Warrior of India: शेखावाटी के शेर! अकेले 5 आतंकियों को किया था ढेर, पढ़िए शौर्य चक्र विजेता कर्नल राजेंद्र सिंह का किस्सा

Last Updated:December 15, 2025, 08:54 IST
Warrior of India: शेखावाटी की धरती के वीर सपूत शौर्य चक्र विजेता कर्नल राजेंद्र सिंह कड़वासरा भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी थे. झुंझुनूं के ढंडारिया गांव में जन्मे कर्नल सिंह ने 41 राष्ट्रीय राइफल्स में रहते हुए 11 जून 2004 को कश्मीर में अकेले पांच पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया. उनकी इस अदम्य बहादुरी के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया.
Warrior of India: शेखावाटी की धरती को रणबांकुरे और शहीदों की भूमि कहा जाता है. यहां ऐसे सैकड़ों जांबाज योद्धाओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने भारतीय सेना हर युद्ध में भाग लिया है. वॉरियर ऑफ इंडिया की हमारी खास सीरीज में आज हम आपको एक ऐसे ही वीर योद्धा के बारे में बताने वाले हैं, जिन्होंने अपने जीवन काल में भारतीय सरहदों की रक्षा की और कई आतंकवादियों को भी मार गिराया. इस भारतीय सेना के जांबाज योद्धा का निधन दुश्मन की गोली से नहीं हुआ. इस योद्धा का नाम शौर्य चक्र विजेता कर्नल राजेंद्र सिंह कड़वासरा है.
इनका जन्म झुंझुन के ढंडारिया गांव में हुआ था. उनकी पत्नी ममता देवी और 2 पुत्र अक्षत व अपूर्व हैं. लेह में ड्यूटी के दौरान ही हार्ट अटैक आने के चलते उनका देहांत हुआ था. शहीद कर्नल राजेंद्र सिंह 41 राष्ट्रीय राइफल्स में ड्यूटी के दौरान 5 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने पर तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया गया था. राजेंद्र सिंह के परिवार का सेना से लंबा जुड़ाव रहा है. इनके पिता भारतीय सेना में कैप्टन थे और दो भाई भी सेना में रिटायरमेंट ले चुके हैं. कर्नल सिंह पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे. वहीं इनके पिता का भी देहांत हो चुका है.
शहीद राजेंद्र सिंह की शौर्य गाथा
11 जून 2004 को कश्मीर में पाकिस्तान से आए 5 आतंकवादी भारत में बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए आए थे. भारतीय सेना को इसकी जानकारी मिली. इसके तुरंत बाद मेजर प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में राजेंद्र सिंह और सेना के कई जवान आतंकवादियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए पहुंचे. जहां पर पांचां पाकिस्तानी आतंकवादी छिपे थे, सेना वहां पर पहुंची तो आतंकवादियों ने उन्हें देखकर गोलीबारी शुरू कर दी. चारों तरफ धुआं छा गया और सिर्फ गोलियों की आवाज आ रही थी. आस-पास के लोगों में दहशत मच गई. मेजर प्रदीप शर्मा और राजेंद्र सिंह सहित सेवा के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों पर फायरिंग शुरू की. तक देर तक आतंकवादी और भारतीय सेना के बीच गोलीबारी चलती रही.
राजेंद्र सिंह ने अकेले पांच आतंकियों को कर दिया था ढेर
जैसे ही मेजर प्रदीप शर्मा जवानों के साथ आगे बढ़े, अचानक आतंकवादियों की गोली उनको लग गई. वे घायल होकर गिर पड़े. सेना के अन्य जवान जब उन्हें बचाने के लिए पहुंचे तो उन पर भी आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी. इस पर राजेंद्र सिंह का खून खौल गया और उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर आतंकवादियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. एक के बाद एक आतंकवादी को मारते हुए, वे अकेले आगे बढ़ते गए और उन्होंने अकेले ने ही पांचों आतंकवादियों को मार गिराया. हालांकि इस घटना में मेजर प्रदीप शर्मा शहीद हो गए. लेकिन, राजेंद्र सिंह कड़वासरा ने उनकी मौत का बदला उन आतंकवादियों को मार कर लिया. इसी बहादुर के चलते उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था.
लद्दाख में आ गया था हार्ट अटैक
दिसंबर 2021 से वे लद्दाख के लेह सब एरिया में आर्टिलरी रेजिमेंट मैं पोस्टेड थे. वे 16 मीडियम रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त थे. सोमवार सुबह लगभग 10:30 बजे कॉन्फ्रेंस चल रही थी तभी कॉन्फ्रेंस के दौरान ही उनको हार्ट अटैक आ गया. बाद में उन्हें सेना के अस्पताल में ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था. शौर्य चक्र विजेता शहीद राजेंद्र सिंह को सेना के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी थी.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
Location :
Sikar,Rajasthan
First Published :
December 15, 2025, 08:54 IST
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शेखावाटी के शेर! अकेले 5 आतंकियों को किया था ढेर, पढ़िए कर्नल राजेंद्र की कहानी



