Rajasthan

खजूर की खेती से किसान कर सकते हैं बंपर कमाई, एक पेड़ से 200 किलो तक उत्पादन संभव, अपनाएं ये स्मार्ट तकनीक

Last Updated:December 14, 2025, 06:31 IST

Date Palm Farming Tips: खजूर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी, अच्छा जल निकास और 25 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है.एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर लगभग 156 पौधों की जरूरत होती है, जिसमें मादा और नर पौधों का संतुलन जरूरी है. टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों में तीसरे वर्ष से ही फल लगने लगते हैं, जबकि 15 साल पुराने पेड़ से 200 किलो तक उत्पादन संभव है. सही भंडारण और समय पर तुड़ाई से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं.Agriculture Tips

खजूर की खेती आज के समय में किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रमुख माध्यम बन रही है. किसान उन्नत तकनीक, टिश्यू कल्चर पौधों और वैज्ञानिक तरीके के माध्यम से खजूर उत्पादन को अधिक लाभकारी बना सकते है. खजूर में कार्बोहाइड्रेट, खनिज लवण, विटामिन-बी और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ ही हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने में सहायक हैं, ऐसे में खजूर की मार्केट में लगातार डिमांड बढ़ती जा रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि यह रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्रों की जलवायु खजूर खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है. इसे में राजस्थान की जलवायु उसके लिए उपयुक्त है.

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उन्होंने बताया कि खजूर की खेती के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे सही रहती है. इसके अलावा इसकी बुआई के लिए मट्टी कर पीएच मान 7 से 8 के होना चाहिए. वहीं, खेत की ऊपरी दो मीटर मिट्टी कठोर परत और कंकड़ों से मुक्त होनी चाहिए, ताकि जड़ें गहराई तक फैल सकें. खजूर को लंबी गर्म और शुष्क ग्रीष्म ऋतु, मध्यम सर्दी तथा फल पकने के समय वर्षा रहित मौसम की आवश्यकता होती है. 25 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान इसकी बढ़वार के लिए उपयुक्त माना जाता है.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि खजूर के पौधों को फूल आने से पहले और फलों के विकास के दौरान पानी की जरूरत होती है. ऐसे में किसान आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं. इससे पौधों की जड़ों तक नमी बनी रहती है और पानी की भी बचत होती है. इसके अलावा किसान भूमि में कम से कम दो फीट गहराई तक नमी बनाए रखना आवश्यक है, जिससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और भविष्य में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके. नियमित सिंचाई और संतुलित पोषण से पेड़ों की आयु और उत्पादकता दोनों बढ़ती है.

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एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर खजूर की खेती के लिए लगभग 148 मादा पौधों के साथ 8 नर पौधों सहित कुल लगभग 156 पौधों की आवश्यकता होती है, ताकि परागण सुचारू रूप से हो सके. मादा किस्मों में बरही, खुनैजी, मेडजूल, खलास, खद्रावी, सगई, जामली, अजवा, नबुत सुल्तान और हलवा सही रहती है. इसके अलावा जबकि नर किस्मों में अल-इन-सिटी और धनामी उपयोगी मानी जाती हैं. सही किस्मों का चयन बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाता है.

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खजूर में फल आने में लगभग चार वर्ष का समय लगता है, लेकिन टिश्यू कल्चर से तैयार पौधों में तीसरे वर्ष से ही फल लगना शुरू हो जाता है. दस वर्ष की आयु में एक खजूर के पेड़ से औसतन 80 किलोग्राम डोका फल प्राप्त होते हैं, जबकि 15 वर्ष की आयु में यह उत्पादन 100 से 200 किलोग्राम तक पहुंच सकता है. इसके अलावा एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि पौधों की सही देखभाल और कटाई-छंटाई से भी उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.

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उन्होंने बताया कि, पके खजूरों को 5.5 से 7.2 डिग्री सेल्सियस तापमान और 85 से 90 प्रतिशत आर्द्रता वाले शीतगृह में दो सप्ताह रखे जा सकते हैं. वहीं, छुहारों को 1 से 11 डिग्री तापमान और 65 से 70 प्रतिशत आर्द्रता में लगभग 13 माह तक भंडारित किया जा सकता है. सही भंडारण से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होता है. राजस्थान में फल पकने के समय वर्षा शुरू हो जाने के कारण खजूर को पूर्ण परिपक्व अवस्था तक पेड़ पर रखना कठिन होता है. ऐसे में पीले या लाल होने पर ही काट लिया जाता है. छुहारा बनाने के लिए भी इसी अवस्था में तुड़ाई की जाती है.

First Published :

December 14, 2025, 06:31 IST

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खजूर की खेती से भी किसान कर सकते हैं बंपर कमाई, बस अपना लें ये स्मार्ट तकनीक

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