अलवर में डॉ. कुमुद गुप्ता ने 16000 लोगों को सीपीआर सिखाया

Last Updated:December 04, 2025, 20:30 IST
अलवर की स्टील रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद गुप्ता पिछले 15 वर्षों से जीवन रक्षक तकनीकों पर लोगों को जागरूक कर रही हैं और अब तक करीब 16,000 लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दे चुकी हैं. पड़ोसी के बच्चे की जान सीपीआर से बचाने के बाद उन्होंने इसे जीवन का मिशन बना लिया. वे सरकारी विभागों, पुलिस, कॉलेजों, स्कूलों और आम जनता को फर्स्ट एड व आपातकालीन तकनीकों की ट्रेनिंग देती हैं। डॉ. गुप्ता का मानना है कि हार्ट अटैक, डूबने या सांस रुकने की स्थिति में तीन मिनट का गोल्डन टाइम बेहद महत्वपूर्ण होता है.
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अलवर. स्टील रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमुद गुप्ता पिछले 15 वर्षों से जीवन रक्षक तकनीकों पर लोगों को जागरूक कर रही हैं. 2011 से अब तक वे करीब 16,000 लोगों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण दे चुकी हैं. वह सरकारी संस्थाओं, पुलिस, परिवहन विभाग, होमगार्ड और आम जनता को फर्स्ट एड व आपातकालीन जीवन रक्षक तकनीकों की ट्रेनिंग देकर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने का कार्य कर रही हैं. उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी का बच्चा छत से गिरकर बेहोश हो गया और उसकी सांसें रुक गई. इस दौरान उन्होंने तुरंत सीपीआर देकर उसकी जान बचाई, तभी से लेकर अब तक वह करीब 16,000 लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दे चुकी हैं.
डॉ. कुमुद गुप्ता ने बताया कि लोगों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता और माता जी से मिली. डॉ. कुमुद गुप्ता ने बताया कि रेड क्रॉस सोसाइटी और अलवर की मित्तल हॉस्पिटल के साथ मिलकर लगातार लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है. उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति को बचाकर जितनी खुशी मिलती है, उतनी खुशी लाखों दान देकर भी नहीं मिलती, उन्होंने बताया कि इस जागरूकता अभियान के दौरान वह लोगों को ट्रेनिंग में बताती हैं कि अगर किसी की पल्स नहीं आ रही है, तो कैसे चेक कर सकते हैं.
15 साल में कई लोगों को दी सीपीआर की ट्रेनिंग
कुमुद गुप्ता ने बताया कि इन 15 सालों में उन्होंने कई हजार पुलिस कर्मियों, इनकम टैक्स कमिश्नर और उनके स्टाफ, सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों, सभी स्कूलों में बच्चों और स्टाफ को सीपीआर की ट्रेनिंग दी है. इसके अलावा उन्होंने लड़कियों को स्वास्थ्य और सफाई सहित महिलाओं से संबंधित समस्याओं को लेकर जागरूकता अभियान चलाया. हार्ट अटैक, जलने, डूबने या अन्य कारणों से यदि किसी व्यक्ति की पल्स बंद हो जाए, तो तीन मिनट के भीतर दिया गया सीपीआर उसकी जान बचा सकता है. उन्होंने बताया कि सांस रुकने के बाद यही तीन मिनट गोल्डन टाइम होते हैं, जिसमें समय पर सीपीआर देकर व्यक्ति की सांसें वापस लाई जा सकती हैं. देर होने पर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है, जिससे हृदय काम करना बंद कर देता है और व्यक्ति की मौत हो सकती है या वह कोमा में जा सकता है. उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति को सीपीआर देते हैं, तो उस समय व्यक्ति के सीने पर 30 बार दबाव और दो बार सांस दी जाती है, जिससे सांसें लौटाने में मदद मिलती है.
डॉ. कुमुद का मानना है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलते खानपान के कारण हार्ट अटैक व अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. ऐसे में हर व्यक्ति को सीपीआर का ज्ञान होना आवश्यक है ताकि आपात स्थिति में किसी की जान बचाई जा सके. साथ ही वे महिलाओं के स्वास्थ्य और हाइजीन पर भी कार्य कर रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म स्वच्छता, एनीमिया और पोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Alwar,Rajasthan
First Published :
December 04, 2025, 20:30 IST
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अलवर में डॉ. कुमुद गुप्ता ने 16000 लोगों को सिखाया सीपीआर, जाने इनकी कहानी



