सर्दी और वैडिंग समारोहों के मौसम में गला हो गया है खराब? दादी-नानी के इन आसान नुख्से से आवाज बनाएं मस्त

Last Updated:November 25, 2025, 09:07 IST
गले की खराश ठीक करने के उपाय: सर्दी और शादी-ब्याह के व्यस्त मौसम में गले पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे आवाज बैठने और खराश की समस्या हो सकती है. गुनगुने पानी में नमक के गरारे, अदरक-शहद का मिश्रण और हल्दी वाला दूध जैसे पारंपरिक घरेलू उपाय गले की सूजन कम करने और आवाज को स्पष्ट बनाए रखने में मदद करते हैं. शुरुआती स्तर पर इन नुस्खों को अपनाने से स्थिति बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित की जा सकती है.
सर्दी का मौसम और शादी-ब्याह का व्यस्त दौर अक्सर आवाज पर अतिरिक्त दबाव डाल देता है, जिसके कारण बहुत-से लोगों को गला बैठने या खराश की समस्या का सामना करना पड़ता है. अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थ, देर रात तक जागना और निरंतर बातचीत करना गले की झिल्लियों को इफेक्ट करता है. ऐसे समय में कई पारंपरिक घरेलू उपाय और दादी-नानी के नुख्से जल्दी राहत प्रदान करते हैं और गले की सूजन को कम करने में प्रभावी सिद्ध होते हैं. शुरुआती स्तर पर घरेलू नुस्खे अपनाने से स्थिति बिगड़ने से पहले ही नियंत्रित की जा सकती है.

गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करना गले की सूजन को शांत करता है और संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं को कम करने में सहायक होता है. प्रतिदिन दो से तीन बार गरारे करने से गले की खुजली और दर्द में कमी आती है. नियमित रूप से गरारे करने से गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है और इसके साथ ही आवाज़ स्पष्ट बनी रहती है, जो शादी-समारोहों में निरंतर बोलने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.

अदरक और शहद का मिश्रण भी गले की तकलीफ में अत्यंत प्रभावी माना जाता है. अदरक में पाए जाने वाले प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व गले की सूजन कम करते हैं, जबकि शहद गले की परत पर सुरक्षात्मक असर प्रदान करता है. सुबह और शाम एक-एक चम्मच यह मिश्रण लेने से बैठी हुई आवाज धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है. कई लोग इसे हल्के गुनगुने पानी के साथ भी लेते हैं, जिससे गले में तुरंत आराम महसूस होता है और खांसी की तीव्रता भी कम हो जाती है.
Add as Preferred Source on Google

हल्दी वाला दूध, जिसे पारंपरिक रूप से गोल्डन मिल्क कहा जाता है, सर्दी के मौसम में एक सदियों पुराना उपचार है. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्व संक्रमणरोधी गुणों से भरपूर होता है, जो गले की झिल्लियों को शांत करता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. रात को सोने से पहले हल्का गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पीने से अगले दिन गले में भार और दर्द की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है. उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो लगातार आवाज़ का उपयोग करते हैं.

भाप लेना भी गले के स्वास्थ्य के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है. गर्म भाप गले और श्वसन तंत्र की नमी को संतुलित रखती है और सूखापन दूर करती है, जो आवाज बैठने का प्रमुख कारण होता है. कई लोगों को यह उपाय तब अधिक लाभ देता है जब भाप में अजवाइन या नीलगिरी का तेल की कुछ बूंदें डाल दी जाती है. भाप लेने से गले में जमा बलगम ढीला पड़ता है और सांस लेना भी सहज हो जाता है, जिससे गले पर अनावश्यक दबाव कम होता है.

सर्दी के मौसम में गले को स्वस्थ रखना चाहें तो कुछ सावधानियां भी काफी जरूरी है. जैसे ठंडे और गैसयुक्त पेय पदार्थों से परहेज़, धूल-धुआं से बचाव, और अधिक ऊंची आवाज में लगातार बोलने से दूरी रखना. साथ ही दिन भर में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीना गले की नमी को बनाए रखता है. यह दादी-नानी का नुख्सा आराम देने के साथ ही गले को अच्छा रखता है. इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
November 25, 2025, 09:07 IST
homelifestyle
सर्दी और शादी के मौसम में गला बैठ गया? दादी-नानी के उपायों से पाएं तुरंत राहत



