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क्या वास्तव में गर्म होते हैं रजाई और कंबल, कैसे आती है इनमें गर्मी, जवाब हैरान कर देगा

Last Updated:January 05, 2026, 19:07 IST

जाड़ों में हर कोई इन दिनों कंबल और रजाई ओढ़ रहा है. इनमें सोकर कड़ाके की ठंड में भी गर्मी अहसास करने का आनंद ही अलग है. सही मायनों में रजाई का आविष्कार तो हजारों साल पहले ही हो चुका था. कंबल बाद में आया. आप अक्सर सुनते होंगे कि ये रजाई या ये कंबल बहुत गर्म है. क्या वास्तव में ऐसा होता है. आखिर ये कहां से गर्मी लाकर हमें देते हैं. जवाब हैरान तो कर ही देगाGenerated image

आप अक्सर सुनते हैं कि ये रजाई बहुत गर्म है, इस देश में बनने वाले कंबल बहुत ज्यादा गर्म होते हैं. लेकिन क्या आपको मालूम है कि कोई भी रजाई और कंबल गर्म नहीं होती. तो कैसे ये गर्मी देती हैं. क्या है इसके पीछे का साइंस. अगर आप जानेंगे तो खुद हैरान रह जाएंगे.

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दुनिया का बेहतरीन से बेहतरीन कंबल या रजाई गर्मी नहीं देती. इसका सबसे बड़ा सबूत ये है कि अगर किसी रजाई या कंबल के अंदर किसी शव को रख दिया जाए तो ये अंदर से बहुत ठंडा ही रहेगा. इसमें कोई गर्मी आपको महसूस नहीं होगी. तो इसकी क्या वजह होगी.

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अब आइए आपको इसका सीक्रेट बताते हैं, जिसके बाद आप ये नहीं कहेंगे कि ये रजाई और या इस देश या ब्रांड का कंबल बहुत गर्म होता है. चाहे रजाई हो या कंबल या कोई भी आला दर्जे का लिहाफ, ये सभी खुद से गर्मी पैदा नहीं करते बल्कि आपके शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोक देते हैं, ये ऊष्मा के कुचालक के रूप में काम करते हैं, जो ठंडी हवा को अंदर आने और शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकते हैं.

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बस इसी वजह से कुछ देर में ही आप जब कंबल और रजाई के अंदर आते हैं तो गर्म महसूस होने लगते हैं. दरअसल हमारा और आपका शरीर लगातार गर्मी उत्सर्जित करता रहता है. और असल में यही गर्मी जब रजाई और कंबल ओढ़ने से बाहर नहीं निकल पाती तो अंदर इस गर्मी से खुद गर्म होने लगती हैं और अंदर की हवा को गर्म करने लगती हैं. रजाई में फिलिंग होने से ये गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है, जबकि साधारण कंबल में ये जल्दी कम हो सकती है.

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रजाई और कंबल ऊष्मा के कुचालक के रूप में काम करते हैं, जो शरीर से निकलने वाली गर्मी को बाहर जाने से रोकते हैं. ये खुद गर्मी उत्पन्न नहीं करते, बल्कि हवा की परतों को फंसाकर तापीय इन्सुलेशन देते हैं. ऊन या कपास जैसे रेशों और उनके बीच फंसी हवा ऊष्मा को ट्रैप करती है. दो कंबल इस्तेमाल करने पर बीच की हवा की अतिरिक्त परत इन्सुलेशन बढ़ाती है, जिससे शरीर की मेटाबॉलिक गर्मी बनी रहती है.

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तो अब इसी से जुड़ा एक सवाल और है. एक औसत मानव शरीर कितनी गर्मी उत्सर्जित करता है. आराम की अवस्था में एक स्वस्थ वयस्क लगभग 80-100 वाट की दर से गर्मी उत्पन्न करता है. यानी एक पारंपरिक लाइट बल्ब जितनी गर्मी! जब हल्का चलते हैं तो शरीर 200-250 वाट गर्मी पैदा करता है तो तेज दौड़ने या भारी कसरत पर 600-1000 वाट तक गर्मी रिलीज करता है यानी एक छोटे हीटर जितना!.कुल मिलाकर, एक व्यक्ति पूरे दिन में लगभग 2,000 – 2,500 किलोकैलोरी ऊष्मा और ऊर्जा पैदा करता है. उत्पन्न करता है, जिससे एक सेल फोन को कई बार चार्ज किया जा सकता है.

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निरंतर गर्मी पैदा करना ही काफी नहीं है. शरीर को इसे नियंत्रित भी करना होता है. यह काम हाइपोथैलेमस नामक मस्तिष्क का एक भाग करता है, जो एक थर्मोस्टैट की तरह काम करता है. जब शरीर गर्म हो जाता है, तो त्वचा के पास रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, ताकि अधिक रक्त त्वचा तक पहुंचे और विकिरण द्वारा बाहर निकल जाए. सांस छोड़ते समय गर्म, नम हवा निकलती है.

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वैसे अब ये भी जान लीजिए कि रजाई और कंबल कब ईजाद किए गए और कब से इनका इस्तेमाल शुरू हुआ होगा. करीब 70,000-50,000 वर्ष पूर्व मनुष्य ने शिकार किए गए जानवरों की खाल और फर का उपयोग ओढ़ने और बिछाने के लिए करना शुरू किया. यही कंबल/रजाई का सबसे प्राचीन और मौलिक रूप था.

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वैसे अब ये भी जान लीजिए कि रजाई और कंबल कब ईजाद किए गए और कब से इनका इस्तेमाल शुरू हुआ होगा. करीब 70,000-50,000 वर्ष पूर्व मनुष्य ने शिकार किए गए जानवरों की खाल और फर का उपयोग ओढ़ने और बिछाने के लिए करना शुरू किया. यही कंबल/रजाई का सबसे प्राचीन और मौलिक रूप था.

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प्राचीन मिस्र में मिस्रवासी लिनन के बने हल्के कंबलों का उपयोग करते थे. शाही लोग इन्हें सजावटी पैटर्न से भी सजाते थे. प्राचीन रोम में “लोडीसे” नाम के ऊनी कंबल प्रचलित थे, जिन्हें बिस्तर पर ओढ़ा जाता था. रजाई का आविष्कार ऐसा लगता है कि सबसे पहले प्राचीन चीन और प्राचीन मिस्र में हुआ होगा.

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कंबल का इतिहास रजाई की तुलना में ज्यादा नया है. 14वीं शताब्दी में इंग्लैंड के ब्रिस्टल और वेल्स शहर ऊनी कंबलों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध हो गए. 18वीं शताब्दी में थॉमस ब्लैंकेट नामक एक इंग्लिशमैन ने कपास और ऊन को मिलाकर एक नया प्रकार का कंबल बनाया, जिसके कारण इसे ब्लैंकेट कहना जाने लगा

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January 05, 2026, 19:06 IST

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