ड्रैगन आवाज दे रहा है, पर आंख मूंदकर जाने का नहीं, चीन की फितरत खतरनाक, फूंक-फूंक कर रखना होगा कदम – india cautious of dragon elephant tango war veteran major general gg dwivedi warn new delhi

मेजर जनरल जीजी द्विवेदी
नई दिल्ली. 1 अप्रैल 2025 को द्विपक्षीय संबंधों की 75वीं सालगिरह के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अप्रत्याशित पहल करते हुए प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू को फोन कर बधाई दी. जिनपिंग ने कहा कि चीन-भारत संबंधों को दोनों पक्षों के हितों को देखते हुए ड्रैगन और एलिफेंट को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए. बता दें कि ड्रैगन जहां चीन का प्रतिनिधित्व करता है तो एलिफेंट इंडिया को दर्शाता है. यहां तक कि चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संदेश में कहा कि चीन भारत के साथ आपसी रणनीतिक सहयोग की दिशा में काम करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. इसके साथ ही सीमा विवाद को सही तरीके से निपटाने के लिए भी तैयार है.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले महीने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी तरह की घोषणा की थी, जब उन्होंने कहा था कि ड्रैगन और हाथी के बीच सहयोग चीन और भारत के लिए एकमात्र सही विकल्प है. वांग यी ने यह भी कहा कि पिछले अक्टूबर में कज़ान में शी और मोदी के बीच सफल बैठक के चलते दोनों देशों के संबंधों ने सकारात्मक प्रगति की है.
21 अक्टूबर 2024 को पूर्वी लद्दाख के देपसांग-डेमचोक क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद दिल्ली और बीजिंग के बीच कूटनीतिक गतिविधि में तेजी आई है. दोनों पक्षों के बीच विशेष प्रतिनिधियों सहित कई मंत्रिस्तरीय और शीर्ष राजनयिक स्तर की बैठकें हुई हैं. बीजिंग के साथ बेहतर संबंधों के लिए दिल्ली का खुलापन अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन के साथ पीएम मोदी के हालिया साक्षात्कार से भी स्पष्ट है, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के बारे में सकारात्मक बात की और कहा कि विवादित भारत-चीन सीमा पर सामान्य स्थिति लौट आई है.
मिक्स्ड सिग्नलभारत-चीन संबंधों में कई ऐसे इंडिकेटर्स हैं, जिससे मिक्स्ड सिग्नल सामने आ रहा है. जीयोपॉलिटिकल क्षेत्र में दोनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है. बीजिंग ने प्रमुख प्रभावशाली संस्थाओं में दिल्ली की सदस्यता को ब्लॉक करके भारत की महत्वाकांक्षाओं को लगातार निराश किया है. चीन ने भारत के पड़ोस में भी गहरी पैठ बना ली है और नेपाल, मालदीव, म्यांमार और बांग्लादेश में महत्वपूर्ण प्रभाव डालने के अलावा पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ सुरक्षा संबंध बनाए हुए है.
चीन वॉशिंगटन और ताइवान के साथ भारत के गहरे संबंधों और हिन्दुस्तान में दलाई लामा की मौजूदगी को लेकर संशय में है. चीन क्वाड और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) जैसे मंचों को चीन का मुकाबला करने के प्रयासों के रूप में देखता है. इसके अतिरिक्त, पड़ोसी देश दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता से निपटने में मदद करने के लिए दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के करीबी रक्षा संबंध विकसित करने के भी खिलाफ है.
चीन की मंशा पर सवालबॉर्डर डिस्प्यूट दोनों पड़ोसियों के बीच एक बड़ी अड़चन है. मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के बड़े पैमाने पर अतिक्रमण ने प्रमुख सीमा समझौतों का उल्लंघन करके ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (LAC) की स्थिति को बदल दिया, जिससे लंबे समय तक गतिरोध बना रहा. जबकि विरोधी सैनिकों ने बफर जोन के साथ विवादास्पद क्षेत्रों में वापसी की है, लेकिन डी-एस्केलेशन पर कोई प्रगति नहीं हुई है क्योंकि दोनों पक्ष आगे की तैनाती को बनाए रखना जारी रखते हैं. सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, LAC पर स्थिति ‘स्थिर लेकिन संवेदनशील’ बनी हुई है. उन्होंने वर्तमान में विवादित स्थानों पर सैनिकों की संख्या में कटौती की किसी भी योजना से इनकार किया. वास्तव में भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में तैनाती के लिए एक और डिवीजन बना रही है.
