Egypt High Speed Train: 250KM/h की रफ्तार, 4 घंटे में दिल्ली से बिहार, ट्रेन है या महाराणा प्रताप का घोड़ा! किस देश का कमाल?

Agency:एजेंसियां
Last Updated:November 15, 2025, 23:34 IST
Egypt High Speed Train: मिस्र ने 250 km/h की रफ्तार वाली हाई-स्पीड वेलारो (Velaro) ट्रेन लॉन्च कर दुनिया का ध्यान खींचा है. यह ट्रेन रेगिस्तान जैसे कठिन मौसम में भी तेज रफ्तार से दौड़ेगी और 2000 KM के नेटवर्क पर यात्रा समय 50% तक घटाएगी. लोग पूछ रहे हैं ये ट्रेन है या चेतक घोड़ा? मिस्र का यह प्रोजेक्ट अफ्रीका के हाई-स्पीड रेल मिशन का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. (सभी फोटो AP)
दुनिया तेज रफ्तार से भाग रही है और अब ट्रेनें भी उसी स्पीड में उड़ान भरने लगी हैं. 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड वाली हाई-स्पीड ट्रेन जो देखने में किसी साइंस फिक्शन फिल्म का हिस्सा लगे अब मिस्र में हकीकत बन चुकी है. सोचिए अगर यही रफ्तार भारत में आ जाए तो दिल्ली से बिहार महज 4 घंटे. इसीलिए लोग पूछ रहे हैं- ये ट्रेन है या महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा?

मिस्र में हाल ही में Siemens Mobility ने अपने नए वेलारो हाई-स्पीड ट्रेन मॉडल को पेश किया है, जो 250 km/h यानी 155 mph की टॉप स्पीड से दौड़ सकता है. यह ट्रेन आने वाले समय में मिस्र के 2000 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड नेटवर्क पर चलेगी और देश की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देगी. दुनिया की नजरों में अब यह प्रोजेक्ट अफ्रीका का सबसे महत्वाकांक्षी रेल मिशन बनकर उभरा है.

मिस्र की राजधानी काहिरा में TransMEA 2025 शो के दौरान Siemens Mobility ने इन ट्रेनों का पब्लिक डेब्यू किया. वेलारो ट्रेन न सिर्फ हाई-स्पीड है, बल्कि 489 यात्रियों की क्षमता, आधुनिक डिजाइन और रेगिस्तान जैसे कठोर मौसम को झेलने की क्षमता भी रखती है. मिस्र का कहना है कि हाई-स्पीड नेटवर्क से यात्रा समय 50% तक कम हो जाएगा और 90% आबादी को इसका सीधा फायदा मिलेगा.

मिस्र का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क कुल 2000 किलोमीटर लंबा होगा. इसमें तीन प्रमुख लाइनें शामिल हैं. इन्हें देश के सबसे बड़े शहरों को जोड़ने और इकोनॉमिक कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है. Siemens, Orascom Construction और Arab Contractors मिलकर इस पूरे नेटवर्क को तैयार कर रहे हैं. यह प्रोजेक्ट पहली बार 2018 में घोषित हुआ था और अब अपनी सबसे बड़ी छलांग पर है.

वेलारो ट्रेनें जर्मनी में डिजाइन और निर्माण हो रही हैं. मिस्र के रेगिस्तानी इलाकों में तेज धूप, 45°C तक तापमान, रेत और धूल तेजी से मशीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी वजह से ट्रेन में हाई-ग्रेड कूलिंग सिस्टम, एडवांस एयर फिल्टर और सैंड-रेसिस्ट फीचर्स जोड़े गए हैं. यह पहली ट्रेन है जिसे खास तौर पर अफ्रीकी रेगिस्तानी इलाकों के लिए मॉडिफाई किया गया है.

9 नवंबर को Siemens की Desiro High Capacity ट्रेन ने भी अपनी पहली यात्रा पूरी की. यह ट्रेन 160 km/h की स्पीड तक जाती है और मिस्र के नए 660 किलोमीटर लंबे ग्रीन लाइन नेटवर्क का हिस्सा है, जिसे “Suez Canal on Rails” कहा जा रहा है. यह लाइन रेड सी से लेकर भूमध्य सागर तक पोर्ट्स और शहरों को जोड़ेगी और मिस्र की माल-ढुलाई क्षमता को 46% तक बढ़ाएगी.

मिस्र से पहले अफ्रीका में हाई-स्पीड रेल का शुभारंभ मोरक्को ने किया था. यहां 2018 में तांगीयर–कासाब्लांका लाइन शुरू हुई थी, जो 320 km/h की स्पीड से चलती है. अब नाइजीरिया भी 60-बिलियन डॉलर हाई-स्पीड प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो 4000 KM लंबा होगा. अफ्रीकी यूनियन की योजना है कि आने वाले दशकों में महाद्वीप को हाई-स्पीड रेल के जरिए जोड़कर व्यापार और कनेक्टिविटी को नई दिशा दी जाए.

हाई-स्पीड रेल आधुनिक समय की जरूरत बन गई है. यह तेज, सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और यात्रियों व उद्योग, दोनों के लिए फायदेमंद. कीमतें कम, समय बचत ज्यादा. अफ्रीका मानता है कि हाई-स्पीड रेल से आने वाले वर्षों में परिवहन लागत 40% तक घटेगी और आंतरिक व्यापार 15% से बढ़कर 50% से ज्यादा हो सकता है. यही कारण है कि दुनिया अब इसी दिशा में दौड़ रही है.
First Published :
November 15, 2025, 23:34 IST
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250KM/h की रफ्तार: दिल्ली–बिहार 4 घंटे में! आखिर किस देश की ये ट्रेन?



