कमाई भी भारी, डिमांड भी जबरदस्त…. क्वॉलिटी ऐसी कि लोग हर साल इन्हीं से खरीदते हैं छुहारे!

भरतपुर: क्वॉलिटी ऐसी कि लोग हर साल इन्हीं से खरीदते हैं छुहारे!
Indore Chuhara Winter Demand Bharatpur: सर्दियों की दस्तक के साथ ही भरतपुर की सड़कों पर एक खास नज़ारा दिखने लगता है—इंदौर के छुहारे बेचने वाले मिनी ट्रक. हर वर्ष नवंबर से फरवरी तक शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में ये ट्रक लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. सुबह से देर शाम तक इनकी भीड़ यह साबित करती है कि भरतपुर में सर्दियों के मौसम में इंदौर के छुहारे लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं. यह तीन महीने का सीज़न इन परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य साधन होता है. हालांकि छुहारे किराना दुकानों पर पूरे साल मिल जाते हैं, लेकिन इंदौर से आने वाले छुहारे अपनी बेहतर क्वालिटी, मिठास और उचित कीमत के कारण शहर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं. स्थानीय बाजार की तुलना में ये छुहारे ज्यादा मुलायम, भरे और मीठे होते हैं. ग्राहक बताते हैं कि इंदौर वाले छुहारे “वैल्यू फॉर मनी” हैं—बेहतर स्वाद, सस्ता दाम और लंबी शेल्फ लाइफ. यही कारण है कि कई लोग हर साल इन मिनी ट्रकों का इंतज़ार करते हैं और एक ही बार में पूरे सीजन के लिए थोक में खरीद लेते हैं. करीब तीन दर्जन परिवार हर वर्ष लगभग तीन महीनों के लिए भरतपुर और पास के इलाकों में इंदौर के छुहारे बेचने आते हैं. ये परिवार सीधे इंदौर से अच्छा माल थोक में खरीदकर लाते हैं, जिससे क्वालिटी सुनिश्चित रहती है और ग्राहकों को सस्ती दरों पर अच्छी क्वालिटी के छुहारे मिलते हैं. परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनकी असली पहचान ही “ईमानदारी और क्वालिटी” है, जिसे वे पीढ़ियों से बनाए हुए हैं. यह व्यवसाय अब इन परिवारों की वर्षों पुरानी व्यावसायिक परंपरा बन चुका है. छुहारों की बिक्री नवंबर से शुरू होकर फरवरी तक चरम पर रहती है. ठंड बढ़ते ही पौष्टिक और गरम तासीर वाले छुहारों की मांग भी बढ़ जाती है. लोग इन्हें सिर्फ सूखे मेवे के रूप में ही नहीं, बल्कि हलवा, दूध, लड्डू और अन्य सर्दियों के पारंपरिक व्यंजनों में भी विशेष रूप से उपयोग करते हैं. इसी वजह से इंदौर से आने वाले ये छुहारे अब भरतपुर की सर्दियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. उचित दाम, बेहतर क्वॉलिटी और वर्षों से कायम विश्वास ने इन परिवारों को भरतपुर में एक खास पहचान दिलाई है. भरतपुरवासी हर सर्दी की शुरुआत के साथ ही इन मिनी ट्रकों का बेसब्री से इंतज़ार करने लगे हैं, और ये छुहारे बेचने वाले अपने स्थायी ग्राहकों का. यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास और परंपरा का रिश्ता बन गया है.
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