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Last Updated:January 09, 2026, 12:17 IST
Rare Tumor Pregnancy: गायनी विभाग ने एक दुर्लभ और जटिल मेडिकल केस में बड़ी सफलता हासिल की है. 8–10 लाख गर्भवतियों में से एक में पाई जाने वाली दुर्लभ गांठ का गर्भावस्था के दौरान ही सफल ऑपरेशन किया गया. डॉक्टरों की टीम ने बेहद सावधानी से सर्जरी करते हुए 6.327 किलो की विशाल गांठ को निकाला. इस हाई रिस्क सर्जरी में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं. यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है.
जोधपुर: जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में मिसाल कायम की है.उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में जनाना विंग के गायनी विभाग ने असाधारण कौशल और साहस का परिचय दिया.डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने मां और नवजात दोनों की जान सुरक्षित रखते हुए एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया.मथुरादास माथुर अस्पताल (एमडीएमएच) की जनाना विंग में गायनी विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है. अजमेर निवासी एक गर्भवती की बच्चेदानी के ऊपर 6.327 किलोग्राम वजनी गांठ थी. इससे उसके प्रसव के दौरान खतरे की आशंका था.
डॉक्टर्स ने 9 माह की गर्भावस्था पूरी होने पर एक जटिल ऑपरेशन किया और गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाला दिया. साथ ही सिजेरियन प्रसव के जरिये 2.63 किलोग्राम वजनी स्वस्थ बच्ची का जन्म करवा दिया.गांठ का आकार 22×18×16 सेंटीमीटर पाया गया.
8–10 लाख में एक मामला, गर्भावस्था में सामने आई असामान्य चुनौतीडॉक्टरों के अनुसार इतनी बड़ी गांठ गर्भावस्था में सामान्यतः 8 से 10 लाख महिलाओं में एक मामले में ही देखी जाती है, जबकि 5 से 7 सेंटीमीटर तक की गांठ कई गर्भवती महिलाओं में पाई जाती है. करीब पांच माह पहले चार माह की गर्भावस्था के दौरान इस गर्भवती के पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। तब जनाना विंग में भर्ती कर जांच की। जिसमें बच्चेदानी के ऊपर एक बड़ी गांठ विकसित होने का पता चला.इससे गर्भ में पल रहे शिशु का सामान्य विकास बाधित हो रहा था.
मां-बेटी दोनों स्वस्थ, दोनों को किया डिस्चार्ज नागौर निवासी महिला का इलाज डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा की निगरानी में चल रहा था. ऑपरेशन के बाद बच्चेदानी की लगातार जांच की गई और मां व नवजात दोनों की स्थिति स्थिर रही. प्रसव के बाद मां-बच्ची दोनों स्वस्थ है. गुरुवार को उन्हें डिस्चार्ज किया गया.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने संभाला मोर्चामामले की गंभीरता को देखते हुए एमडीएमएच जनाना विंग में गायनी, एनेस्थीसिया और नियोनेटल केयर विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित की गई. गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की लगातार मॉनिटरिंग की गई तथा प्रसव के लिए सही समय का सावधानीपूर्वक इंतजार किया गया. नौ माह की गर्भावस्था पूर्ण होने पर उच्च जोखिम को ध्यान में रखते हुए सिजेरियन ऑपरेशन का निर्णय लिया गया, जिसमें डॉक्टरों ने बड़ी सतर्कता और कुशलता के साथ गांठ को हटाते हुए सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया.
About the AuthorJagriti Dubey
With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें
Location :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
January 09, 2026, 12:13 IST
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मेडिकल चमत्कार! 8–10 लाख गर्भवतियों में एक को होने वाली दुर्लभ गांठ



