अलवर में रबी फसलों की बुवाई तेज, सरसों और सब्जियों से किसानों को लाभ.

अलवर. जिले में किसानों ने सरसों की बुवाई कर दी है और फसल धीरे-धीरे बढ़ रही है. वहीं, गेहूं, चना और जौ की बुवाई जिले में तेज गति से चल रही है, हाल ही में हुई मावठ से किसानों को काफी लाभ हुआ है क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और किसान बिना अतिरिक्त सिंचाई के बुवाई कर पा रहे हैं. ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे अपने सरसों के खेतों से खरपतवार हटाएं.
इसी समय, बोई गई सरसों की फसल में विरलीकरण भी करना चाहिए, ताकि घने खेतों में अतिरिक्त पौधों को हटाकर शेष पौधों को पर्याप्त जगह, रोशनी और पोषक तत्व मिल सकें. अभी इस सीजन में हरि सब्जियों की खेती भी की जा रही है. ऐसे में किसान अपने खेतों की मेड़ पर मूली, पालक, शलगम, बथुआ, मैथी, गांठ गोभी और धनिया की बुवाई कर सकते हैं. इससे वे सरसों के साथ-साथ सब्जियां भी उगा कर अतिरिक्त मुनाफा कमा सकते हैं.
इस बार उत्पादन में होगी उल्लेखनीय बढ़ोतरी
खैरथल-तिजारा जिले में रबी फसलों की बुवाई इस बार उम्मीद से अधिक देखी गई है, कृषि विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 में जिले के लिए 1,35,000 हेक्टेयर रबी बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के 1,25,000 हेक्टेयर से 10,000 हेक्टेयर अधिक है. विभाग का मानना है कि अनुकूल मौसम और खाद-पानी की सुचारू उपलब्धता के कारण इस बार उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इस समय सरसों साग में पूसा साग-1, मूली में जापानी व्हाइट, हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेंच मूली), पालक में ऑल ग्रीन, पूसा भारती, शलगम में पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म, बथुआ में पूसाबथुआ-1, मैथी में पूसा कसूरी, गांठ गोभी में व्हाइट वियना, पर्पल वियना, और धनिया में पंत हरितमा या संकर किस्में की बुवाई मेड़ पर करने की सलाह दी जाती है.
इससे किसानों को सरसों के साथ-साथ सब्जियों का उत्पादन भी मिलेगा और होने वाले खरपतवार से भी निजात मिलेगी. विजय सिंह, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, खैरथल-तिजारा, ने बताया कि जिले में अच्छी बारिश और जल उपलब्धता के कारण बुवाई तेज है. जिले में इस बार 1,35,000 हेक्टेयर रबी बुवाई का लक्ष्य रखा गया है और उत्पादन को लेकर पूरी उम्मीद है.



