Rajasthan

Jhalawar School Collapse: छत गिरने से पहले बाहर नाश्ता कर रहे थे टीचर, छात्रों को जबरन भेजा था अंदर!

Last Updated:July 26, 2025, 17:41 IST

Jhalawar School Collapse: राजस्थान के झालावाड़ के पीपलोदी गांव में शुक्रवार को एक सरकारी स्कूल की जर्जर बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई और 22 घायल हुए. यह इमारत पिछले चार साल से खराब हालत मे…और पढ़ेंछत गिरने से पहले बाहर नाश्ता कर रहे थे टीचर, छात्रों को जबरन भेजा था अंदर!झालावाड़ स्कूल हादसे में 7 बच्चों की मौत हुई है.

हाइलाइट्स

स्कूल की बिल्डिंग गिरने से 7 बच्चों की मौत हुई5 शिक्षक और एक अधिकारी निलंबित किए गएग्रामीणों ने पहले ही बिल्डिंग की शिकायत की थी
जयपुर. राजस्थान के झालावाड़ के पीपलोदी गांव में सात बच्चों की मौत का कारण बनी स्कूल की बिल्डिंग अचानक नहीं गिरी. यह चार साल से जर्जर थी और ग्रामीणों ने इसकी शिकायत भी की थी. गिरने से पहले भी छात्रों ने शिक्षकों को बताया था कि दीवारों और छत से चूना और पत्थर गिर रहे हैं, लेकिन शिक्षक बाहर बैठकर नाश्ता करते रहे और छात्रों को धमकाकर अंदर बैठा दिया. कुछ देर बाद बिल्डिंग का एक हिस्सा ढह गया. इस घटना के बाद पांच शिक्षकों और एक शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है.

झालावाड़ के मनोरथाना के पीपलोदी गांव का सरकारी स्कूल का दृश्य दिल दहलाने वाला था. शुक्रवार को पूरा गांव अपने बच्चों को मलबे से निकालने की कोशिश में जुटा था. ग्रामीणों की जद्दोजहद के बावजूद सात बच्चों की मौत हो गई, लेकिन 22 बच्चों को जीवित निकाल लिया गया.  ग्रामीण गुस्से में हैं और उनका कहना है कि बिल्डिंग गिरने से पहले ही इसके संकेत मिल चुके थे.

छत और दीवारों का प्लास्टर गिरने लगा था और कंकड़ गिर रहे थे. छात्रों ने शिक्षकों से शिकायत की थी, लेकिन शिक्षक बाहर खुले में नाश्ता कर रहे थे. उन्होंने छात्रों को धमकाकर कमरे में बैठा दिया और कुछ देर बाद बिल्डिंग गिर गई.

यह बिल्डिंग 1978 में बनी थी और चार साल से जर्जर थी. छात्रों के अभिभावकों ने कुछ साल पहले पैसे इकट्ठे कर बिल्डिंग की छत की मरम्मत करवाई थी, लेकिन पूरी बिल्डिंग ही जर्जर हो चुकी थी. हादसे से पहले न तो शिक्षा विभाग चेता न ही प्रशासन, जबकि नियमानुसार इसे जर्जर बिल्डिंग घोषित कर मरम्मत तक वैकल्पिक इंतजाम होना चाहिए था.

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अब जर्जर स्कूलों की रिपोर्ट मांगी गई है और जर्जर स्कूलों में बच्चों को नहीं बैठाने के लिए कहा गया है. राजस्थान में करीब दो हजार स्कूलें जर्जर हैं. शुक्रवार को ही नागौर के डेगाना में एक जर्जर स्कूल की छत प्रार्थना सभा से कुछ देर पहले गिर गई. गनीमत रही कि उस वक्त बच्चे नहीं थे। हर साल जर्जर स्कूलों की सूची तैयार करने का नियम है.

सवाल यह है कि क्या इस बार सूची बनी? अगर बनी तो यह स्कूल उस सूची में क्यों नहीं थी? ऐसी जर्जर स्कूलों की बिल्डिंग को गिराया क्यों नहीं जा रहा है.

निखिल वर्मा

एक दशक से डिजिटल जर्नलिज्म में सक्रिय. दिसंबर 2020 से Hindi के साथ सफर शुरू. न्यूज18 हिन्दी से पहले लोकमत, हिन्दुस्तान, राजस्थान पत्रिका, इंडिया न्यूज की वेबसाइट में रिपोर्टिंग, इलेक्शन, खेल और विभिन्न डे…और पढ़ें

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छत गिरने से पहले बाहर नाश्ता कर रहे थे टीचर, छात्रों को जबरन भेजा था अंदर!

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