Dholpur Historical Temple | Maharaja Bhagwant Singh Diwan | Dholpur Heritage Places | Dholpur Tourism Spots

Last Updated:November 15, 2025, 12:16 IST
Dholpur Ladli Jagmohan Mandir: धौलपुर के महाराजा भगवंत सिंह के दीवान द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक मंदिर आज भी शहर की संस्कृति और विरासत का अहम हिस्सा है. अपनी अनोखी वास्तुकला और गहरी धार्मिक मान्यताओं के कारण यह मंदिर लोगों के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है. धौलपुर के इतिहास में इसका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है और यहां रोजाना श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.
धौलपुर: राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित मचकुंड धाम एक प्राचीन तीर्थ स्थल है, जहां कुल 108 मंदिर विद्यमान हैं. इनमें से तीन मंदिर विशेष रूप से प्रमुख हैं—जगन्नाथ जी का मंदिर, मदन मोहन जी का मंदिर (जिसे राजगुरु मंदिर भी कहा जाता है) और लाडली जगमोहन जी का मंदिर. यह धाम भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा होने के कारण भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. मथुरा के निकट होने से इसे श्रीकृष्ण की लीला स्थली के रूप में भी जाना जाता है.
लाडली जगमोहन जी मंदिर का निर्माण धौलपुर रियासत के महाराजा भगवंत सिंह के दीवान राजधरजू कन्हैया लाल ने करवाया था. इसका शिलान्यास आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी, संवत 1899 (विक्रम संवत) में हुआ. मचकुंड सरोवर के दक्षिणी किनारे पर स्थित यह मंदिर धौलपुर के प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है. इसकी उत्कृष्ट स्थापत्य कला आज भी धौलपुर जिले में अपनी अलग पहचान रखती है. मंदिर की दीवारें, स्तंभ और मेहराब राजस्थानी शिल्पकला की बारीकी को दर्शाते हैं, जो देखने वाले को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.
प्राण प्रतिष्ठा और दैनिक पूजा-अर्चनामंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा रियासत काल में ही संपन्न की गई. मंदिर के महंत बताते हैं कि प्रतिदिन भगवान को पंचामृत स्नान कराया जाता है. इसके बाद उन्हें मधुवनी (मधुर वस्त्र) पोशाक धारण कराई जाती है. स्नान और श्रृंगार के पश्चात भव्य आरती का आयोजन होता है, जिसमें भक्तगण भाव-विभोर होकर भाग लेते हैं. यह क्रम वर्षों से अविच्छिन्न रूप से चला आ रहा है, जो मंदिर की जीवंत परंपरा को दर्शाता है.
कालयवन वध की लीला स्थलीमचकुंड धाम का धार्मिक महत्व और भी गहरा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहीं पर भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस कालयवन का वध करवाया था. श्रीकृष्ण ने कालयवन को मचकुंड महाराज के समक्ष लाकर खड़ा किया, जहां महाराज की दृष्टि मात्र से राक्षस भस्म हो गया. इस घटना ने धाम को श्रीकृष्ण की लीला स्थली के रूप में अमर बना दिया. मथुरा-वृंदावन की निकटता के कारण भी यहां की भक्ति रसपूर्ण वातावरण से परिपूर्ण रहती है.
भक्तों का तांतालाडली जगमोहन जी के दर्शन की महिमा दूर-दूर तक फैली है. प्रतिदिन हजारों भक्त यहां आकर भगवान के चरणों में शीश नवाते हैं. विशेषकर आषाढ़, कार्तिक और जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर मेला सा लग जाता है. मंदिर परिसर में शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हर आने वाले को होता है. स्थानीय लोग इसे “छोटी वृंदावन” की संज्ञा देते हैं.
Jagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें
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Location :
Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
November 15, 2025, 12:16 IST
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धौलपुर में छिपा इतिहास! महाराजा भगवंत सिंह के दीवान ने बनवाया था यह मंदिर



