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क्या ऑफिस जाने के नाम से डर लगता है? खुद पर हावी न होने दें काम का प्रेशर, जानिए बर्नआउट से बचने के टिप्स

Last Updated:January 11, 2026, 12:17 IST

Career Burnout Prevention before 30: आज के भागदौड़ भरे कॉर्पोरेट कल्चर में ‘करियर बर्नआउट’ केवल उम्रदराज प्रोफेशनल्स की समस्या नहीं रह गई है. 20 से 30 साल की उम्र के युवा, जिन्हें एनर्जी का पावरहाउस माना जाता है, इस मानसिक और शारीरिक थकान का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं. जानिए इससे बचने के तरीके.ऑफिस जाने के नाम से डर लगता है? खुद पर हावी न होने दें काम का प्रेशरCareer Burnout: करियर में बोरियत से बचने के लिए लाइफस्टाइल पर फोकस करना जरूरी है

नई दिल्ली (Career Burnout Prevention). इन दिनों 25 से 30 साल के युवा अजीब सी थकान महसूस कर रहे हैं. यह थकान सिर्फ शरीर की नहीं, बल्कि मन की भी है. करियर की शुरुआत में ही बहुत कुछ हासिल कर लेने की चाहत और हर समय काम से जुड़े रहने की मजबूरी उन्हें ‘बर्नआउट’ की तरफ धकेल रही है. बर्नआउट का मतलब है- काम का उत्साह खो देना और मानसिक रूप से खाली महसूस करना. अगर आपको सोमवार की सुबह भारी लगती है या ऑफिस का नाम सुनते ही चिड़चिड़ापन होता है तो यह खतरे की घंटी है.

हकीकत यह है कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां ‘बिजी’ रहने को ही सफलता मान लिया गया है. लेकिन लगातार बिना रुके दौड़ना आपके करियर की उम्र को छोटा कर देता है. 30 साल की उम्र से पहले बर्नआउट होना पूरे भविष्य पर असर डाल सकता है. अच्छी बात यह है कि इसे रोकना बहुत मुश्किल नहीं है. बस आपको अपनी आदतों और काम करने के तरीके में कुछ छोटे लेकिन जरूरी बदलाव करने होंगे. जानिए खुद को इस मानसिक थकान से बचाने के खास टिप्स.

करियर बर्नआउट से कैसे बचें?

अपनी मेंटल और फिजिकल हेल्थ ठीक रखने के लिए करियर बर्नआउट से बचना जरूरी है. अगर 30-35 की उम्र तक आते-आते ही नौकरी या काम से थकने लगेंगे तो आगे की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी. जानिए करियर बर्नआउट से बचने के कुछ खास टिप्स:

1. वर्क लाइफ बैलेंस

समय तय करें: ऑफिस का काम खत्म होने के बाद लैपटॉप बंद कर दें.
नोटिफिकेशन: घर पहुंचने के बाद वर्क ग्रुप्स और ईमेल के नोटिफिकेशन बंद करने की आदत डालें.
स्पष्ट नियम: अपने सहकर्मियों को विनम्रता से बताएं कि आप ऑफिस आवर्स के बाद उपलब्ध नहीं रहेंगे.

2. ‘हसल कल्चर’ के झांसे में न आएं

मैरथॉन समझें: करियर लंबी रेस है, इसे एक दिन में जीतने की कोशिश न करें.
तुलना बंद करें: सोशल मीडिया पर दूसरों की ‘दिखावटी सफलता’ देखकर खुद पर दबाव न बनाएं.
आराम जरूरी है: याद रखें कि आराम करना आलस नहीं, बल्कि अगले दिन के लिए खुद को रिचार्ज करना है.

3. काम आएंगे छोटे-छोटे ब्रेक्स

पोमोडोरो तकनीक: हर 50 मिनट के काम के बाद 5-10 मिनट का ब्रेक लें. अपनी डेस्क से उठें और थोड़ा टहलें.
लंच ब्रेक: लंच अपनी डेस्क पर काम करते हुए नहीं, बल्कि शांति से बिना फोन के करें.
साप्ताहिक छुट्टी: हफ्ते में कम से कम एक दिन पूरी तरह से काम से दूर रहें.

4. समझें अपनी प्रायोरिटी

टू-डू लिस्ट: रोज सुबह उन 3 सबसे जरूरी कामों को चुनें जिन्हें खत्म करना अनिवार्य है. बाकी कामों को कल पर छोड़ना सीखें.
‘ना’ कहना सीखें: अगर आपके पास पहले से बहुत काम है तो एक्सट्रा काम के लिए मना करना सीखें. यह आपकी ईमानदारी है, कमजोरी नहीं.

5. शौक और सेहत को दें समय

हॉबी: कोई ऐसा काम जरूर करें जिसे करने में आपको मजा आता हो (जैसे पेंटिंग, कुकिंग या खेलना).
एक्सरसाइज: शारीरिक गतिविधि स्ट्रेस कम करने का सबसे अच्छा तरीका है.
नींद: कम से कम 7-8 घंटे की गहरी नींद लें, यह दिमाग के लिए सबसे बड़ी दवा है.

लाइफस्टाइल में ये छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं.

About the AuthorDeepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें

First Published :

January 11, 2026, 12:17 IST

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