पिछले कुछ सालों में चीन ने लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक LAC को मजबूत किया है और साथ ही साथ सैन्य बुनियादी ढांचे का व्यापक निर्माण किया है. तिब्बत को एक मजबूत रक्षा कवच में बदल दिया गया है. 720 से अधिक सीमावर्ती गांव (ज़ियाओकांग) बनाए गए हैं, जिनमें से लगभग एक तिहाई LAC के आसपास के क्षेत्र में अग्रिम सीमा चौकियों के रूप में कार्य करते हैं. संबंधित क्षेत्रों पर नियंत्रण को वैध बनाने के लिए साल 2022 में सीमा रक्षा कानून बनाया गया था. चीनी नेता सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों से अलग करने पर अड़े हुए हैं.
सीमा तनाव के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार में मजबूत वृद्धि देखी गई है, जिसमें व्यापार संतुलन चीन के पक्ष में है. यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में आगे के निर्यात के लिए उपयोग किए जाने वाले सामानों के चीन से अपस्ट्रीम इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता के कारण है. हालांकि, चीनी आयात पर अत्यधिक निर्भरता कई तरह की दिक्कतों और कमजोरियों को उजागर करता है.
जयशंकर की वह बातभारत के मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में चीनी निवेश की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा कारणों से दूरसंचार, रक्षा उपकरण और डेटा-संवेदनशील आईटी उत्पाद-सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए. भारत-चीन सीमा मामलों पर WMCC की 33वीं बैठक 25 मार्च 2025 को बीजिंग में आयोजित की गई. दोनों पक्षों ने LAC पर स्थिति की समीक्षा की और दिसंबर 2024 में बीजिंग में सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की 23वीं बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाने के उपायों की खोज की. सीधी उड़ानों और कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने सहित लोगों के बीच आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने के लिए और प्रगति की गई. WMCC बैठक के एक दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्वीकार किया था कि भारत और चीन के बीच निकट भविष्य में मुद्दे होंगे, लेकिन साथ ही कहा कि संघर्ष से हटकर इनसे निपटने के तरीके हैं..
सतर्कता जरूरीइस साल के टू सेशंस (चीन के शीर्ष नेताओं की बैठक) के दौरान चीनी लीडरशिप ने अपनी नीतियों की समीक्षा की है, जो विघटनकारी वैश्विक आर्थिक-तकनीकी प्रतिस्पर्धा को झेलने के लिए नरम स्वर और इनोवेशन की खोज से स्पष्ट है. बीजिंग सप्लाई चेनको फिर से तैयार कर रहा है और ‘चीन प्लस वन’ रणनीति और अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर के तहत टेक्नोलॉजी बेस्ड विकास की ओर बढ़ रहा है. चीनी नीति निर्माता अपनी जीयोपॉलिटिकल महत्वाकांक्षाओं को प्राप्त करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मामूली रियायतें देने के लिए जाने जाते हैं. भारत और चीन के संबंधों में आई नरमी से कोई ठोस नीतिगत बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती है.हाशिए पर पड़ा भारत चीन की योजना के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है. भारत को चीन से निपटने के लिए होल-ऑफ-नेशन अप्रोच के साथ आगे बढ़ना चराहिए. हाथी-ड्रैगन टैंगो में दिल्ली को सतर्क आशावाद और एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और चीन के पिछले रिकॉर्ड से पूरी तरह अवगत होना चाहिए, जिसमें उसने अपनी सुविधा के अनुसार समझौतों और प्रोटोकॉल की खुलेआम अवहेलना की है.
(डिस्क्लेमर: लेखक वॉर वेटरन हैं और वर्तमान में सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर हैं. उपरोक्त लेख में व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं और केवल लेखक के अपने हैं. जरूरी नहीं कि वे न्यूज 18 हिन्दी के विचारों को दर्शाते हों. अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)