हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री विवाद गहराया, 17 दिसंबर की महापंचायत को लेकर तैयारियां तेज; प्रशासन अलर्ट मोड पर

हनुमानगढ़. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड की एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. 10 दिसंबर को हुई हिंसक झड़प और आगजनी के बाद किसान अब 17 दिसंबर को जिला कलेक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण महापंचायत की घोषणा कर चुके हैं. किसान नेता इसे फैक्ट्री को पूरी तरह हटाने की लड़ाई का बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन इस बार किसी भी तरह की चूक नहीं दोहराना चाहता और पूरी सतर्कता बरत रहा है. 10 दिसंबर की घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया था. टिब्बी में आयोजित महापंचायत के बाद हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवार होकर फैक्ट्री साइट पहुंचे. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने फैक्ट्री की बाउंड्री वॉल तोड़ी, परिसर में घुसकर तोड़फोड़ की और एक दर्जन से अधिक वाहनों में आग लगा दी. पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, जिसमें कांग्रेस विधायक अभिमन्यु पूनिया समेत दर्जनों लोग घायल हुए.
हिंसा में 107 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई और 40 से अधिक गिरफ्तारियां हुई. इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर धारा 144 लागू की गई. किसानों का आरोप है कि फैक्ट्री से वायु प्रदूषण बढ़ेगा, भूजल जहरीला होगा और खेती की जमीन बंजर हो जाएगी.कंपनी का दावा है कि यह 450 करोड़ का अनाज आधारित 40 मेगावाट प्लांट केंद्र की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को मजबूत करेगा और सैकड़ों नौकरियां देगा. हिंसा के बाद प्रशासन ने किसान प्रतिनिधियों से वार्ता की. ADGP वीके सिंह, IG हेमंत शर्मा, कलेक्टर खुशाल यादव और SP की मौजूदगी में फैक्ट्री के मानकों की समीक्षा तक निर्माण रोकने का आश्वासन दिया गया.
17 दिसंबर को होने वाले महापंचायत को लेकर तैयारी तेज
कंपनी ने भी लिखित में काम रोकने का वादा किया, लेकिन किसानों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया. उनका कहना है कि जब तक फैक्ट्री स्थायी रूप से बंद नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा. अब किसान 17 दिसंबर की महापंचायत की जोर-शोर से तैयारियां कर रहे हैं. गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चल रहा है. किसान नेताओं का दावा है कि इसमें राकेश टिकैत जैसे बड़े नेता, पंजाब-हरियाणा के किसान संगठन और कई यूनियनें शामिल होंगी. महापंचायत को शांतिपूर्ण रखने की घोषणा की गई है, लेकिन किसान फैक्ट्री हटाने की मांग पर अड़े हैं. दूसरी तरफ, जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है.
प्रभारी मंत्री ने कहा- वार्ता से ही हल निकलेगा
10 दिसंबर की घटना से सबक लेते हुए इस बार भारी पुलिस बल तैनात करने की योजना है. कलेक्ट्रेट और आस-पास के क्षेत्रों में अतिरिक्त जाब्ता लगाया जाएगा. आरएसी और अन्य बलों की तैनाती की जा रही है. प्रशासन नहीं चाहता कि फिर कोई हिंसक घटना हो. साथ ही, महापंचायत से पहले मामले को सुलझाने के प्रयास भी जारी है. प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि विकास में विरोध स्वाभाविक है और वार्ता से हल निकलेगा, लेकिन किसानों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा.
डेढ़ साल से चल रहा है किसानों का आंदोलन
यह विवाद डेढ़ साल से अधिक समय से चल रहा है. किसान ‘एथेनॉल फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले एकजुट हैं. एक तरफ केंद्र की नीति को सपोर्ट करने वाला प्रोजेक्ट, दूसरी तरफ स्थानीय जल-जमीन-पर्यावरण की चिंता है. माहौल तनावपूर्ण है, लेकिन दोनों पक्ष वार्ता की उम्मीद जता रहे हैं. 17 दिसंबर की महापंचायत अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. अगर शांतिपूर्ण रही तो बातचीत का रास्ता खुलेगा, वरना विवाद और भड़क सकता है. इलाके में शांति बहाली के लिए सभी की निगाहें प्रशासन और किसानों पर टिकी हैं.



