Rajasthan

जल प्रबंधन व जैव विविधता का उदाहरण

Last Updated:December 04, 2025, 18:07 IST

भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जो 29 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, जैव-विविधता संरक्षण का उदाहरण है. यह उद्यान न केवल पक्षियों के लिए आश्रय स्थल है, बल्कि राजस्थान के 18वीं सदी के महाराजा सूरजमल द्वारा विकसित अद्वितीय जल प्रबंधन प्रणाली का परिणाम भी है. कोहनी और अजान बांधों के माध्यम से नियंत्रित जल प्रवाह ने सूखे इलाके में स्थायी वेटलैंड तैयार किया.

भरतपुर. विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस के मौके पर जब दुनिया जैव-विविधता बचाने की बात कर रही है. तब राजस्थान के भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान एक ऐसा उदाहरण बनकर सामने आता है. जहां प्रकृति और मानव-निर्मित जल प्रबंधन मिलकर चमत्कार रचते हैं. 29 वर्ग किलोमीटर में फैला यह वेटलैंड यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दुनिया के उन बेहद खास अभयारण्यों में गिना जाता है. जिनकी पूरी पारिस्थितिकी पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है.

केवलादेव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां का जल प्रबंधन न पूरी तरह प्राकृतिक है और न ही पूरी तरह कृत्रिम यह एक ऐसा मिश्रण है जो राजस्थान के इतिहास और बुद्धिमत्ता को दिखाता है. 18वीं सदी में भरतपुर के महाराजा सूरजमल ने गंभीरी और बाणगंगा नदियों के प्रवाह का गहराई से अध्ययन किया और उसके बाद कोहनी बांध व अजान बांध का निर्माण कराया इन बांधों के साथ सेवला हेड से एक मुख्य नहर बनाई गई जिससे बरसात का पानी नियंत्रित तरीके से उद्यान के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता था पूरे क्षेत्र को आठ बड़े जल-ब्लॉकों में बांटा गया था. जहां पहले पानी रोका जाता और फिर धीरे-धीरे छोटे ब्लॉकों में छोड़ा जाता यह उस दौर की अनोखी जल-इंजीनियरिंग थी जिसने सूखे इलाके में स्थायी वेटलैंड तैयार किया.

पिछले दो मानसून केवलादेव के लिए साबित हुए हैं बेहद शुभ 

पांचना बांध से मिले अतिरिक्त और स्वच्छ पानी ने इस वेटलैंड में फिर से जान डाल दी है. 2024 और 2025 की अच्छी बारिश के बाद पार्क के तालाब और झीलें भर गई जिससे हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी लौटने लगे सारस क्रेन, पेंटेड स्टॉर्क, पेलिकन, बार-हेडेड गूज.  कई विदेशी और स्थानीय पक्षियों ने एक बार फिर यहां डेरा जमाना शुरू कर दिया है. पार्क की वही पुरानी रौनक वही चहचहाहट और वही जीवंतता अब फिर देखने को मिल रही है.

केवलादेव सिर्फ एक पक्षी अभयारण्य नहीं है बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सही योजना और सही दिशा में किया गया जल प्रबंधन पर्यावरण को नया जीवन दे सकता है. यह भी सिखाता है कि पानी की एक-एक बूंद कितनी कीमती है. विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस पर सबसे बड़ा संदेश यही है कि केवलादेव को उसका जीवनदायी पानी समय पर और पर्याप्त मात्रा में मिलता रहना चाहिए तभी आने वाली पीढ़ियां भी इस पार्क में कदंब के पेड़ों की छांव शांत झीलों का सौंदर्य और दूर देशों से आए पक्षियों की उड़ान को देख सकेंगी.

About the AuthorMonali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

Location :

Bharatpur,Rajasthan

First Published :

December 04, 2025, 18:07 IST

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भरतपुर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान दे रहा जल प्रबंधन व जैव विविधता का उदाहरण

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