रबी फसलों के लिए इंदिरा गांधी नहर में चक्रीय सिंचाई लागू

Last Updated:January 06, 2026, 18:30 IST
रबी फसलों की सिंचाई को संतुलित बनाए रखने के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) की नहरों में चक्रीय वरीयताक्रम लागू किया गया है. 4 जनवरी से 13 जनवरी तक ‘ब’ और ‘द’ समूह की नहरों में पानी दिया जाएगा, जबकि 13 जनवरी से 21 जनवरी तक ‘स’ और ‘अ’ समूह की नहरों में पानी मिलेगा. छोटी नहरों के लिए रोटेशन अवधि साढ़े सात दिन रखी गई है और शेष समय रखरखाव के लिए इस्तेमाल होगा. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सिंचाई करें और पानी का अपव्यय न करें.
ख़बरें फटाफट
नहरों का चक्रीय वरीयताक्रम जारी कर दिया गया
बीकानेर. रबी फसलों की सिंचाई व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के अंतर्गत नहरों का चक्रीय वरीयताक्रम जारी कर दिया गया है. सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त नवनीत कुमार ने आदेश जारी करते हुए इस वरीयताक्रम को प्रभावी कर दिया. यह व्यवस्था 21 जनवरी की शाम 6 बजे तक लागू रहेगी, जिसकी कुल अवधि 18 दिन होगी. इस दौरान चार में से दो समूहों की नहरों में एक साथ पानी छोड़ा जाएगा.
सिंचित क्षेत्र विकास आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रबी फसलों की सिंचाई के लिए आईजीएनपी की नहरों को अ, ब, स और द — चार समूहों में विभाजित किया गया है. चक्रीय वरीयताक्रम के तहत सीमित जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से नहरों में पानी दिया जाएगा, ताकि सभी क्षेत्रों को समान अवसर पर सिंचाई का लाभ मिल सके.
प्रभावी कार्यक्रम के अनुसार, 4 जनवरी से 13 जनवरी तक प्रथम समूह ‘ब’ और द्वितीय समूह ‘द’ की नहरों में पानी छोड़ा जाएगा. इस अवधि में तृतीय समूह ‘अ’ और चतुर्थ समूह ‘स’ को पानी नहीं मिलेगा. इसके बाद 13 जनवरी की शाम 6 बजे से 21 जनवरी की शाम 6 बजे तक वरीयताक्रम में बदलाव किया जाएगा. इस दूसरे चरण में प्रथम समूह ‘स’ और द्वितीय समूह ‘अ’ को पानी मिलेगा, जबकि तृतीय समूह ‘ब’ और चतुर्थ समूह ‘द’ को पानी बंद रहेगा. इस प्रकार पहले नौ दिन ‘ब’ और ‘द’ समूह तथा अगले नौ दिन ‘स’ और ‘अ’ समूह की नहरों में पानी का प्रवाह रहेगा.
छोटी नहरों के लिए रोटेशन अवधि साढ़े सात दिन रखी
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि छोटी नहरों के लिए रोटेशन अवधि साढ़े सात दिन रखी गई है. शेष एक दिन का समय मुख्य नहर एवं शाखा नहरों के क्रॉस रेगुलेटरों के रखरखाव और आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए उपयोग में लिया जाएगा. इससे नहर प्रणाली को सुचारू बनाए रखने और जल वितरण में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा को रोकने में सहायता मिलेगी. सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चक्रीय वरीयताक्रम लागू करने का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है. वर्तमान में जल उपलब्धता सीमित होने के कारण सभी नहरों में एक साथ पानी देना संभव नहीं है. ऐसे में रोटेशन प्रणाली के माध्यम से किसानों को निर्धारित समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
किसानों के लिए यह वरीयताक्रम रबी फसलों — विशेषकर गेहूं, चना, सरसों और जौ — की सिंचाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही सिंचाई की योजना बनाएं और पानी का अपव्यय न करें. साथ ही नहरों में अनधिकृत कट या छेड़छाड़ से बचें, ताकि सभी क्षेत्रों तक समय पर पानी पहुंच सके. चक्रीय वरीयताक्रम के सफल क्रियान्वयन से रबी सीजन में सिंचाई व्यवस्था को संतुलित रखने और फसल उत्पादन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Bikaner,Rajasthan
First Published :
January 06, 2026, 18:30 IST
homerajasthan
बीकानेर में रबी फसलों के लिए इंदिरा गांधी नहर में चक्रीय सिंचाई लागू



