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अंबाजी मंदिर में भक्त ने किया सोने के हार का गुप्त दान, 33 लाख से अधिक है कीमत, मंदिर में चल रहा दान का उत्सव!

Last Updated:January 07, 2026, 16:26 IST

अंबाजी मंदिर, जो राजस्थान–गुजरात सीमा पर स्थित है, भक्तों के सोने-चांदी के दानों से और भी भव्य बनता जा रहा है. हाल ही में सौराष्ट्र के एक भक्त ने मां अंबा को 263 ग्राम का सोने का हार, जिसकी कीमत लगभग 33 लाख रुपये है, भेंट किया. मंदिर का शिखर 358 स्वर्ण कलशों से सुसज्जित है और यहां श्रीयंत्र की पूजा होती है. इसी तरह, जय भोले ग्रुप ने भी सोने और हीरे का मुकुट भेंट किया. श्रद्धालुओं की अपार भक्ति और दान से यह शक्तिपीठ लगातार चमक रहा है.

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सिरोही. राजस्थान–गुजरात सीमा से सटे कस्बे अंबाजी में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में देशभर से भक्त सोने का दान कर रहे हैं. हाल ही में सौराष्ट्र के एक भक्त ने मंदिर में करीब 33 लाख रुपये से अधिक मूल्य का सोने का हार दान किया है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, सौराष्ट्र निवासी एक भक्त ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए मां अंबा को 263 ग्राम वजनी सोने का हार भेंट किया.

यह हार अलग-अलग डिज़ाइन का है, जिसकी अनुमानित कीमत 33 लाख 13 हजार रुपये बताई जा रही है. अंबाजी मंदिर में लगातार सोने-चांदी का दान प्राप्त हो रहा है. इससे पहले, गत शुक्रवार को जय भोले ग्रुप की ओर से 620 ग्राम सोने और हीरे का मुकुट भी भेंट किया गया था, जिसकी कीमत 43.51 लाख रुपये आंकी गई थी.

358 स्वर्ण कलशों से सुसज्जित है मंदिर का शिखर

हिल स्टेशन माउंट आबू से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अंबाजी माता का यह प्राचीन शक्तिपीठ गुजरात और राजस्थान की सीमा पर है. अंबाजी मंदिर के शिखर को स्वर्णमय बनाने का कार्य पिछले कुछ वर्षों से जारी है, जिसे भक्तों द्वारा प्राप्त सोने और चांदी के दान से पूरा किया जा रहा है. मंदिर का शिखर 358 स्वर्ण कलशों से सुसज्जित है और इसकी ऊंचाई 103 फीट है. यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है, मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का हृदय भाग गिरा था.

श्रीयंत्र की होती है पूजा

इस शक्तिपीठ में देवी भवानी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां श्रीयंत्र की पूजा की जाती है. इस श्रीयंत्र को इस प्रकार सजाया जाता है कि भक्तों को इसमें मां का विग्रह दिखाई देता है. विशेष बात यह है कि यह श्रीयंत्र सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देता और न ही इसका फोटो लिया जा सकता है. मंदिर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर गब्बर पर्वत स्थित है, जहां देवी का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है. यहां मां की पूजा ज्योति स्वरूप में की जाती है, मान्यता है कि इसी पहाड़ पर मां के पदचिह्न और रथचिह्न आज भी मौजूद हैं.

About the AuthorMonali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

Location :

Sirohi,Rajasthan

First Published :

January 07, 2026, 16:26 IST

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अंबाजी मंदिर में भक्तों ने चढ़ाया 33 लाख का सोने का हार, जानें खासियत

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