Rajasthan

मैं हूं उदयपुर! झीलों की नगरी, राजसी ठाठ, वीरता की गाथा और मेवाड़ की शाही विरासत से सजा अनोखा शहर

उदयपुर. मैं हूं उदयपुर, झीलों की नगरी, राजस्थान का मोती, जहां हर पत्थर में इतिहास बोलता है और हर झील में रॉयल ठाट झलकता है.मेरी पहचान सिर्फ झीलों तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कृति, आतिथ्य और वीरता की विरासत में बसी है. मेरी कहानी की शुरुआत होती है वर्ष 1559 से, जब मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में मेरे अस्तित्व को जन्म दिया.

गिर्वा की पहाड़ियों के बीच, ऋषि की सलाह पर चुनी गई इस भूमि पर मेरी नींव रखी गई, ताकि मैं मेवाड़ की राजधानी बन सकूं. एक ऐसा किला, जो मुगलों के सामने डटकर खड़ा रहे. पहाड़ियों से घिरे होने के कारण मैं रणनीतिक दृष्टि से मजबूत था और इसी धरती ने महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुए ऐतिहासिक हल्दीघाटी युद्ध को देखा. मेरा हर कोना उस वीरता की गवाही देता है.

‘वेनिस ऑर्फ ईस्ट’ कहलाता है उदयपुर

समय बदला, पर मेरा आकर्षण नहीं. अंग्रेजों के शासनकाल में भी मैं विदेशी मेहमानों की पहली पसंद बना रहा. मेरे महल, हवेलियां और झीलें उस दौर में भी अंग्रेज़ अफसरों को अपनी ओर खींचती रहीं. शायद इसी कारण मुझे “Venice of the East” कहा गया,  क्योंकि मेरे जल, मेरे महलों और मेरे सौंदर्य में वेनिस की झलक दिखाई देती है. आज मैं सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की पहचान बन चुका हूं. मेरे झीलों के किनारे अब दुनिया के सबसे शानदार लक्ज़री होटल्स खड़े हैं, जहां कभी राजाओं की शादियां होती थीं, अब बॉलीवुड सितारों और विदेशी कपल्स के रॉयल डेस्टिनेशन वेडिंग्स होती है. जगमंदिर, लेक पैलेस, सिटी पैलेस  ये सिर्फ महल नहीं, बल्कि मेरी शान हैं, जो हर आगंतुक को रॉयल अहसास कराते हैं.

परंपरा और आधुनिकता का संगम है उदयपुर

महाराणा भूपाल सिंह के नेतृत्व में जब मेवाड़ भारत संघ में शामिल हुआ, तब मेरी धरती ने एक बार फिर अपने गौरवशाली इतिहास में नया अध्याय जोड़ा. महाराणा को आजीवन ‘महाराणा’ का खिताब मिला, और मैं, उदयपुर, भारत की आत्मा में स्थायी रूप से बस गया. आज मेरे पास एयरपोर्ट हैं, रेलवे स्टेशन हैं, आधुनिक सड़कें हैं, पर मेरी आत्मा अब भी मेरे घाटों, झीलों और मंदिरों में बसती है. सूरज ढलते ही पिचोला झील का पानी सुनहरी रोशनी से दमक उठता है, और हवाओं में राजस्थानी संगीत की मिठास घुल जाती है. मैं हूं उदयपुर, वह शहर जहां परंपरा और आधुनिकता एक साथ सांस लेती हैं.

मैं हूं झीलों की नगरी,

मैं हूं रॉयल डेस्टिनेशन,

मैं हूं संस्कृति की पहचान.

मैं हूं उदयपुर.

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