान करना जारी रखे हुए है.

First Published :

November 27, 2025, 06:59 IST

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